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मालदीवः निर्वाचित राष्ट्रपति सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा ले सकते हैं PM मोदी

अगर सब कुछ सही रहा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने नवनिर्वाचित राष्ट्रपति सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए मालदीव का दौरा कर सकते हैं. 3 साल पहले मोदी का यहां आने का कार्यक्रम था, लेकिन बाद में रद्द कर दिया गया.

मलेशिया के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति सोलिह (फाइल फोटो/ एजेंसी) मलेशिया के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति सोलिह (फाइल फोटो/ एजेंसी)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 नवंबर को मालदीव की राजधानी माले में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इब्राहीम महमूद सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा ले सकते हैं.

माले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उन्हें नई दिल्ली से इस संबंध में बेहद सकारात्मक संदेश मिले हैं. सूत्रों ने यह भी बताया कि शपथ ग्रहण समारोह के इतर दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच द्वीपक्षीय वार्ता भी हो सकती है.

नवनिर्वाचित राष्ट्रपति सोलिह से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कूटनीतिक चैनल के माध्यम से शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए आधिकारिक निमंत्रण तैयार किया जा रहा है. नई दिल्ली से जुड़े सूत्र भी कहते हैं कि इस यात्रा के दौरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत हो सकती है.

विदेश मंत्रालय इस संबंध में कुछ भी कहने से बच रहा है क्योंकि यह द्वीप समूह देश इस समारोह के लिए कई देशों के नेताओं को आमंत्रित कर रहा है. हालांकि इस संबंध में यह पुष्टि होना बाकी है कि कौन-कौन शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो रहा है, लेकिन कहा जा रहा है कि सोलिह की इच्छा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समारोह में भाग लें.

यह संदेश भारतीय प्रशांत महासागर क्षेत्र में भारतीय विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव दिनेश पटनायक दे दिया गया था, जो  24 से 26 अक्टूबर के बीच मालदीव में मौजूद थे. पटनायक उस दौरान वहां के कई अफसरों से मिले थे.

पड़ोस के मुल्कों में मालदीव ही ऐसा देश है, जहां का दौरा पीएम मोदी ने नहीं किया है. प्रधानमंत्री को 2015 में ही वहां जाना था. सारी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं लेकिन अचानक वहां की सियासी परिस्थिति बिगड़ गई और उनका दौरा रद्द हो गया.

सितंबर में मालदीव में राष्ट्रपति चुनाव में सोलिह ने राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन अब्दुल गयूम को हराकर चुनाव जीता था. प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के पहले ऐसे नेता थे जिन्होंने सोलिह की जीत पर फोन कर बधाई दी थी. वहीं विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि उम्मीद है इस जीत से मालदीव में लोकतंत्र की वापसी होगी. साथ ही भारत 'पड़ोसी सबसे पहले' नीति के तहत नए नेतृत्व के साथ काम करने को तैयार है.

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