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स्वामी ने किया ऐसा ट्वीट कि भड़क गया मालदीव, भारतीय उच्चायुक्त तलब

गौरतलब है कि मालदीव में 23 सितंबर को होने राष्ट्रपति चुनाव होने हैं. इस बीच पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भी इन चुनावों में गड़बड़ी होने की आशंका जताई है.

भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी (File, Getty) भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी (File, Getty)

भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का एक ट्वीट केंद्र सरकार के लिए चिंता बढ़ाता जा रहा है. स्वामी ने हाल ही में मालदीव को लेकर ऐसा ट्वीट किया जिससे भारत का पुराना साथी खफा हो गया है. इस बीच मालदीव के विदेश सचिव अहमद सरीर ने भारतीय हाई कमिश्नर अखिलेश मिश्रा को इस रविवार समन किया.

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, मालदीव के विदेश सचिव ने स्वामी के ट्वीट पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है. इसके अलावा आधिकारिक तौर पर भी मालदीव की सरकार ने भारत सरकार के आगे इस बयान पर चिंता व्यक्त की है और इसे चौंकाने वाला बताया है.

आखिर क्या था स्वामी का ट्वीट...?

आपको बता दें कि 24 अगस्त को सुब्रमण्यण स्वामी ने ट्वीट किया था कि "अगर मालदीव में चुनाव के दौरान गड़बड़ी होती है तो भारत को हमला बोल देना चाहिए." स्वामी के इस बयान पर भारत सरकार ने किसी तरह की टिप्पणी करने से इनकार किया था. सरकार की ओर से कहा गया था कि वह उनके निजी विचार हैं, ऐेसे में वह किसी को कुछ कहने से नहीं रोक सकते हैं.

मालदीव के नागरिकों और स्वामी में हुई बहस

स्वामी के इस ट्वीट के बाद कई मालदीव के नागरिकों ने ट्विटर पर ही रोष जाहिर किया. एक यूजर ने लिखा कि भारत को सबसे पहले अपनी चिंताओं को दूर करना चाहिए. हम किसी को भी हमारे ऊपर हमला करना का मौका नहीं देंगे. हम लड़ेंगे, साइज मायने नहीं रखता है. हमें तुम्हारी मदद की जरूरत नहीं है.

इस स्वामी ने जवाब दिया कि चुनाव में धांधली मत करो. हमने तुम्हें 1988 में तमिल आतंकियों से बचाया था, क्योंकि जब मालदीव में हमने भारतीय सेना को भेजा था . जब तो किसी ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी. इतना ही नहीं स्वामी ने लिखा कि अगर मालदीव में चुनावों में धांधली हुई तो देश इस्लामिक आतंक का गढ़ बन जाएगा.

गौरतलब है कि भारत और मालदीव के रिश्ते यामीन द्वारा फरवरी माह में लगाए गए आपातकाल के बाद से खराब हुए हैं. यह आपातकाल तब लगा था जब जनवरी-फरवरी के महीने में जब मालदीव के सुप्रीम कोर्ट ने विरोधी नेताओं की रिहाई के आदेश दिए तो यामीन सरकार ने उसकी नाफरमानी करते हुए शीर्ष अदालत के जजों को भी गिरफ्तार करते हुए विरोधी नेताओं पर फिर से मुकदमा चलाने का आदेश दिया और इसी के साथ देश में आपातकाल की घोषणा की थी.

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