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मालदीव में राष्ट्रपति का शपथ समारोह नवंबर में, शामिल हो सकते हैं PM मोदी

नवंबर में शपथ समारोह का आयोजन होगा. जिस प्रकार से पीएम मोदी ने सालिह को फोन कर बधाई दी और बदले में सालिह ने भी आभार जताया, उससे कयास तेज हो गए हैं कि पीएम मोदी शपथ में हिस्सा लेंगे. वैसे पड़ोस में मालदीव ही ऐसा देश है, जहां पीएम मोदी नहीं गए हैं.

सोलिह की फाइल फोटो सोलिह की फाइल फोटो

मालदीव के निर्वाचित राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के शपथ समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रण भेजे जाने की संभावना है. सोलिह का शपथ ग्रहण समारोह नवंबर में आयोजित किया जाएगा क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन गयूम का कार्यकाल 17 नवंबर को पूरा होगा. वे तब तक इस पद पर बने रह सकते हैं.

मालदीव में फिलहाल अगली सरकार को सत्तासीन करने की तैयारियां चल रही हैं. इस बीच, शपथ समारोह की भी तैयारियां जोरशोर से चालू हैं. इसके लिए एक टीम काम में लगी है.

पड़ोस के मुल्कों में मालदीव ही ऐसा देश है, जहां का दौरा पीएम मोदी ने नहीं किया है. पीएम को 2015 में ही वहां जाना था. सारी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं लेकिन अचानक वहां की सियासी परिस्थिति बिगड़ गई और पीएम का दौरा रद्द हो गया.

इससे पहले सोमवार को पीएम मोदी ने फोन कर सोलिह को जीत की बधाई दी. पीएम ने मालदीव में लोकतंत्र की मजबूती, शांति और समृद्धि की भी कामना की. बदले में सोलिह ने प्रधानमंत्री का आभार जताया और पीएम को धन्यवाद दिया. दोनों नेताओं ने भारत-मालदीव के बीच शांति और सौहार्द्र के रिश्ते कायम करने का संकल्प जताया.

मालदीव में दशकों तक रही तानाशाही के दौरान लोकतंत्र के लिए लड़ने वाले सोलिह एक वक्त पर संसद में बहुमत के नेता भी रहे हैं. गौरतलब है कि यामीन सरकार की ओर से एमडीपी के सभी शीर्ष नेताओं को जेल में डाले जाने या निर्वासित किए जाने के बाद सोलिह राष्ट्रपति चुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवार बने थे.

मालदीव के चुनाव आयोग के प्रवक्ता ने कहा कि आधिकारिक चुनाव परिणाम की घोषणा शनिवार तक नहीं की जाएगी. सभी दलों और उम्मीदवारों को चुनाव परिणाम को अदालत में चुनौती देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जा रहा है.

उधर, निवर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन अब्दुल गयूम ने अपनी हार तो स्वीकार कर ली लेकिन वह फिलहाल राष्ट्रपति पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं. यामीन ने दलील दी है कि उनका कार्यकाल 17 नवंबर को पूरा होगा और तब तक वो पद पर बने रहेंगे.

यामीन के इस कदम से ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि वो इन 50 दिनों में अपने व्यापारिक समझौते से जुड़े कागजात छिपा सकते हैं और अपने खिलाफ जाने वाले सबूतों को मिटा सकते हैं. उनपर राजनेताओं के जेल भेजने से लेकर असहमति की आवाज को दबाने के आरोप हैं. हालांकि खुद यामीन का कहना है कि उन्होंने यह वक्त सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण के लिए लिया है.

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