पाकिस्तान ने मई 2025 में अमेरिका के साथ अपने संबंधों को सुधारने के लिए एक रणनीतिक पहल की, जिसमें सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की वाशिंगटन यात्रा और आर्थिक सुधारों पर जोर शामिल था. पूर्व अमेरिकी राजदूत पॉल डब्ल्यू. जोन्स के माध्यम से विदेश विभाग को भेजे गए ईमेल में पाकिस्तान ने आर्थिक साझेदारी, खनिज संसाधनों और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग का प्रस्ताव रखा गया था. इस प्रयास का मकसद अमेरिका के साथ कूटनीतिक बाधाओं को दूर करना और आर्थिक निवेश को बढ़ावा देना था. पाकिस्तान ने चीन और भारत के साथ अपने संबंधों को संतुलित करते हुए अमेरिका के साथ मजबूत सहयोग की इच्छा जताई.
जोन्स ने अपने ईमेल में पारदर्शी तरीके से स्वीकार किया कि उनकी फर्म पाकिस्तान सरकार के पंजीकृत एजेंट के रूप में काम कर रही है. उन्होंने अमेरिकी विदेश विभाग से पूछा कि क्या उनका प्रस्ताव वाशिंगटन की उम्मीदों के खिलाफ तो नहीं लग रहा है.
भारत-PAK संबंधों के चश्मे से संवाद
जोन्स ने अपने ईमेल में एरिक मायर्स के साथ बैठक को दोबारा निर्धारित करने का सुझाव दिया जो दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के गहरे जानकार रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान को इस बात का पूरा एहसास था कि अमेरिका के साथ उसकी किसी भी बातचीत को भारत-अमेरिका संबंधों के नजरिए से ही परखा जाएगा. इसीलिए इस्लामाबाद ने अनुभवी अमेरिकी मध्यस्थों का सहारा लिया, ताकि वे विदेश विभाग को सही तरीके से प्रभावित कर सकें और कूटनीतिक बाधाओं को दूर कर सकें.
एलिजाबेथ हॉर्स्ट की महत्वपूर्ण भूमिका
बता दें कि ये ईमेल एलिजाबेथ के हॉर्स्ट को संबोधित था, जो उस वक्त दक्षिण और मध्य एशियाई नीति देख रही थीं. हॉर्स्ट पहले श्रीलंका में अमेरिकी राजदूत के रूप में काम कर चुकी थीं, जहां उन्होंने कर्ज संकट और चीनी निवेश जैसे मुद्दों को करीब से देखा था.
पाकिस्तान के लिए उनका अनुभव काफी मायने रखता था, क्योंकि वह भी लगभग वैसी ही आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा था. पाकिस्तान चाहता था कि हॉर्स्ट उनके आर्थिक सुधारों के नैरेटिव को वाशिंगटन में मजबूती से पेश करें.
FATF का साया
ईमेल में जोन्स ने एफएटीएफ (FATF) के मुद्दे पर हॉर्स्ट की टीम के साथ अलग से चर्चा करने की अपील की. मई 2025 में भारत ने पाकिस्तान की टेरर फंडिंग को लेकर एक वैश्विक अभियान चलाया था और एफएटीएफ को सबूतों वाला डोजियर सौंपने की तैयारी में था. पाकिस्तान को डर था कि उसे दोबारा ग्रे लिस्ट में डाल दिया जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय कर्ज लेना मुश्किल हो जाता. इसी डर को कम करने के लिए पाकिस्तान ने वाशिंगटन में सक्रियता बढ़ा दी थी.
पाकिस्तान का ऑफर
इस ईमेल के साथ एक एक पेज का पॉलिसी डॉक्यूमेंट भी शामिल था, जिसमें पाकिस्तान ने खुद को एक आर्थिक साझीदार के तौर पर पेश किया. उसने अमेरिका से अधिक कृषि और ऊर्जा उत्पाद खरीदने, टैरिफ कम करने और व्यापार घाटे को जल्द-से-जल्द पाटने का वादा किया. पाकिस्तान ने ये भी बताया कि उसका अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष 3 अरब डॉलर से कम है, जिसे आसानी से संतुलित किया जा सकता है. इस प्रस्ताव को पूरी तरह से व्यावसायिक और लेन-देन वाली भाषा में तैयार किया गया था.
सेना का आर्थिक दबदबा
निवेश के लिए पाकिस्तान ने 'विशेष निवेश सुविधा परिषद' (SIFC) के जरिए अमेरिकी कंपनियों को विशेष रियायतें देने की पेशकश की. दस्तावेज में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि इस परिषद की अध्यक्षता संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख करते हैं. ये एक दुर्लभ स्वीकारोक्ति थी कि पाकिस्तान के आर्थिक फैसलों में सेना की केंद्रीय भूमिका है. इसके तहत खनन, ऊर्जा और डेटा सेंटर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में अमेरिकी फर्मों को प्राथमिकता देने का वादा किया गया था.
खनिजों का 'हब' बनने का ख्वाब
पाकिस्तान ने खुद को महत्वपूर्ण खनिजों के केंद्र के रूप में पेश किया. उसने दावा किया कि उसके पास तांबा, लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे खरबों डॉलर के दुर्लभ खनिजों का भंडार है. इस्लामाबाद ने अमेरिका के साथ एक द्विपक्षीय खनिज समझौता करने की इच्छा जताई.
उसका तर्क था कि ये संसाधन अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक सप्लाई चैन को मजबूत करने के लिए अनिवार्य हैं. इस पिच के जरिए पाकिस्तान ने अपनी रणनीतिक अहमियत को दोबारा स्थापित करने की कोशिश की.
आतंकवाद पर सहयोग का वादा
वहीं, सुरक्षा के मोर्चे पर पाकिस्तान ने याद दिलाया कि उसने एबे गेट बम धमाके के पीछे शामिल आईएसआईएस (ISIS) आतंकी को पकड़ने में मदद की है. उसने टीटीपी (TTP) के खिलाफ सहयोग बढ़ाने और अफगानिस्तान में छूटे हुए अमेरिकी हथियारों को बरामद करने में सहायता का प्रस्ताव दिया. मार्च 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा कांग्रेस में की गई तारीफ का हवाला देते हुए पाकिस्तान ने खुद को एक सक्षम सुरक्षा साझीदार के रूप में प्रदर्शित किया.
चीन और भारत के साथ कूटनीतिक संतुलन
डॉक्यूमेंट में पाकिस्तान के चीन, भारत और अफगानिस्तान के साथ संबंधों पर भी सफाई दी गई है. तर्क दिया गया कि चीन के साथ उसके रिश्ते भौगोलिक हैं और वे अमेरिका के साथ दोस्ती के रास्ते में बाधा नहीं हैं. पाकिस्तान ने ये भी कहा कि भारत और अमेरिका के मजबूत रिश्तों का असर अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों पर नहीं पड़ना चाहिए. संदेश स्पष्ट था कि पाकिस्तान खुद को एक वैचारिक साथी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संपत्ति के तौर पर देख रहा है.
ईमेल का असर
इस ईमेल का असर एक महीने के अंदर दिखने लगा. पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर को व्हाइट हाउस का निमंत्रण मिला और 18 जून 2025 को उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की. इस मुलाकात के तुरंत बाद ऊर्जा और खनिजों पर सहयोग की बड़ी घोषणाएं की गईं. वाशिंगटन के लिए ये एक रणनीतिक गणना थी कि पाकिस्तान में सेना ही वह शक्ति है जो अपने वादों को जमीन पर उतार सकती है.
कौन हैं पॉल डब्ल्यू जोन्स
पॉल डब्लू जोन्स वाशिंगटन की राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं और कजाकिस्तान व पोलैंड में अमेरिकी राजदूत रह चुके हैं. वर्तमान में वे विदेशी सरकारों को अमेरिकी नीतियों के गलियारों में रास्ता दिखाने का काम करते हैं.