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चीनी कर्मचारियों को विशेष सुरक्षा देगा पाकिस्तान... इस्लामाबाद में बनेगी 'स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट'

पाकिस्तान के गृह मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, यह SPU इस्लामाबाद में स्थापित की जाएगी और इसका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान में काम कर रहे चीनी नागरिकों और परियोजनाओं की सुरक्षा को मजबूत करना होगा.

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इस बात को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है कि इस SPU में चीनी सुरक्षाकर्मी शामिल होंगे या नहीं. (File Photo- ITG)
इस बात को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है कि इस SPU में चीनी सुरक्षाकर्मी शामिल होंगे या नहीं. (File Photo- ITG)

पाकिस्तान ने बुधवार को चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) परियोजनाओं में काम कर रहे हजारों चीनी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक 'स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट' (SPU) स्थापित करने की घोषणा की है. यह निर्णय पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी और चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री वांग शियाओहोंग के बीच बीजिंग में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद लिया गया है.

पाकिस्तान के गृह मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, यह SPU इस्लामाबाद में स्थापित की जाएगी और इसका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान में काम कर रहे चीनी नागरिकों और परियोजनाओं की सुरक्षा को मजबूत करना होगा. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब बीते वर्षों में CPEC से जुड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहे चीनी कर्मचारियों पर कई घातक आतंकी हमले हो चुके हैं.

हालांकि, इस बात को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है कि इस SPU में चीनी सुरक्षाकर्मी शामिल होंगे या नहीं. चीन लंबे समय से पाकिस्तान पर दबाव डाल रहा है कि वह अपनी सुरक्षा कंपनियों को पाकिस्तान में काम करने की अनुमति दे, लेकिन इस्लामाबाद घरेलू राजनीतिक विरोध के डर से चीनी सैनिकों या सुरक्षाकर्मियों की तैनाती से हिचकिचाता रहा है.

क्यों पड़ी इस सुरक्षा इकाई की जरूरत?

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60 अरब डॉलर के CPEC प्रोजेक्ट पर काम कर रहे चीनी नागरिकों पर पिछले कुछ वर्षों में कई घातक हमले हुए हैं. नेशनल काउंटर टेररिज्म अथॉरिटी (NACTA) के आंकड़ों के अनुसार, 2021 से दिसंबर 2024 के बीच आतंकी हमलों में 20 चीनी नागरिकों की मौत हुई और 34 घायल हुए. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे संगठन लगातार चीनी नागरिकों को निशाना बना रहे हैं. वर्तमान में लगभग 20,000 चीनी नागरिक पाकिस्तान में काम कर रहे हैं, जिनकी सुरक्षा के लिए पाकिस्तानी सेना ने पहले से ही दो कोर तैनात कर रखी हैं.

आतंकवाद के खिलाफ 'ज्वाइंट रिस्पांस सिस्टम'

बैठक के दौरान दोनों देशों के मंत्रियों ने आतंकवाद के खिलाफ एक 'ज्वाइंट और रैपिड रिस्पांस सिस्टम' विकसित करने पर सहमति जताई. इसमें पुलिस की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार और खुफिया जानकारी साझा करना शामिल है. नकवी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद से निपटने के लिए चीनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा तकनीकों का लाभ उठाना चाहता है.

अफगानिस्तान को लेकर सख्त संदेश

यह कदम पाकिस्तान और चीन के बीच हुए उस 'रणनीतिक संवाद' के बाद आया है, जिसमें दोनों देशों ने अफगानिस्तान से संचालित आतंकी गुटों को खत्म करने की मांग की थी. पाकिस्तान का आरोप है कि काबुल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और BLA जैसे आतंकवादियों को पनाह दे रहा है, जो चीन के हितों पर हमला करते हैं.

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