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पाकिस्तान : इस संगठन के हमलों से 14 साल से परेशान PAK, सीजफायर के लिए तालिबान की शरण में

पाकिस्तानी तालिबान को तहरीक ए तालिबान (TTP) नाम से भी जाना जाता है. यह अफगानिस्तानी तालिबान का हिस्सा नहीं है, लेकिन उससे जुड़ा हुआ है. वहीं, अफगानिस्तान में पिछले साल से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद से तालिबान सत्ता संभाल रहा है.

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पाकिस्तान में कई हमलों के पीछे टीटीपी का हाथ रहा है (फाइल फोटो) पाकिस्तान में कई हमलों के पीछे टीटीपी का हाथ रहा है (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पाकिस्तानी के लिए मुसीबत बना टीटीपी
  • पाकिस्तान में ज्यादातर हमलों के पीछे टीटीपी का हाथ

पाकिस्तान की सरकार ने बुधवार को 50 आदिवासी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल काबुल भेजा है. ये प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तानी तालिबान से सीजफायर को बढ़ाने के लिए बात करेगा, जो इस हफ्ते खत्म हो गया. खास बात ये है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इस बातचीत में मध्यस्थता की भूमिका में है. 
 
पाकिस्तानी तालिबान को तहरीक ए तालिबान (TTP) नाम से भी जाना जाता है. यह अफगानिस्तानी तालिबान का हिस्सा नहीं है, लेकिन उससे जुड़ा हुआ है. वहीं, अफगानिस्तान में पिछले साल से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद से तालिबान सत्ता संभाल रहा है. 

पिछले 14 साल से टीटीपी का पाकिस्तान में कई हमलों के पीछे हाथ रहा है. टीटीपी लंबे समय से पाकिस्तान में इस्लामी कानूनों को सख्ती से लागू करने के लिए संघर्ष कर रहा है. टीटीपी की मांग है कि उसके सभी नेताओं को जेल से छोड़ा जाए. साथ ही पाकिस्तान के आदिवासी क्षेत्रों में तैनात फौज को कम किया जाए. 

पाकिस्तान सरकार और TTP के बीच सीजफायर मंगलवार को खत्म हो गया. इसके बाद पाकिस्तान की सरकार ने टीटीपी से बातचीत के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजा. पिछले साल नवंबर में तालिबान की मध्यस्थता के बाद टीटीपी और पाकिस्तान के बीच सीजफायर हुआ था. यह एक महीने तक चला. हालांकि, कोई भी सीजफायर अधिक स्थायी शांति समझौते तक नहीं पहुंच पाया. 
 
दोनों पक्षों ने अभी इस मुद्दे पर शांति बनाकर रखी है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्षों के बीच स्थायी समझौता तभी संभव है, जब दोनों पक्ष थोड़ा लचीलापन दिखाते हैं. TTP सदस्यों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि काबुल में 50 लोगों की टीम पहुंची है. 
 
TTP का कहना है कि सीजफायर बढ़ाने का फैसला पाकिस्तान सरकार के सकारात्मक रवैये पर आधारित है. हालांकि, अभी तालिबान या पाकिस्तान की सरकार की ओर से इस बैठक पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. पाकिस्तान तालिबान अक्सर अफगानिस्तान के बॉर्डर इलाके को पाकिस्तान में हमले और इसके बाद छिपने के लिए इस्तेमाल करता है. 
 
अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से टीटीपी का हौसला और बढ़ गया है. पाकिस्तान में टीटीपी का प्रभाव खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में है, जो अफगानिस्तान की सीमा से लगा हुआ है. पाकिस्तान की सरकार ने आदिवासी नेताओं को इसलिए भेजा है कि, क्यों कि पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक, सरकार सीधे तौर पर TTP से बातचीत नहीं कर सकती. दरअसल, TTP पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ विद्रोह में शामिल रहा है. 
 

 

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