पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाकिस्तानी आर्मी आतंकवाद को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है. खुफिया सूत्रों के अनुसार, अब हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे पुराने आतंकी सरगनाओं की जगह उनकी अगली पीढ़ी- उनके बेटों और करीबी रिश्तेदारों को प्रमोट किया जा रहा है. इसका मकसद आतंकी नेटवर्क को नई ऊर्जा देना और नेतृत्व की निरंतरता सुनिश्चित करना है और नए चेहरों को आतंकी नेटवर्क की कमान सौंपकर उन्हें भारी फंडिंग दी जा रही है.
खुफिया सूत्रों ने आजतक को बताया कि हाल ही में पाकिस्तान के बहावलपुर में आईएसआई और आर्मी की देखरेख में एक बड़ी बैठक आयोजित की गई, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के सेकंड जेनरेशन कमांडर इन चीफ शामिल थे. सूत्रों के मुताबिक, लश्कर का आतंकी तल्हा सईद (हाफिज सईद का बेटा), सैफुल्लाह कसूरी और जैश का आतंकी अब्दुर रऊफ (मसूद अजहर का भाई) इस बैठक में मौजूद थे. इस बैठक का मुख्य मकसद ये था कि जम्मू कश्मीर में बड़े स्तर पर घुसपैठ कराना और आतंकी वारदात को अंजाम देना है.
पहलगाम हमले पहले भी हुई थी ऐसी मीटिंग
सूत्रों का दावा है कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जम्मू-कश्मीर में समन्वित आतंकी गतिविधियों की साजिश रच रहे हैं, क्योंकि तल्हा सईद और सैफुल्लाह कसूरी ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर से बहावलपुर में गुपचुप तरीके से मुलाकात की है. खुफिया एजेंसियों के अनुसार, पहलगाम हमले से पहले भी इसी तरह की बैठकें हुई थीं, जिससे दोनों आतंकी संगठनों के बीच सांठगांठ की आशंका और मजबूत होती दिख रही है.
क्या है ISI का प्लान
सूत्रों का कहना है कि आईएसआई अब पुराने पड़ चुके आतंकी सरगनाओं के बजाय उनके बेटों और करीबियों को प्रमोट कर रही है. इसके पीछे मुख्य कारण हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आकाओं की बढ़ती उम्र, बीमारी और उन पर बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव है.
आईएसआई को डर है कि पुराने नेता अब उतने प्रभावी नहीं रहे, इसलिए आतंक की विरासत को जिंदा रखने के लिए नई पीढ़ी को तैयार किया जा रहा है. हाफिज सईद के बेटे तल्हा सईद को विशेष रूप से ग्रूम किया जा रहा है, ताकि वह भविष्य में लश्कर का संचालन और उसे फंडिंग नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी ट्रेनिंग दी जा रही है.
अब्दुल रऊफ को मिल रही विशेष ट्रेनिंग
इसी तरह जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के भाई अब्दुल रऊफ असगर को भी आईएसआई का संरक्षण और प्रशिक्षण मिल रहा है. खुफिया इनपुट्स के मुताबिक, उसे रणनीतिक योजना, आतंकी मॉड्यूल्स की तैयारी और सीमा पार अभियानों के समन्वय में सक्रिय भूमिका के लिए तैयार किया जा रहा है. रऊफ पहले भी कई आतंकी वारदातों में शामिल रहा है.
खुफिया इनपुट बताते हैं कि आईएसआई उसे जैश की पूरी कमान सौंपने की तैयारी में है. ये पाकिस्तान की 'प्रॉक्सी वॉर' नीति का नया अध्याय है, जिसमें आतंकवाद को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है.
माना जा रहा है कि आने वाले वक्त में वही जैश की कमान संभाल सकता है. सूत्रों के मुताबिक, इन नेटवर्क्स के जरिए फंडिंग, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है.
उधर, विशेषज्ञों का मानना है कि ये रणनीति पाकिस्तान की प्रॉक्सी वॉर नीति का नया अध्याय है, जिसमें आतंकवाद को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान आतंक के खिलाफ कार्रवाई का दावा करता रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट तस्वीर पेश करती है. कुल मिलाकर, आईएसआई की ये नई चाल क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरे का संकेत है. जिसमें आतंक के पुराने चेहरों की जगह अब उनके बेटों और रिश्तेदारों को आगे कर एक नई फौज खड़ी की जा रही है.
मरकज़-ए-तैयबा फिर हुआ सक्रिय
इसके अलावा मुरिदके में स्थित लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय मरकज़-ए-तैयबा भारतीय सेना द्वारा की गई कार्रवाई- ऑपरेशन 'सिंदूर' (मई 2025) में भारी नुकसान हुआ था, लेकिन पिछले कुछ महीनों में इसे फिर से सक्रिय किया जा रहा है. इसको खड़ा करने के लिए बड़े स्तर पर आईएसआई, पाक आर्मी और वहां की स्टेट स्पॉन्सर्ड एनजीओ के द्वारा फंडिंग की जा रही है.
सूत्रों के अनुसार, जनवरी 2026 में यहां प्रशिक्षित आतंकियों की पासिंग-आउट परेड की तैयारी चल रही है और आतंकी कैडर को वैचारिक व सैन्य ट्रेनिंग के बाद सक्रिय मोर्चों पर तैनात करने की योजना है. इससे साफ संकेत मिलते हैं कि पाकिस्तान की सरजमीं पर आतंकी ढांचे को फिर से मजबूत किया जा रहा है.
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां मुरिदके और आसपास के इलाकों पर कड़ी निगरानी रख रही हैं. बॉर्डर पार से किसी भी घुसपैठ या आतंकी गतिविधि की कोशिश को नाकाम करने के लिए पूरी मुस्तैदी बरती जा रही है.