
पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर हाल के समय में देश की सशस्त्र सेनाओं को एक धार्मिक पहचान देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं. लाहौर में शरीफ परिवार के एक हाई-प्रोफाइल समारोह के दौरान उन्होंने पाकिस्तान के निर्माण के “नॉब्ल पर्पज” को हासिल करने के बेहद करीब होने का दावा किया.
इस अवसर पर प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज के साथ ही कई वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक अधिकारी मौजूद थे.
आसिम मुनीर का मानना है कि पाकिस्तान की असली पहचान इस्लाम से ही है और इसी वजह से उसे इस्लामी देशों के बीच एक विशेष सम्मान प्राप्त है. उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्थिति में सुधार हो रहा है और देश आने वाले वक्त में और महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. उन्होंने इस सफलता को अल्लाह की खास कृपा बताया और इसे एक ऐतिहासिक अवसर माना.
पिछले दिनों पाकिस्तान ने इस्लामी देशों के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूती दी है, जिसमें सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते और तुर्किये के साथ संभावित त्रिपक्षीय सैन्य सहयोग शामिल है.

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आसिम मुनीर धर्म को अपने सार्वजनिक व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है और वह हाफिज-ए-कुरान भी हैं. उनके नेतृत्व में पाकिस्तानी सेना ने खुद को न सिर्फ राष्ट्र, बल्कि इस्लाम की रक्षा करने वाली ताकत के रूप में स्थापित किया है. उन्होंने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सक्रिय विद्रोही समूहों को ‘फितना’ जैसे धार्मिक शब्दों से संबोधित किया है.
अप्रैल 2025 में इस्लामाबाद में दिए गए भाषण में उसने टू-नेशन थ्योरी को पाकिस्तान की वैचारिक नींव बताया और कहा कि मुसलमान और हिंदू दो अलग राष्ट्र हैं, जो देश के गठन का आधार था.
भारत के साथ बढ़ते तनाव और सैन्य टकराव के बीच आसिम मुनीर के ये बयानों का रणनीतिक महत्व भी बढ़ गया है. उसका यह मत पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और सैन्य सोच के साथ-साथ भारत के लिए भी एक साफ संकेत है कि देश की वैचारिक दिशा और सख्त होती जा रही है.