अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार को ट्रंप प्रशासन की नई इमिग्रेशन पॉलिसी का बचाव करते हुए कहा कि यह फैसला सिर्फ भारत को ध्यान में रखकर नहीं लिया गया है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए लागू एक व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है.
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन अमेरिका के इमिग्रेशन सिस्टम में बड़े बदलाव कर रहा है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में देश को गंभीर प्रवासी संकट का सामना करना पड़ा है.
रुबियो ने कहा, 'यह भारत के बारे में नहीं है, यह पूरी दुनिया से जुड़ा मामला है. अमेरिका ने फैसला किया है कि उसे अपनी इमिग्रेशन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और बेहतर बनाना होगा.' उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में अमेरिका में 2 करोड़ से ज्यादा अवैध प्रवासी दाखिल हुए और ग्रीन कार्ड सिस्टम का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ. इसी वजह से अमेरिका ने इमिग्रेशन प्रोसेस को सख्त करने का फैसला किया है.
मार्को रुबियो ने माना कि किसी भी व्यवस्था में सुधार के दौरान शुरुआती दिक्कतें और असुविधाएं आती हैं, लेकिन उनका दावा था कि नई व्यवस्था भविष्य में ज्यादा स्थिर, प्रभावी और तेज होगी. यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन ने ग्रीन कार्ड प्रोसेसिंग नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिसका असर हजारों भारतीयों, खासकर अंतरराष्ट्रीय छात्रों और H-1B वीजा धारकों पर पड़ सकता है.
अमेरिका ने इमिग्रेशन पॉलिसी में क्या बदलाव किया?
यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) द्वारा जारी नई गाइडलाइन के मुताबिक, अब स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले अधिकांश प्रवासियों को अपने देश लौटकर वहीं से आवेदन करना होगा. पहले कई लोग अमेरिका में रहते हुए ही 'एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस' प्रक्रिया पूरी कर लेते थे. यूएससीआईएस के प्रवक्ता जैक काहलर ने कहा, 'अब से अमेरिका में अस्थायी रूप से रह रहा कोई भी विदेशी नागरिक, जो ग्रीन कार्ड चाहता है, उसे सामान्य तौर पर अपने देश लौटकर आवेदन करना होगा, सिवाय असाधारण परिस्थितियों के.'
एजेंसी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के भीतर रहकर स्टेटस एडजस्टमेंट अब एक अपवाद माना जाएगा और हर आवेदन की व्यक्तिगत स्तर पर सख्ती से जांच होगी. यूएससीआईएस ने अपने पॉलिसी डॉक्यूमेंट में कहा कि छात्र, अस्थायी कर्मचारी और पर्यटक सीमित अवधि और विशेष उद्देश्य के लिए अमेरिका आते हैं. उनका अमेरिका आना ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का पहला कदम नहीं माना जाना चाहिए. नई नीति का सबसे ज्यादा असर भारतीय नागरिकों पर पड़ने की आशंका है, क्योंकि अमेरिका में H-1B वीजा धारकों और रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड आवेदकों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है.
हालांकि रुबियो ने कहा कि लंबे समय में यह बदलाव भारतीय आवेदकों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा. उन्होंने कहा, 'जो भारतीय अमेरिका आना चाहते हैं, उन्हें भविष्य में एक ज्यादा प्रभावी और कुशल व्यवस्था मिलेगी.' नई दिल्ली के 'सेवा तीर्थ' (भारतीय प्रधानमंत्री का कार्यालय) में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान मार्को रुबियो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से उन्हें व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण भी दिया.