चीन ने समुद्री कारोबार और ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए दुनिया का सबसे बड़ा मेथनॉल ड्यूल-फ्यूल कंटेनर शिप तैयार कर लिया है. यह विशाल जहाज गुरुवार को पूर्वी चीन के जियांगसू प्रांत के नानतोंग शहर से समुद्री परीक्षण यानी सी ट्रायल के लिए रवाना हुआ.
चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ के मुताबिक, इस जहाज को Nantong COSCO KHI शिप इंजीनियरिंग कंपनी ने तैयार किया है. फिलहाल यह दुनिया का सबसे बड़ा मेथनॉल ड्यूल-फ्यूल कंटेनर शिप माना जा रहा है.
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इस जहाज की लंबाई 399.99 मीटर है, यानी यह लगभग चार फुटबॉल ग्राउंड जितना लंबा है. इसकी चौड़ाई 61.3 मीटर और गहराई 33.2 मीटर है. जहाज का डेडवेट टनेज 2.25 लाख टन है और यह एक बार में 24,168 स्टैंडर्ड कंटेनर ले जा सकता है. अपनी कैटेगरी में यह अब तक का सबसे ज्यादा क्षमता वाला जहाज बताया जा रहा है.
ग्लोबल टाइम्स ने कंपनी के प्रतिनिधि झांग हैदोंग के हवाले से बताया कि इस जहाज की सबसे बड़ी खासियत इसका अत्याधुनिक मेथनॉल ड्यूल-फ्यूल सिस्टम है. इसमें दुनिया का सबसे बड़ा मेथनॉल ड्यूल-फ्यूल मुख्य इंजन, सहायक इंजन और बॉयलर सिस्टम लगाया गया है. इसकी मदद से जहाज जरूरत के हिसाब से मेथनॉल और पारंपरिक ईंधन के बीच आसानी से स्विच कर सकता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस जहाज को ग्रीन मेथनॉल से चलाया जाए तो यह हर साल करीब 1.5 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम कर सकता है. इसके अलावा सल्फर ऑक्साइड उत्सर्जन लगभग खत्म हो जाएगा और नाइट्रोजन ऑक्साइड भी काफी कम होगा. इसे वैश्विक शिपिंग इंडस्ट्री के डिकार्बोनाइजेशन लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
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सी ट्रायल पूरा होने के बाद इस जहाज को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स पर उतारा जाएगा. चीन का दावा है कि यह वैश्विक समुद्री उद्योग को ग्रीन और लो-कार्बन ट्रांजिशन की दिशा में नई रफ्तार देगा.
इसी बीच चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 की पहली तिमाही में जहाज निर्माण के तीनों प्रमुख संकेतकों में चीन दुनिया में पहले स्थान पर रहा. इस दौरान चीन में 1.56 करोड़ डेडवेट टन जहाज निर्माण पूरा हुआ, जो पिछले साल के मुकाबले 46 प्रतिशत ज्यादा है.