इजराइल के तेल अवीव शहर में शनिवार को बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार से इस्तीफे की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमले की स्वतंत्र जांच के लिए एक स्वतंत्र राज्य आयोग गठित करने की मांग की और सरकार पर जवाबदेही से भागने का आरोप लगाया.
शनिवार को तेल अवीव में हुए इस प्रदर्शन में हजारों इजराइली नागरिक शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमले के लिए नेतन्याहू सरकार ने अब तक किसी तरह की जिम्मेदारी नहीं ली है, जबकि इसी हमले के बाद गाजा में युद्ध शुरू हुआ.
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार इस हमले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच से बच रही है. उनका कहना था कि जब तक एक स्वतंत्र राज्य आयोग के जरिए 7 अक्टूबर की घटनाओं की जांच नहीं होती, तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी.
प्रदर्शन में शामिल कई लोगों ने साफ तौर पर नेतन्याहू प्रशासन में बदलाव की मांग की. उनका कहना था कि मौजूदा सरकार जनता का भरोसा खो चुकी है और युद्ध के हालात में भी राजनीतिक जवाबदेही तय करने में नाकाम रही है.
इस प्रदर्शन में गाजा में बंधक बनाए गए इजराइली नागरिकों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अब तक इजराइली पुलिस अधिकारी रण गविली के अवशेष गाजा से वापस नहीं लाए जा सके हैं.
रण गविली आखिरी ऐसे इजराइली बंधक हैं, जिनके अवशेष अब भी गाजा में हैं. उनके शव की वापसी अमेरिका की मध्यस्थता से तैयार की गई उस शांति योजना का अहम हिस्सा है, जिसका मकसद गाजा और इजराइल के बीच स्थायी शांति सुनिश्चित करना है.
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक रण गविली के अवशेष वापस नहीं लाए जाते, तब तक शांति की कोशिशें अधूरी रहेंगी. उन्होंने सरकार पर इस मुद्दे को गंभीरता से न लेने का भी आरोप लगाया.
तेल अवीव का यह प्रदर्शन इस बात का संकेत माना जा रहा है कि गाजा युद्ध के बीच इजराइल के भीतर राजनीतिक असंतोष गहराता जा रहा है और नेतन्याहू सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है.