अल-अक्सा मस्जिद को लेकर इजरायल और फिलिस्तीन के बीच दशकों से विवाद है. रमजान के दौरान फिलिस्तीनी मुसलमानों और इजरायली पुलिस के बीच अक्सर हिंसा देखने को मिलती रही है. इस रमजान भी अल-अक्सा मस्जिद को लेकर इजरायल-फिलिस्तीन के बीच संघर्ष देखने को मिला.
फिलिस्तीनियों ने पिछले सप्ताह इजरायल पर आरोप लगाया था कि इजरायली सेना ने अल-अक्सा मस्जिद में नमाज के लिए जमा हुए दर्जनों फिलिस्तीनियों को पीटा और कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया. इजरायली सेना की छापेमारी से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कई इस्लामिक देशों ने इजरायल को चेतावनी भी दी है. वहीं, अब इस विवाद को रोकने के लिए इजरायल के प्रधानमंत्री ने एक बड़ा फैसला लिया है.
अगले 10 दिनों तक अल-अक्सा मस्जिद के कम्पाउंड में यहूदियों के प्रवेश पर पाबंदी
मिडिल ईस्ट कवर करने वाली एक वेबसाइट के मुताबिक, यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद में पिछले सप्ताह हुई झड़पों के बाद जारी विवाद को रोकने के लिए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रमजान की समाप्ति तक यहूदियों को टेम्पल माउंट जाने पर रोक लगा दी है. बुधवार से अगले 10 दिनों तक यहूदियों को टेम्पल माउंट जाने पर पाबंदी होगी. अल-अक्सा मस्जिद के कम्पाउंड को टेम्पल माउंट के नाम से जाना जाता है.
दरअसल, रमजान के आखिरी 10 दिन मुस्लिम नमाजी परंपरागत रूप से अल-अक्सा मस्जिद में बिताते हैं. यह इस्लामिक प्रथा एतकाफ का हिस्सा है. इसमें मुस्लिम समुदाय के लोग रमजान के अंतिम 10 दिनों के दौरान अल्लाह की इबादत में पूरा समय देने के इरादे से मस्जिद में खुद को अलग कर लेते हैं.
नेतन्याहू का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब पिछले सप्ताह इजरायली पुलिस ने इस्लाम के तीसरे सबसे पवित्र स्थल माने जाने वाली अल-अक्सा मस्जिद पर छापेमारी की थी. दावा किया गया था कि पांच अप्रैल को हजारों की संख्या में फिलिस्तीनी सुबह की नमाज के लिए अल-अक्सा मस्जिद में जुटे. लेकिन नमाज के बाद भी फिलिस्तीनी मस्जिद से बाहर नहीं निकले. जिसके बाद इजरायली सेना ने मस्जिद के अंदर घुसकर लोगों को बाहर निकालना शुरू कर दिया. इस घटना के बाद से ही यरुशलम में तनाव की स्थिति बनी हुई है.
इस छापेमारी के बाद फिलिस्तीनी हमास की ओर से इजरायल को निशाना बनाते हुए रॉकेट दागे गए. इसके जवाब में इजरायल ने भी फिलिस्तीन को निशाना बनाते हुए रॉकेट दागे हैं.
इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार को 748 यहूदी टेम्पल माउंट विजिट किए. पिछले एक सप्ताह के भीतर तीन हजार से ज्यादा यहूदी टेम्पल माउंट विजिट किए हैं, जो पिछले वर्ष की इसी अविधि की तुलना में 32% अधिक है.
Prime Minister Benjamin Netanyahu, Defense Minister Yoav Gallant & National Security Minister Itamar Ben-Gvir completed a comprehensive assessment with heads of the security services on the security situation in Israel, including Judea and Samaria, Jerusalem and the Temple Mount.
— Prime Minister of Israel (@IsraeliPM) April 11, 2023
इजरायल के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री ने जताई आपत्ति
नेतन्याहू ने यह निर्णय रक्षा मंत्री योआव गैलेंट, पुलिस कमिश्नर याकोव शाबताई, आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ हर्जी हालेवी और शिन बेट के डायरेक्टर रोनेन के सिफारिश के बाद लिया है. हालांकि, इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गिवीर ने इस पर आपत्ति जताई है.
प्रधानमंत्री नेतन्याहू के इस फैसले पर बेन गिवीर ने आपत्ति जताते हुए कहा, "टेरर वेव के कारण प्रधानमंत्री की ओर से लिया गया यह एक गंभीर फैसला है. इससे मामला शांत होने की बजाय और बढ़ेगा. फिलिस्तीन हमास को इजरायल आतंकवादी संगठन मानता है.
वहीं, इजरायल के मुख्य रब्बी Isaac जोसेफ ने नेतन्याहू के इस फैसले की प्रशंसा की है. उन्होंने कहा कि यहूदी परंपरा के अनुसार, किसी भी तरह की उकसावे वाली नीति से बचना चाहिए. रब्बी यहूदी धर्म का एक धार्मिक नेता होता है.
इतामार बेन गिवीर को धुर दक्षिणपंथी नेता माना जाता है. दिसंबर 2022 में नेतन्याहू की सत्ता में वापसी के एक सप्ताह के भीतर ही बेन गिवीर ने अल-अक्सा मस्जिद परिसर का दौरा किया था. नेतन्याहू की सत्ता में वापसी के बाद से ही इजरायल और फिलिस्तीन के बीच तनाव चरम पर है.
अल-अक्सा को लेकर क्या है विवाद?
पूर्वी यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद परिसर तीन धर्मों के लिए पवित्र स्थल है. अल-अक्सा मस्जिद 35 एकड़ में फैला हुआ है. मुसलमान इस स्थल को अल-हरम-अल शरीफ भी कहते हैं. इस्लाम में इसे तीसरा सबसे पवित्र स्थल माना गया है. मस्जिद परिसर में मौजूद 'डोम ऑफ द रॉक' के बारे में मान्यता है कि पैगंबर मोहम्मद इसी से होकर जन्नत गए थे.
वहीं, यहूदी इस स्थल को टेम्पल माउंट कहते हैं. यह उनका सबसे पवित्र धार्मिक स्थल है. टेम्पल माउंट परिसर में मौजूद शोक की दीवार को यहूदी अपने मंदिर का अवशेष मानते हैं. यहूदियों का दावा है कि यह स्थल पहले यहूदियों के लिए प्रार्थना स्थल हुआ करता था. उनका कहना है कि बाइबल में जिन यहूदी मंदिरों की बात की गई है, वह इसी परिसर में थे.
इसके अलावा ईसाई धर्म में भी यरुशलम को पवित्र माना गया है. ईसाइयों के पवित्र किताब, न्यू टेस्टामेंट के मुताबिक, इसी शहर में ईसा मसीह ने अपना उपदेश दिया था और उन्हें सूली पर भी यहीं लटकाया गया था.