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'वो हमें मारना चाहते थे...', IRIS Dena के नाविक ने बताई अमेरिकी हमले की कहानी

IRIS Dena युद्धपोत के चालक हामेद मोमेनेह ने कहा कि अमेरिका का मकसद हमारे युद्धपोत के चालक दल को मारना था. भारत में नौसैनिक अभ्यास से लौटते समय हिंद महासागर में ईरान के इस युद्धपोत पर अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया था.

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IRIS Dena युद्धपोत के नाविक की आपबीती. (Photo: Social Media)
IRIS Dena युद्धपोत के नाविक की आपबीती. (Photo: Social Media)

अमेरिकी नौसेना ने पिछले महीने की शुरुआत में ईरान के एक युद्धपोत IRIS Dena पर हमला कर उसे डुबो दिया था. यह हमला समंदर में किया गया. इस हमले में बचने वाले नाविकों में से एक हामेद मोमोनेह ने इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है. इस युद्धपोत पर हुए हमले में जीवित बचे किसी शख्स का यह पहला बयान है. इस हमले में ईरान के 84 नाविक मारे गए थे. 

IRIS Dena युद्धपोत के चालक हामेद मोमेनेह ने कहा कि अमेरिका का मकसद हमारे युद्धपोत के चालक दल को मारना था. भारत में नौसैनिक अभ्यास से लौटते समय हिंद महासागर में ईरान के इस युद्धपोत पर अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया था.

मोमेनेह ने कहा कि अगर अमेरिका का मकसद सिर्फ युद्धपोत को नुकसान पहुंचाना होता, तो वह किसी अन्य हिस्से को निशाना बनाता. बता दें कि मोमेनेह के इस वीडियो को भारत में ईरानी दूतावास द्वारा शेयर किया गया.

बता दें कि IRIS Dena विशाखापत्तनम से लौट रहा था और उस पर ऐसे जल क्षेत्र में हमला किया गया जो भारत की समुद्री सीमा का हिस्सा नहीं है. बाद में यह भी सामने आया कि भारत ने एक अन्य ईरानी जहाज को शरण दी थी.

भारत में ईरानी दूतावास द्वारा शेयर किए गए वीडियो पर कुछ लोगों ने होर्मुज में ईरान द्वारा भारत के झंडे वाले जहाजों पर गोलीबारी को लेकर नाराजगी जताई. एक यूजर ने कहा कि भारतीय टैंकर पर गोली चलाने के लिए ईरान किसी सहानुभूति का हकदार नहीं है. पहले मुझे ईरान के लिए सहानुभूति थी, लेकिन अब सरकार समुद्री डाकुओं की तरह होर्मुज को खोल-बंद कर रही है. 

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'अमेरिका ने बिना चेतावनी हमला किया'

मोमेनेह ने अमेरिकी हमले के दौरान की स्थिति बताते हुए कहा कि जहाज पर 104 चालक दल के सदस्य थे. अमेरिकी पनडुब्बी से पहले टॉरपीडो हमले  के बाद सभी सुरक्षित थे. उन्होंने सरकारी न्यूज एजेंसी तसनीम को दिए इंटरव्यू के दौरान यह बात कही, जिसकी क्लिप रविवार को भारत में ईरानी दूतावास ने एक्स पर साझा की.

उन्होंने कहा कि यह हमला एक पनडुब्बी द्वारा बिना किसी चेतावनी के किया गया. जब पहला टॉरपीडो अटैक हुआ, सभी अपने-अपने स्थान पर थे और सौभाग्य से उस समय कोई हताहत नहीं हुआ था. जहाज पर 104 लोग थे और किसी ने भी जहाज नहीं छोड़ा. सभी अंत तक डटे रहे. उन्होंने बताया कि यह जहाज भारत के विशाखापत्तनम बंदरगाह पर नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने के लिए भेजा गया था. 

IRIS Dena 16 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू (IFR) और बहुपक्षीय अभ्यास MILAN-2026 में भाग लेने के लिए विशाखापत्तनम पहुंचा था. भारत की पूर्वी नौसेना कमान ने उसका गर्मजोशी से स्वागत किया था. इस अभ्यास में लगभग 74 देशों ने भाग लिया था. अमेरिकी नौसेना का गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर USS Pinckney भी भाग लेने वाला था, लेकिन उसने अंतिम समय में अपनी भागीदारी रद्द कर दी. यह अभ्यास 25 फरवरी को समाप्त हुआ. इसके बाद जहाज रवाना हुआ और 4 मार्च को उस पर हमला हुआ.

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मोमेनेह ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमला अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के खिलाफ था और उन्हें कोई पूर्व चेतावनी नहीं दी गई थी. उन्होंने कहा कि यह हमला दोपहर तीन से साढ़े तीन बजे के बीच अचान हुआ था. यह पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के खिलाफ था. यह कोई युद्ध क्षेत्र नहीं था और हमें कोई चेतावनी नहीं मिली थी.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि IRIS Dena के डूबने से वे थोड़ा परेशान हुए. उन्होंने कहा कि अमेरिका जहाज को पकड़ना चाहता था, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उसे डुबोना ज्यादा मजेदार रहा. 

मोमेनेह ने कहा कि अमेरिका का मुख्य लक्ष्य चालक दल को मारना था. अगर उनका उद्देश्य केवल जहाज को नुकसान पहुंचाना होता, तो वे अन्य हिस्सों को निशाना बना सकते थे, लेकिन उनका लक्ष्य चालक दल को मारना था लेकिन हम अंत तक डटे रहे. हमारे लिए जहाज को छोड़ना ईरान की मिट्टी जैसा था, इसे छोड़ने का कोई मतलब नहीं था.

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