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ईरान की गलियों में गूंजा 'डेथ टू डिक्टेटर' का नारा, 21 प्रांतों में पहुंची बगावत की चिंगारी

ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन का दायरा अब बढ़ता जा रहा है. ईरान के 21 प्रांतों में अब बगावत की चिंगारी सुलग रही है. ईरान की जनता 'डेथ टू डिक्टेटर' के नारे लगा रही है. इस बीच प्रदर्शनकारियों पर पुलिसिया दमन भी बढ़ा है.

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ईरान में सत्ता में बदलाव की मांग को लेकर US में प्रदर्शन (Photo:AP)
ईरान में सत्ता में बदलाव की मांग को लेकर US में प्रदर्शन (Photo:AP)

ईरान में सत्ता के खिलाफ प्रदर्शन का दायरा बढ़ता ही जा रहा है. ईरान की सत्ता के खिलाफ नागरिकों का विद्रोह चौथे दिन में और 2025 से 2026 में प्रवेश कर गया है. अब प्रदर्शनकारी ईरान में सत्ता में बदलाव की मांग कर रहे हैं. 

बुधवार को ईरान में लगातार चौथे दिन देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों ने कई शहरों में रैलियां निकाली. प्रदर्शनकारी अब ईरान में सत्ता में बदलाव की मांग कर रहे हैं. 

प्रदर्शनकारी इस्फ़हान, हमादान, बाबोल, देहलोरन, बाघमलेक और पियान जैसे शहरों में सड़कों पर उतर आए, उन्होंने सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगाए, निर्वासित राजकुमार रज़ा पहलवी का समर्थन किया और पिछले विद्रोहों में मारे गए प्रदर्शनकारियों को याद किया. कुल मिलाकर ये प्रदर्शन ईरान के 21 प्रातों में पहुंच गया है. 

आर्थिक संकट से उपजा विरोध

ईरान में दिसंबर 2025 से चल रहे सत्ता विरोधी प्रदर्शन मुख्य रूप से आर्थिक संकट से उपजे हैं, जहां रियाल डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है. ये प्रदर्शन 2022 के महसा अमीनी आंदोलन के बाद सबसे बड़े हैं और अब चौथे दिन तक फैल चुके हैं. ईरान में ये प्रदर्शन तेहरान के ग्रैंड बाजार से 28 दिसंबर को शुरू हुए, जहां दुकानदारों ने हड़ताल की. 

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ईरान में महंगाई अभी कहर बरपा रही है. यहां महंगाई दर अभी 42 फीसदी तक पहुंच गई है. रोजाना की जिंदगी के खर्चे बढ़ने से जनता हलकान है और सड़कों पर उतर आई है. 

इस्फ़हान में रात में प्रदर्शनकारियों ने "डरो मत, हम सब साथ हैं" और  "तानाशाह मुर्दाबाद" "डेथ टू डिक्टेटर" के नारे लगाए. जबकि देहलोरन और बागमलेक में प्रदर्शनकारियों ने राजशाही के समर्थन में नारे लगाए. कई लोगों ने ईरान के पूर्व शासक रजा शाह पहलवी के समर्थन में नारे लगाए. 

सुरक्षा बलों का बल प्रयोग

प्रदर्शनकारियों को डिगाने के लिए सुरक्षा बलों ने कई जगहों पर बल प्रयोग किया. नाहवंद, असदाबाद और हमादान जैसे शहरों में गोलीबारी और आंसू गैस छोड़े जाने की खबरें आईं. लेकिन यहां प्रदर्शनकारी डटे हुए दिखाई दिए. 

तेहरान में तेहरान यूनिवर्सिटी की एक स्टूडेंट लीडर सरीरा करीमी को उनके घर पर छापे के बाद हिरासत में लिया गया है. सरीरा करीमी के ठिकाने का पता नहीं चल पाया है. 

प्रदर्शनकारियों को समर्थन

इस प्रदर्शन को मौलानाओं का भी सपोर्ट मिलना शुरू हो गया है. जाने-माने कल्चरल और धार्मिक लोगों ने भी इस पर अपनी राय दी है. सुन्नी मौलाना मोलावी अब्दोलहामिद ने कहा कि खराब लिविंग ऑफ स्टैंडर्ड और राजनीतिक गतिरोध इस विद्रोह की वजह बन रहे हैं. मशहूर फिल्ममेकर जाफर पनाही ने इस अशांति को "इतिहास को आगे बढ़ाने" के लिए एक विद्रोह बताया. उन्होंने कहा कि "साझा दर्द अब सड़कों पर एक चीख में बदल गया है."

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पश्चिमी राजनेता लगातार प्रदर्शनकारियों के समर्थन में खड़े रहे. अमेरिकी सीनेटर रिक स्कॉट ने कहा कि उन्हें यह देखकर हौसला मिला कि ईरानी लोग "ईरान की ज़ालिम तानाशाही को खत्म करने की मांग कर रहे हैं." और उन्होंने उनसे "बुरी सरकार" के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का आग्रह किया. 
 

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