ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में भारतीय प्रवासियों की भूमिका बेहद अहम रही है. लंदन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स परिसर में जारी एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय प्रवास ब्रिटेन के लिए बोझ नहीं बल्कि वरदान साबित हुआ है. यह रिपोर्ट बर्मिंघम स्थित एस्टन यूनिवर्सिटी के इंडिया सेंटर और लंदन के ‘हियर एंड नाउ 365’ द्वारा तैयार की गई है.
‘Migration of the Indian Diaspora to the UK: Shaping Economic Resilience, Cultural Dynamism and Global Influence’ शीर्षक वाली इस श्वेत पत्र रिपोर्ट में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन में भारतीय प्रवास के चार चरणों का विश्लेषण किया गया है. रिपोर्ट में विशेष रूप से ब्रेक्जिट के बाद शुरू हुई चौथी प्रवास लहर पर फोकस किया गया है, जिसमें प्रवासन नीति, श्रम बाजार की जरूरतों और वैश्विक बदलावों के प्रभाव को प्रमुख माना गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय प्रवासी स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक देखभाल, इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता के कारण ब्रिटेन की आर्थिक मजबूती और सेवा क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं. अध्ययन में यह भी बताया गया कि कौशल आधारित प्रवासन मॉडल से उन क्षेत्रों में कर्मचारियों की कमी पूरी करने में मदद मिलती है, जहां विशेषज्ञ पेशेवरों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है.
एस्टन यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर एलेक्स सुबिक ने कहा कि भारतीय प्रवासियों का योगदान केवल आर्थिक नहीं बल्कि उच्च मांग वाले पेशों, उद्यमिता और वैश्विक नवाचार नेटवर्क में भी महत्वपूर्ण है. उन्होंने सुझाव दिया कि ब्रिटेन और भारत के बीच कौशल और योग्यता मान्यता की प्रक्रिया को तेज किया जाना चाहिए, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत किया जा सके.
रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि भारतीय छात्रों को पढ़ाई के बाद कुशल कार्यबल में शामिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाए, जिससे विश्वविद्यालयों, उद्योगों और ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) के बीच सहयोग को बढ़ावा मिले. साथ ही भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को सेवाओं और पेशेवर गतिशीलता को मजबूत करने के लिए एक अहम माध्यम बताया गया है.
कोबरा बीयर के संस्थापक लॉर्ड करण बिलिमोरिया ने कहा कि भारतीय समुदाय ब्रिटेन का सबसे सफल प्रवासी समुदाय है और यह अन्य समुदायों के लिए प्रेरणा का स्रोत है. वहीं ‘हियर एंड नाउ 365’ के मनीष तिवारी ने कहा कि भारतीय प्रवासियों ने युद्ध के बाद ब्रिटेन के पुनर्निर्माण, डिजिटल क्रांति और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई है.