अमेरिका-इजरायल के साथ युद्ध कर रहा ईरान कभी भारत का भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार हुआ करता था. इस रिश्ते की सबसे अहम कड़ी कच्चा तेल था. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा ईरान से मंगाता था. बदले में भारत, ईरान को खाद्य सामग्री, दवाइयां, मशीनरी और अन्य उत्पाद निर्यात करता था. दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलित और स्थिर माना जाता था. लेकिन साल 2018 के बाद हालात तेजी से बदले.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया. इसे ज्वॉइंट कॉम्प्रेहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन कहा जाता है. इसके बाद ईरान पर फिर से कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए गए. इन प्रतिबंधों का असर भारत-ईरान व्यापार पर भी पड़ा.
साल 2019 से भारत ने ईरान से तेल खरीदना लगभग बंद कर दिया. बैंकिंग और भुगतान से जुड़ी व्यवस्थाएं भी प्रभावित हुईं. नतीजतन, दोनों देशों के बीच कुल व्यापार में करीब 87 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. 2020 में भारत ने ईरान को करीब 3.37 अरब डॉलर का निर्यात किया जबकि आयात 1.39 अरब डॉलर रहा. हालांकि तेल आयात पहले ही काफी घट चुका था, फिर भी व्यापार पूरी तरह से ठप नहीं हुआ था.
लेकिन 2021 में गिरावट और तेज हो गई. निर्यात घटकर 1.77 अरब डॉलर रह गया और आयात सिर्फ 0.33 अरब डॉलर तक सिमट गया. इसके बाद 2022, 2023 और 2024 में व्यापार निचले स्तर पर ही बना रहा. किसी बड़े सुधार के संकेत नहीं मिले. साल 2025 तक भारत का ईरान को निर्यात करीब 1.24 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात लगभग 0.44 अरब डॉलर के आसपास रहा. 2019 से पहले के स्तर की तुलना में कुल व्यापार में लगभग 56 फीसदी की कमी आ चुकी है.
इस बीच, जनवरी में एक बार फिर ट्रंप ने चेतावनी दी कि जो देश ईरान के साथ व्यापार करेंगे, उन पर अमेरिका 25 फीसदी तक टैरिफ लगा सकता है. इससे भविष्य में भी व्यापार सामान्य होने की संभावना कमजोर दिखाई देती है.
खाड़ी देशों की ओर बढ़ा भारत का रुख
ईरान से तेल आयात रुकने के बाद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अन्य देशों की ओर रुख किया. रूस, सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ता बनकर उभरे. खासतौर पर संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के साथ व्यापार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई.
पिछले पांच वर्षों में भारत और खाड़ी देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है. 2020–21 में भारत का यूएई को निर्यात 16,680 मिलियन डॉलर था, जो 2024–25 में बढ़कर 36,638 मिलियन डॉलर हो गया. यानी पांच साल में यह दोगुने से ज्यादा हो गया. इसी अवधि में यूएई से आयात 26,623 मिलियन डॉलर से बढ़कर 63,403 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया.
सऊदी अरब के साथ भी व्यापार में लगातार बढ़ोतरी हुई है. भारत का निर्यात 5,857 मिलियन डॉलर से बढ़कर 11,757 मिलियन डॉलर हो गया, जबकि आयात 16,187 मिलियन डॉलर से बढ़कर 30,121 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. सिर्फ यूएई और सऊदी अरब ही नहीं, बल्कि अन्य खाड़ी देशों के साथ भी भारत के व्यापार में मजबूती देखने को मिली है.
पिछले कुछ वर्षों में इन देशों को भारत का निर्यात और वहां से आयात दोनों में बढ़ोतरी हुई है. खासकर छोटे खाड़ी देशों के साथ व्यापार में स्थिर और संतुलित वृद्धि दर्ज की गई है, जो यह दिखाती है कि भारत ने अपने व्यापारिक संबंधों को व्यापक और विविध बनाने पर जोर दिया है.