फिलिस्तीनी आर्टिस्ट राणा बिशारा ने क्रिसमस की पूर्व संध्या पर गाजा युद्ध पीड़ितों के साथ समर्थन जताने के लिए एक अनोखा सहारा लिया. उन्होंने बेथलेहम में 'चर्च ऑफ द नेटिविटी' के सामने एक इनक्यूबेटर के अंदर कैक्टस कांटों से घिरे यीशु मूर्ति दिखाई, जिसमें ईसा मसीह नवजात शिशु के रूप में दर्शाए गए थे. बिशारा ने मैंगर स्क्वायर में अपने इस सांकेतिक कलाकृति को प्रदर्शित किया.
बिशारा ने कहा कि जब तक इजरायल गाजा पर बमबारी करेगा, तब तक फिलिस्तीनी कोई क्रिसमस उत्सव नहीं मनाएंगे. युद्ध के साये में इस साल गाजा के आसपास के क्षेत्रों में क्रिसमस का जश्न फीका रहा. इजरायल ने 7 अक्टूबर को हमास के हमले के बाद 24 दिसंबर को दक्षिण गाजा में अब तक का सबसे बड़ा जवाबी हमला किया. बिशारा ने कहा कि उन्होंने यह कलाकृति उन गाजावासियों के सम्मान में बनाई है, जो अल शिफा अस्पताल को खाली कराए जाने के बाद केवल पांच डॉक्टरों और कुछ नर्सों के साथ रह गए थे.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने तब कहा था कि बिजली और दवाओं की कमी के कारण अल शिफा में समय से पहले पैदा हुए आठ शिशुओं की मौत हो गई थी. पोप फ्रांसिस ने भी शोक संदेश के साथ क्रिसमस समारोह की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि यीशु के शांति के संदेश को 'युद्ध के निरर्थक तर्क' द्वारा उसी भूमि में दबा दिया जा रहा है, जिस भूमि पर उनका जन्म हुआ था. 87 वर्षीय पोप ने कहा कि क्रिसमस का असली संदेश शांति और प्रेम है.
बेथलहम वेस्ट बैंक में स्थित एक छोटा सा शहर है. ईसाइयों का मानना है कि 2000 साल से भी पहले यहीं पर ईसा मसीह का जन्म हुआ था. गाजा युद्ध पीड़ितों से एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए बेथलहम में इस बार वार्षिक क्रिसमस समारोह को रद्द कर दिया, जिसमें आम तौर पर दुनियाभर से हजारों पर्यटक आते हैं. बेथलहम के सिटी सेंटर में इस साल विशाल क्रिसमस ट्री, मार्चिंग बैंड नहीं प्रदर्शित किया गया. उस जगह एक विशाल फिलिस्तीनी झंडा फहराया गया, जिस पर एक बैनर लगा था और उस पर लिखा था, 'गाजा में युद्धविराम के लिए बेथलहम की घंटियां बज रही हैं'.