पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जेल में बंद हैं. बीते कुछ समय से उनकी तबीयत खराब है और उनकी एक आंख की रोशनी 85 प्रतिशत तक चली गई है. इस बीच उनकी तबीयत को देखते हुए उन्हें जेल से अस्पताल शिफ्ट किया जा रहा है. इसके साथ ही उन्हें अपने बच्चों से फोन पर बात करने की अनुमति भी दी गई है.
पाकिस्तान में संसदीय मामलों के मंत्री और पीएमएलएन अध्यक्ष तारीक फजल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए इमरान खान के हवाले से ये जानकारी दी है. उन्होंने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ को इस मामले में राजनीति न करने की सलाह भी दी है.
तारीक फजल ने एक्स पर लिखा, 'इमरान खान को फोन पर अपने बेटों से बात करने की सुविधा दी गई है और उनकी सेहत को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने और एक चिकित्सा समिति गठित करने का फैसला लिया गया है.'
PTI को दी सियासत न करने की सलाह
तारीक ने आगे लिखा, 'सरकार मानवीय करुणा और कानूनी जरूरतों को प्राथमिकता देती है. कानून के मुताबिक हर कैदी को सुविधाएं देना सरकार की जिम्मेदारी है. स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील मामलों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए. पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) को निराधार दुष्प्रचार और राजनीतिक लाभ उठाने से बचना चाहिए.'
उन्होंने बताया कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों को पूरा कर रही है. इस मामले को राजनीति करने के बजाय, राष्ट्रीय गंभीरता और हमदर्दी जाहिर करनी चाहिए.
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वहीं, PTI ने अपने संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के स्वास्थ्य और उन्हें चुपचाप अस्पताल शिफ्ट किए जाने की खबरों पर चिंता जाहिर की है. पीटीआई ने एक बयान जारी करते हुए इमरान खान को उनके परिवार या निजी डॉक्टरों को विश्वास में लिए बिना किसी भी अस्पताल में शिफ्ट करने के फैसले को गलत बताया है.
PTI की कड़ी चेतावनी
पीटीआई का कहना है कि ऐसा करना मानवाधिकारों, संविधान और जेल नियमों का गंभीर उल्लंघन है. पार्टी ने मांग की है कि इमरान खान का कोई भी मेडिकल चेकअप या इलाज सिर्फ उनके निजी डॉक्टरों और कम-से-कम एक परिवार के सदस्य की मौजूदगी में ही होना चाहिए. पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के दो दिन बीत जाने के बाद भी लिखित आदेश जारी न करने पर दुख जताया है और इलाज में हो रही देरी पर भी सवाल उठाए हैं.
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पीटीआई ने चेतावनी दी है कि अगर इमरान खान के स्वास्थ्य या जिंदगी को कोई भी नुकसान पहुंचता है, तो इसकी जिम्मेदार मौजूदा संघीय और प्रांतीय सरकारें होंगी.