अमेरिका में विदेशी धार्मिक नेताओं की एंट्री को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. टेक्सास से रिपब्लिकन सांसद चिर रॉय (Chip Roy) ने सोमवार को एक नया बिल पेश किया, जिसका नाम Inhibiting Militant Adversarial Mullahs (IMAM) एक्ट रखा गया है. इस बिल का मकसद उन कट्टरपंथी धार्मिक नेताओं को अमेरिका आने से रोकना है, जिन पर अमेरिका विरोधी विचार फैलाने या आतंकवाद का समर्थन करने के आरोप हैं.
चिप रॉय ने इस बिल को पेश करते हुए कहा कि अमेरिका को ऐसे विदेशी मौलवियों और धार्मिक नेताओं के लिए रेड कार्पेट नहीं बिछाना चाहिए, जो अमेरिका के खिलाफ नफरत फैलाते हों या कट्टरपंथी शासन के प्रवक्ता की तरह काम करते हों. उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग धार्मिक वीजा का इस्तेमाल कर अमेरिका में प्रवेश करते हैं और वहां चरमपंथी विचारधारा फैलाते हैं.
यह दो पन्नों का छोटा बिल अमेरिकी इमिग्रेशन कानून की धारा 101(a) (15)(R) में संशोधन का प्रस्ताव देता है. इसके तहत 'इमाम, ग्रैंड इमाम, मुफ्ती, ग्रैंड मुफ्ती, आयतुल्लाह और ग्रैंड आयतुल्लाह' जैसे धार्मिक पदों वाले विदेशी नागरिकों को धार्मिक कार्यकर्ता वीजा के जरिए अमेरिका में प्रवेश करने से रोका जा सकता है.
चिप रॉय ने कहा कि कई वर्षों से विरोधी विचारधारा वाले धार्मिक चेहरे अमेरिकी इमिग्रेशन कानून की कमजोरियों का फायदा उठा रहे हैं. उनके मुताबिक, ये लोग धार्मिक वीजा लेकर अमेरिका आते हैं और फिर कट्टरपंथी सोच को बढ़ावा देते हैं. उन्होंने कहा कि IMAM Act यह साफ संदेश देता है कि अमेरिका मंत्रालय के नाम पर किसी उग्रवादी विचारधारा को आयात नहीं करेगा.
शरिया-मुक्त अमेरिका कॉकस के सह-संस्थापक रहे चिप रॉय ने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति पश्चिमी देशों के दुश्मनों के मूल्यों को बढ़ावा देता है, तो उसे अमेरिका आने का वीजा नहीं मिलना चाहिए. इस बयान के बाद अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर नई राजनीतिक बहस छिड़ने की संभावना बढ़ गई है.
हालांकि, इस बिल को कानून बनने के लिए अभी अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से पास होना होगा और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी भी जरूरी होगी. फिलहाल यह प्रस्ताव अमेरिका की इमिग्रेशन नीति, धार्मिक स्वतंत्रता और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर एक बड़े राजनीतिक विवाद का कारण बन सकता है.