भारत, इजरायल, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) मिलकर एक नया व्यापारिक ग्रुप I2U2 बना रहे हैं. इन चारों देशों के नेता अगले सप्ताह आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले हैं. इस सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण उत्पन्न खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के तौर तरीकों और चारों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी.
Deccan Herald की एक रिपोर्ट के मुताबिक, I2U2 संगठन की आधिकारिक शुरुआत 13 जुलाई को एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन में की जाएगी. इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन इजरायल की यात्रा पर होंगे. अपनी इसी यात्रा के दौरान बाइडेन सऊदी अरब और फिलिस्तीनी अधिकारियों से बातचीत करने के लिए वेस्ट बैंक भी जाएंगे.
I2U2 सम्मेलन में चारों देशों देशों के राष्ट्राध्यक्ष- भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और इजराइल के राष्ट्रपति नफ्ताली बेनेट शामिल होंगे. भारत इस नए ग्रुप में शामिल होकर अमेरिका और यूएई के साथ अपने संबंधों को बिना जोखिम में डाले इजरायल के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है.
अमेरिका सुरक्षा सहयोग को भी करना चाहता है शामिल
अमेरिका चाहता है कि इन नए ग्रुप में चारों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग भी हो. इसे लेकर अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा, 'चारों देश तकनीक के केंद्र हैं. ये चारों ही देश जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी काफी आगे हैं. इजरायल और यूएई ने हाल के वर्षों में अपने संबंधों को ठीक किया है और दोनों द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग भी कर रहे हैं.'
नेड प्राइस ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के समय यूएई, बहरीन और इजरायल के साथ हुए समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध स्थिरता की ओर बढ़ रहे हैं. भारत ने भी इजरायल-यूएई संबंधों को लेकर कहा है कि उसने हमेशा पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता का समर्थन करता है.
वहीं, नेड प्राइस ने भारत का जिक्र करते हुए कहा, 'बेशक, भारत एक बड़ा बाजार है. ये उच्च तकनीक और मांग वाले सामानों का भी एक बड़ा उत्पादक है. अमेरिका, भारत, यूएई और इजरायल एक साथ मिलकर हर क्षेत्र में काम कर सकते हैं. चाहे वह तकनीक हो, व्यापार हो, जलवायु हो या कोविड 19 के खिलाफ लड़ाई.'
अमेरिका जहां एक तरफ चाहता है कि ये ग्रुप आर्थिक सहयोग के साथ सुरक्षा सहयोग भी करे वहीं, भारत की तरफ से अभी तक ये स्पष्ट नहीं है. भारत ने स्पष्ट नहीं किया है कि वो इस ग्रुप में सुरक्षा सहयोग को लाना चाहता है या नहीं.
भारत प्रशांत क्षेत्र में चीनी अतिक्रमण का मुकाबला करने के लिए ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के साथ अपने ग्रुप क्वॉड में भी सैन्य सहयोग को नहीं लाना चाहता. अमेरिका क्वॉड को नेटो जैसा गठबंधन बनाना चाहता था लेकिन भारत ने अमेरिकी प्रयासों को रोक दिया. भारत ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वो चीन को रोकने के क्रम में अपने पुराने सहयोगी रूस से रिश्ते कमजोर नहीं करना चाहता था.
भारत ने जोर देकर कहा कि क्वॉड जैसा है, उसे वैसे ही बना रहना चाहिए. इसका काम भारत-प्रशांत क्षेत्र के देशों को कोविड -19 टीकों की आपूर्ति करना, उन्हें बुनियादी ढांचे के निर्माण में मदद करना और चीन के प्रभाव में आने से रोककर उनके आर्थिक विकास में मदद करना है.
पिछले साल की गई थी I2U2 ग्रुप की कल्पना
I2U2 ग्रुप की कल्पना तब की गई थी, जब पिछले साल अक्टूबर में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यरुशलम का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने इजरायल के विदेश मंत्री यायर लैपिड के साथ मिलकर अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया था. इसी कॉन्फ्रेंस के दौरान चारों देशों के नेताओं ने आर्थिक सहयोग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच शुरू करने का निर्णय लिया था.