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ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय मुसलमानों को लेकर मोदी सरकार पर साधा निशाना

ग्लोबल टाइम्स ने मुसलमानों के खिलाफ हेट स्पीच को लेकर मोदी सरकार को घेरा है. चीनी मीडिया ने अमेरिका पर भी निशाना साधा है और कहा है कि मानवाधिकारों की बात करने वाला अमेरिका अपने निजी हितों के लिए मुसलमानों के मुद्दे पर चुप है.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • भारत में मुसलमानों की स्थिति को लेकर अमेरिका पर निशाना
  • ग्लोबल टाइम्स ने बाइडेन सरकार पर लगाया डबल स्टैंडर्ड का आरोप
  • धर्म संसद को लेकर मोदी सरकार को घेरा

चीन के प्रमुख अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भारत में मुसलमानों की स्थिति को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है. हालांकि, पूरी दुनिया में चीन खुद ही वीगर मुसलमानों के साथ अत्याचार के मामले में घिरा रहता है. 

कई ऐसी रिपोर्ट आई हैं, जिनमें बताया गया है कि चीन ने वीगर मुसलमानों के लिए निगरानी कैंप बना रखा है. वहां मुसलमानों को मस्जिद में नमाज अदा करने तक की अनुमति नहीं होती है. लेकिन चीनी अखबार अब भारत में मुसलमानों की स्थिति को लेकर सवाल उठा रहा है. 

चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र माने जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने अमेरिका के रवैये पर भी सवाल खड़े किए हैं. ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि खुद को मानवाधिकारों का प्रहरी बताने वाला अमेरिका भी भारत में मुसलमानों के नरसंहार के आह्वान पर भी चुप है. अमेरिका के वो सांसद जो मुस्लिमों के अधिकारों की बात करते हैं, भारत को लेकर उन्होंने चुप्पी साध रखी है.

ग्लोबल टाइम्स ने इस मामले को लेकर एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें वो लिखता है कि भारत में मुसलमानों, ईसाइयों और अन्य धर्मों को निशाना बनाने वाला हिंदू कट्टरपंथ बढ़ रहा है, लेकिन क्या पश्चिम देशों को इसकी परवाह है?

हिंदू महासभा की महासचिव पूजा शकुन पांडेय का चीनी मीडिया ने किया जिक्र

ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में हिंदू महासभा की महासचिव पूजा शकुन पांडेय का जिक्र प्रमुखता से किया है. पांडेय अपने मुस्लिम विरोधी बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहती हैं. हरिद्वार धर्म संसद में भी उन्होंने अन्य हिंदुत्ववादी लोगों के साथ मिलकर मुसलमानों को लेकर विवादित बयान दिया था. 

ग्लोबल टाइम्स ने इसी धर्म संसद का जिक्र करते हुए लिखा कि कट्टर हिंदूत्ववादी पूजा शकुन पांडेय ने अपने समर्थकों से मुसलमानों को मारने का आह्वान किया. उनके उस बयान का भी जिक्र किया गया है कि जिसमें उन्होंने कथित तौर पर मुसलमानों को मारकर भारत को एक हिंदू राष्ट्र बनाने की बात कही थी. 

भाजपा की सरकार में बिगड़ी मुसलमानों की स्थिति

ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि भारत का मुस्लिम समुदाय दशकों से भेदभाव सहन करता आया है और 'हिंदुत्ववादी भाजपा' के नेतृत्व वाली सरकार में स्थिति और बदतर हो गई है.

शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज में रिसर्च सेंटर फॉर चाइना-साउथ एशिया कोऑपरेशन के महासचिव लियू जोंगई के हवाले से ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, 'मोदी प्रशासन ने कश्मीर, जो कि एक मुस्लिम-बहुल राज्य है, की स्वायत्त स्थिति को खत्म कर दिया और नागरिकता संशोधन अधिनियम को पारित करने सहित कई उपाय किए हैं. इस कानून को मुस्लिम विरोधी कानून करार दिया गया है. सरकार के इन कदमों ने हिंदू राष्ट्रवादियों और उनके अहंकार को बढ़ावा दिया है.'

लियू ने ये भी कहा कि भारत के पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं. इसे देखते हुए भाजपा वोट के लिए मुस्लिम विरोधी भावनाओं को और भड़काएगी.

अमेरिका पर ग्लोबल टाइम्स का हमला

चीनी अखबार आगे लिखता है कि मानवाधिकारों की बात करने वाले पश्चिम देश खासकर, अमेरिका का इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखना हास्यास्पद है. अमेरिका दावा करता है कि वो मानवाधिकारों का रक्षक है लेकिन इस मामले पर उसने आंख मूंद रखी है. अमेरिकी नेता मार्को रुबियो और क्रिस स्मिथ जो अक्सर मुसलमानों के अधिकारों की बात करते हैं, उन्होंने भी भारत में मुसलमानों की स्थिति पर मौन धारण कर रखा है.

ग्लोबल टाइम्स ने ये भी कहा है कि आलोचना के बजाए अमेरिका भारत के लोकतंत्र की सराहना करता है. विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा था कि भारत का लोकतंत्र काफी अच्छा है. अमेरिका ने डेमोक्रेसी समिट में भारत को बुलाया था जिसे लेकर भी ग्लोबल टाइम्स ने अमेरिका पर निशाना साधा.

'चीन को लेकर मुसलमानों की स्थिति पर चुप अमेरिका'

ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि अमेरिका चीन को लेकर भारत में मुसलमानों की स्थिति पर चुप्पी साधे हुए है.

रिपोर्ट में लिखा गया, 'भारत में जो हो रहा है, उससे अमेरिकी राजनेता और बुद्धिजीवी वाकिफ हैं. लेकिन दुनिया के भू-रणनीतिक परिदृश्य में भारत की महत्वपूर्ण स्थिति को देखते हुए, विशेष रूप से चीन को संतुलित करने में इसकी भूमिका को लेकर बाइडेन प्रशासन इन मुद्दों को चुनिंदा रूप से अनदेखा कर रहा है. और भारत के साथ सैन्य और राजनीतिक संबंधों को मजबूत करने में लगा हुआ है.'

ग्लोबल टाइम्स ने विशेषज्ञ लियू के हवाले से लिखा है कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका अपने निजी हितों के लिए मुसलमानों के मुद्दे को लेकर भारत पर दबाव डालेगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक भारत अमेरिका के हितों को ध्यान में रखेगा, अमेरिका मुसलमानों को लेकर अपना डबल स्टैंडर्ड जारी रखेगा. 

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