
जगह-जगह ढही हुई इमारतों का मलबा... मलबों से निकलते शव... पुलिस, फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस की गाड़ियों के गूंजते हुए सायरन और इस शोर से निकलती हुईं चीखें...
ये हालात इस समय तुर्की और सीरिया में बने हुए हैं. यहां चौबीस घंटे में चार बार भूकंप आए हैं. पहला भूकंप सोमवार की सुबह 4 बजकर 17 मिनट पर आया. ये भूकंप दक्षिणी तुर्की में सीरिया सीमा के पास गाजियांटेप में आया था. इसकी तीव्रता 7.8 थी.
करीब आठ दशकों बाद तुर्की में इतना जोरदार भूकंप आया है. इससे पहले 1939 में भी 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था. उस भूकंप में 32 हजार 700 लोग मारे गए थे. जबकि, 17 अगस्त 1999 में तुर्की के इजमित में 7.6 की तीव्रता का भूकंप आया था. उसमें 17 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे.
पहले भूकंप के बाद तीन और जोरदार झटके आए. पहले भूकंप के 9 घंटे बाद 7.5 की तीव्रता का भूकंप आया था. इसके बाद 6 की तीव्रता का तीसरा भूकंप आया. मंगलवार सुबह भी तुर्की में 5.9 की तीव्रता का भूकंप आया.

तुर्की और सीरिया के कई शहर भूकंप की चपेट में आए. भूकंप के कंपन इतनी तेज थे कि इमारतें भरभराकर ताश के पत्तों की तरह ढह गईं. तुर्की और सीरिया में अब तक 5600 इमारतों के गिरने की खबर है. भूकंप सुबह 4 बजे आया, उस वक्त ज्यादातर लोग अपने घरों पर सो रहे थे. ऐसे में जब भूकंप आया और इमारतें गिरीं, उन्हें जान बचाने का कोई मौका ही नहीं मिला. पलभर में इमारतें ढह गईं और घरों पर सोते लोग मलबे में दब गए.
ढही हुई इमारतों के मलबे से शव निकलते जा रहे हैं. जो जिंदा है उनकी चीखें सुनाई दे रहीं हैं. हजारों सरकारी अधिकारी, रेस्क्यू टीम, फायर फाइटर्स, मेडिकल टीम और साढ़े तीन हजार सैनिक लोगों को बचाने में जुटे हैं. हालांकि, कड़ाके की ठंड और बारिश की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कतें आ रहीं हैं.
तुर्की के स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मौसम और आपदा का दायरा रेस्क्यू टीमों के लिए चुनौतियां पैदा कर रही हैं. खराब मौसम के चलते रेस्क्यू टीम के हेलिकॉप्टर भी उड़ान नहीं भर पा रहे हैं. इतना ही नहीं हाल ही में तुर्की और सीरिया के कई इलाकों में भारी बर्फबारी हुई है. इसके चलते तापमान में भी गिरावट आई है.

दक्षिण-पूर्व तुर्की के दियारबकीर शहर में एक महिला की बांह टूट गई, उसके चेहरे पर चोटें हैं. वो महिला सात मंजिला इमारत के एक घर में रहती है. उसने बताया, 'हम एक झूले की तरह हिल रहे थे. उस घर में हम 9 लोग रहते हैं. मेरे दो बेटे अब भी मलबे में हैं. मैं उन्हें ढूंढ रहीं हूं.'
अब्दुल सलाम अल-महमूद सीरिया के अतरेब में रहते हैं. वो बताते हैं, 'ये एक विनाश की तरह था.' उन्होंने कहा कि ठंड बहुत है, बारिश हो रही है, लोगों को जल्द से जल्द बचाने की जरूरत है.

इन भूकंपों में सबसे ज्यादा नुकसान दक्षिणी तुर्की में हुआ है. कई शहरों में इंटरनेट कट गया है, सड़कें टूट चुकी हैं, लाखों लोग बेघर हो गए हैं. सर्दी की वजह से मलबे में दबे लोग और उनके इंतजार में बाहर बैठे लोगों की हालत बिगड़ती जा रही है.
तुर्की के इस्केंदरून में एक अस्पताल भी ढह गया. मेडिकल टीम घायलों को बचाने के लिए जो कर सकती है, वो कर रही है.

तुर्की से सटे सीरिया में भी भूकंप ने जमकर तबाही मचाई है. यहां भी अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. ट्विटर पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. ये वीडियो सीरिया के अलेप्पो प्रांत का है. वीडियो में दिख रहा है कि एक बिल्डिंग के ढहने के कुछ सेकंड बाद ही उससे सटी दूसरी इमारत भी गिर गई.
अलेप्पो के जंडरिस शहर में जहां कभी इमारत हुआ करती थी, वहां अब ईंट-सीमेंट, स्टील की रॉड और कटे-फटे कपड़े पड़े हुए हैं. एक नौजवान ने न्यूज एजेंसी को बताया, 'उस इमारत में 12 परिवार रहते थे. एक भी व्यक्ति बाहर नहीं आ सका. एक भी नहीं.'

तुर्की में भूकंप के बाद 36 घंटों में 100 से ज्यादा आफ्टरशॉक आ चुके हैं. भूकंप के लिहाज से तुर्की दुनिया के बेहद संवेदनशील इलाकों में है. ये तीन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच है. जो आपस में एक-दूसरे से धक्का-मुक्की कर रही हैं. इसलिए भूकंप आते रहते हैं. यहां भूकंप का एक लंबा इतिहास रहा है. करीब दो हजार साल पहले आए एक भूकंप ने दर्जनों शहरों को मलबे में बदल दिया था.
तुर्की में 7.8 तीव्रता के भूकंप के बाद अब तक करीब 109 ऑफ्टरशॉक आए. आम तौर पर सभी बड़े भूकंप के बाद कई झटके महसूस किए जाते हैं. लेकिन तुर्की में जो ऑफ्टरशॉक्स आए, उनमें कुछ की तीव्रता काफी अधिक थी. यहां तक कि एक आफ्टरशॉक की तीव्रता तो 7.5 थी, यानी पहले भूकंप के लगभग बराबर.
हालांकि, यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे के भूकंप वैज्ञानिक सुसान हफ का कहना है कि इसमें चौंकने वाली बात नहीं है. कई बार आफ्टरशॉक मूल भूकंप से भी ज्यादा तीव्रता के आते हैं.

तुर्की और सीरिया में भूकंप की वजह से मरने वालों की संख्या हर घंटे बढ़ती जा रही है. तुर्की में सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है. राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान ने बताया कि 45 देशों की ओर से भूकंप में रेस्क्यू ऑपरेशन की मदद करने की पेशकश की गई है. भारत की ओर से भी एनडीआरएफ की टीम भेजी गई है.
तुर्की प्रशासन ने लोगों से सड़कों को खाली रखने की अपील की है, ताकि रेस्क्यू टीमें आसानी से भूकंप प्रभावित इलाकों में पहुंच सकें. तुर्की डिजास्टर एंड इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी ने कहा कि जरूरी न हो तो सड़कों पर न निकलें. जिससे इमरजेंसी वाहनों को भूकंप प्रभावित इलाकों में पहुंचने में दिक्कत न हो. इतना ही नहीं भूकंप प्रभावित इलाके में 300,000 लाख कंबल, 24,712 बेड, 19,722 टेंट भेजे गए हैं.