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चीन से करीबी पर बांग्लादेश को भारत ने इशारों-इशारों में किया आगाह

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस मौके पर 1971 के युद्ध और बांग्लादेश की आजादी में भारत की सेना की भूमिका के बारे में भी विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश मुक्ति संग्राम 20वीं सदी की एक अभूतपूर्व घटना थी क्योंकि यह अन्याय, अत्याचार और उत्पीड़न के खिलाफ एक नैतिक लड़ाई थी.

राजनाथ सिंह राजनाथ सिंह
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राजनाथ सिंह ने बांग्लादेश की तारीफ की
  • राजनाथ सिंह ने 1971 में बांग्लादेश की आजादी पर भी की बात

पाकिस्तान को आतंकवाद पर कड़ी चेतावनी देने के बाद भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश के उच्चायोग पहुंचे. उन्होंने बांग्लादेश के आर्म्ड फोर्सेस डे में शिरकत की और भारत-बांग्लादेश के संबंधों पर बातचीत की. राजनाथ सिंह ने इस दौरान बांग्लादेश को चीन से करीबी को लेकर भी आगाह करने की कोशिश की.

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि बांग्लादेश के साथ भारत के विशेष संबंध हैं और बांग्लादेश में करीब 10 अरब डॉलर्स के विकास कार्यों में भारत की भागीदारी है. उन्होंने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों की सुरक्षा और विकास संबंधी चिंताओं को लेकर संवेदनशील है और अपने पड़ोसी देशों से भी उसी स्तर की संवेदनशीलता की उम्मीद करता है. राजनाथ सिंह का इशारा बांग्लादेश के इन्फ्रास्ट्र्क्चर समेत बाकी क्षेत्रों में चीन की बढ़ती मौजूदगी की तरफ था. कुछ साल पहले ही बांग्लादेश ने चीन से देश की पहली डीजल इलेक्ट्रिक परमाणु पनडुब्बी हासिल की थी. इसके बाद से भारत चीन के बढ़ते प्रभाव को काउंटर करने के लिए बांग्लादेश के साथ सैन्य संबंधों को मजबूत करने में जुट गया है.

'बांग्लादेश के साथ काम करना जारी रखेगा भारत'

राजनाथ सिंह ने इस मौके पर 1971 के युद्ध और बांग्लादेश की आजादी में भारत की सेना की भूमिका के बारे में भी विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश मुक्ति संग्राम 20वीं सदी की एक अभूतपूर्व घटना थी क्योंकि यह अन्याय, अत्याचार और उत्पीड़न के खिलाफ एक नैतिक लड़ाई थी. 1971 में भारत गरीबी से जूझ रहा था लेकिन इसके बावजूद भारत ने मुक्ति-वाहिनी के साथ मिलकर पाकिस्तान से 13 दिनों तक युद्ध लड़ा और बांग्लादेश को पाकिस्तान के अत्याचार से निजात दिलाई थी. 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की भावना को युवा पीढ़ी को भूलना नहीं चाहिए. ये इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि साल 1971 में बांग्लादेश पर अत्याचार करने वाली ताकतों के खिलाफ हमने संघर्ष किया है, वे अब भी खत्म नहीं हुई हैं. उन्होंने आगे कहा कि भारत बांग्लादेश की रक्षा और सुरक्षा चिंताओं को मद्देनजर रखते हुए साथ काम करना जारी रखेगा. 

'अपने आलोचकों को गलत साबित किया बांग्लादेश ने'

रक्षा मंत्री ने कहा कि बांग्लादेश लगातार अपने आलोचकों को गलत साबित कर रहा है और पिछले कुछ वर्षों में इस देश ने जिस स्तर पर विकास किया है, वो कहीं ना कहीं बाकी विकासशील देशों के लिए प्रेरणा बन चुका है. भारत के लिहाज से देखा जाए तो बांग्लादेश की सफलता, हमारी खुद की सफलता है और ये हमारे हित में है. भारत बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंध इस समय फिलहाल एक सुनहरे दौर से गुजर रहे हैं.

गौरतलब है कि इस अवसर पर राजनाथ सिंह के साथ सीडीएस जनरल बिपिन रावत, थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे और लेफ्टिनेंट जनरल के जे एस ढिल्लन भी मौजूद थे. 

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