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पेरिस: क्लाइमेट डील का अंतिम मसौदा जारी, भारत ने जताई खुशी

मसौदे में ग्लोबल तापमान कम करने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर विकासशील देशों की मदद के लिए 2020 से हर साल 100 अरब डॉलर देने का प्रस्ताव है.

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पेरिस में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में शनिवार को क्लाइमेट डील का अंतिम मसौदा जारी कर दिया गया, जिसमें वैश्विक तापमान की सीमा दो डिग्री सेल्सियस से नीचे लाने पर बात हुई है. भारत ने इस महत्वाकांक्षी जलवायु समझौते के अंतिम मसौदे को संतुलित बताते हुए इसका स्वागत किया और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि दस्तावेज में हमारी चिंताओं का ध्यान रखा गया है.

विकासशील देशों को सालाना 100 अरब डॉलर देने का प्रस्ताव
में ग्लोबल तापमान कम करने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर विकासशील देशों की मदद के लिए 2020 से हर साल 100 अरब डॉलर देने का प्रस्ताव है. संभावना है कि दो डिग्री सेल्सियस से कम या 1.5 डिग्री सेल्सियस का लक्ष्य भारत और चीन जैसे विकासशील देशों को स्वीकार्य नहीं हो क्योंकि ये देश दो डिग्री सेल्सियस की सीमा को तरजीह देंगे ताकि उन्हें लंबे समय तक कोयला जैसे ईंधन जलाने को मिले.

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ओलांद ने PM मोदी को किया फोन
दुनियाभर के 195 देशों के प्रतिनिधियों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच, फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरेंट फैबियस और राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने ऐतिहासिक समझौते का मसौदा प्रस्तुत करते हुए वहां मौजूद सदस्यों से इसे मंजूरी देने की अपील की. प्रतिनिधियों को दस्तावेज पर गौर करने के लिए तीन घंटे के समयान्तराल के बीच ओलांद ने समझौते के लिए भारत को राजी करने के स्पष्ट प्रयास में को फोन किया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ओलांद ने समझौते की ताजा स्थिति पर चर्चा की. उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने इस भावना की तारीफ की.’ तेरह दिन की बातचीत के बाद फैबियस ने अंतिम मसौदे के दस्तावेज को ‘न्यायोचित, स्थिर और कानूनी रूप से बाध्यकारी’ बताया.

जावडेकर ने जताई मसौदे पर खुशी
पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि भारत की मांग के अनुरूप राहत, अनुकूलन, वित्त एवं प्रौद्योगिकी तक पहुंच सहित कदम उठाने संबंधी सभी क्षेत्रों में विकसित और विकासशील देशों के बीच अंतर किया गया है. इसे भारत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए जावडेकर ने कहा कि 31 पेज के अंतिम मसौदे में उसके द्वारा समर्थित सतत जीवनशैली एवं जलवायु न्याय का जिक्र किया गया है. उन्होंने कहा कि अंतिम मसौदा दस्तावेज पेश किये जाने के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया. जावडेकर ने कहा, ‘अंतिम दस्तावेज की पहली झलक के बाद, हम खुश हैं कि दस्तावेज में भारत की चिंताओं को शामिल किया गया और उनका ध्यान रखा गया.

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दस्तावेज महत्वाकांक्षी और वास्तविक है: ओलांद
मसौदा पेश किये जाने के मौके पर ओलांद और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून उपस्थित थे. ओलांद ने कहा, ‘दस्तावेज महत्वाकांक्षी और वास्तविक है. फ्रांस सभी देशों से जलवायु परिवर्तन पर पहले वैश्विक समझौते को स्वीकार करने का आह्वान करता है.’ उन्होंने कहा, ‘आपको अंतिम निर्णायक कदम उठाना होगा जो हमें लक्ष्य तक पहुंचाएगा.’ उन्होंने यह भी कहा कि सभी देश समझौते से संतुष्ट नहीं हो सकते.

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