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ओजोन छेद के सिकुड़ने से भी ग्लोबल वॉर्मिंग

दुनिया में पर्यावरण की दृष्टि से सबसे खतरनाक माना जाने वाला अंटार्कटिक ओजोन छेद अब धीरे धीरे बंद हो रहा है, लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि इस छेद के सिकुड़ने से दक्षिणी गोलार्ध के तापमान में वृद्धि हो सकती है.

दुनिया में पर्यावरण की दृष्टि से सबसे खतरनाक माना जाने वाला अंटार्कटिक ओजोन छेद अब धीरे धीरे बंद हो रहा है, लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि इस छेद के सिकुड़ने से दक्षिणी गोलार्ध के तापमान में वृद्धि हो सकती है.

लंदन के लीड्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का दावा है कि छेद के नीचे तेज गति से बहने वाली हवा से उजले ग्रीष्मकालिक बादलों का निर्माण होता है, जो सूरज की तेज किरणों को दर्शाता है.

इस शोध के सह लेखक प्रो. केन कारस्लॉ ने कहा, ‘‘यह बादल सूरज की किरणों के लिए शीशे की तरह काम करते हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन से पैदा हो रही गर्मी इस क्षेत्र में प्रभावी तरीके से गर्मियों के मौसम में छंट जाती है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद यह हवा नीचे आ जाती है, जिसके परिणामस्वरूप कार्बन डाइऑक्साइड (सी ओ 2) उत्सर्जन दक्षिणी गोलार्ध में गर्मी पैदा करेगा और भविष्य में इसका जलवायु पर गहरा प्रभाव पड़ेगा.’’ साइंस डेली की रिपोर्ट में कहा गया है कि ओजोन परत में जो छेद है, उसने पिछले दो दशकों में कार्बन से निकलने वाली गर्मी से इस क्षेत्र की सुरक्षा की है.

उल्लेखनीय है कि ग्रीनहाउस गैस धरती से निकलने वाली इंफ्रारेड विकिरण को सोख लेते हैं, जिससे धरती को गर्मी मिलती है लेकिन एयरोसोल एक ऐसा कारण बन जाता है जो सूरज की रोशनी को अंतरिक्ष में वापस भेज देता है.

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