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कनाडा में 166 करोड़ की सोने की चोरी... जांच में भारतीय कनेक्शन आया सामने, प्रीत पनेसर की प्रत्यर्पण की मांग तेज

2023 में कनाडा के इतिहास की सबसे बड़ी सोने की चोरी का मामला अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है. लगभग 165 करोड़ रुपये की चोरी में मुख्य आरोपी प्रीत पनेसर, जो एयर कनाडा में मैनेजर था, पर सोने से भरे कंटेनरों को एयर कार्गो सिस्टम के जरिए चोरी करने का आरोप है. कनाडा ने भारत से पनेसर के प्रत्यर्पण की आधिकारिक मांग की है, जबकि दो आरोपी अभी फरार हैं.

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कनाडा के इतिहास की सबसे बड़ी गोल्ड चोरी का मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा (Photo: ITG/ Arvind Ojha)
कनाडा के इतिहास की सबसे बड़ी गोल्ड चोरी का मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा (Photo: ITG/ Arvind Ojha)

2023 में हुई लगभग 20 मिलियन डॉलर यानी करीब 165 करोड़ रुपये की गोल्ड हीस्ट कनाडा के इतिहास की सबसे बड़ी चोरी मानी जा रही है. इस मामले में कनाडा सरकार ने भारत से आरोपी प्रीत पनेसर के प्रत्यर्पण की आधिकारिक मांग की है.

कनाडा की पील रीजनल पुलिस के अनुसार, 32 साल के प्रीत पनेसर इस पूरी चोरी की मुख्य कड़ी था. पनेसर एयर कनाडा में मैनेजर के पद पर काम कर चुका है और उस पर एयर कार्गो सिस्टम का दुरुपयोग कर सोने से भरे कंटेनरों को चोरी करने का आरोप है. 

बताया गया है कि पनेसर ने गोल्ड शिपमेंट की पहचान करके सिस्टम को हैक किया और इसी के जरिए सोने भरे कंटेनर को एयरपोर्ट से बाहर निकलवाने में अहम भूमिका निभाई.

फरवरी 2025 में जांच के दौरान यह पता चला कि पनेसर भारत में छिपा हुआ है. वह पंजाब के मोहाली में किराए के मकान में पकड़ा गया. इस पर प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में छापेमारी करते हुए केस दर्ज किया. 

संदेह है कि चोरी के बाद करीब 8.5 करोड़ रुपये हवाला सिस्टम के जरिए भारत लाए गए, जिनका उपयोग म्यूजिक और फिल्म इंडस्ट्री के प्रोजेक्ट्स में किया गया. यह पैसा पनेसर की पत्नी की कंपनी के जरिए निवेश किया गया था.

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यह भी पढ़ें: कनाडा की सबसे बड़ी गोल्ड चोरी का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, जानें कौन है अरसलान चौधरी

इस बीच कनाडाई पुलिस ने एक और आरोपी अरसलान चौधरी को टोरंटो पियर्सन एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया है. अब तक कुल नौ आरोपियों पर केस दर्ज हो चुका है, जबकि प्रीत पनेसर समेत दो अभी फरार हैं.

प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों का कहना है कि अभी तक प्रत्यर्पण का आधिकारिक अनुरोध नहीं मिला है, लेकिन कनाडाई एजेंसियों से संपर्क जारी है. यह मामला दोनों देशों के बीच कानून प्रवर्तन सहयोग की एक बड़ी चुनौती बन गया है. 

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