अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित सैन डिएगो की सबसे बड़ी मस्जिद (इस्लामिक सेंटर ऑफ सैन डिएगो) में सोमवार अंधाधुंध गोलीबारी हुई. इस हमले में एक सिक्योरिटी गार्ड समेत तीन लोगों की मौत हो गई. फायरिंग को अंजाम देने वाले दोनों हमलावरों का पूरा बैकग्राउंड अब सामने आ चुका है.
मस्जिद में फायरिंग करने के बाद दोनों हमलावरों ने खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली. पुलिस को इस्लामिक सेंटर के पास खड़ी एक कार से दोनों संदिग्धों के शव मिले.
दोनों आरोपी किशोर थे और इनमें से एक हमलावर ने अपने माता-पिता के घर से ही चुपके से तीन खतरनाक हथियार चुराए थे. उन्हीं हथियारों से उसने इस वारदात को अंजाम दिया.
कौन था हमलावर?
लॉ एनफोर्समेंट सोर्स और पुलिस डिस्पैच ने इनमें से एक 17 साल के मुख्य हमलावर की पहचान केन क्लार्क के रूप में की है. केन क्लार्क के स्कूल रिकॉर्ड से पता चलता है कि वो पहले सैन डिएगो के एक आम स्कूलों में ही पढ़ता था. सैन डिएगो यूनिफाइड स्कूल डिस्ट्रिक्ट के प्रवक्ता जेम्स कैनिंग के मुताबिक, क्लार्क ने शुरू में 'केट सेशन्स एलीमेंट्री स्कूल' और 'सैन डिएगो स्कूल ऑफ क्रिएटिव एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स' से पढ़ाई की थी.
इसके बाद साल 2021 में उसके परिवार ने उसे सामान्य स्कूल से निकालकर 'आई-हाई वर्चुअल एकेडमी' नाम के एक ऑनलाइन स्कूलिंग प्रोग्राम में डाल दिया. वो घर पर ही रहकर कंप्यूटर से पढ़ाई करता था. हालांकि, उसका घर मैडिसन हाई स्कूल के पास था, इसलिए नियम के मुताबिक वो वहां के खेलकूद में हिस्सा ले सकता था.
क्लार्क साल 2024 से 2025 तक मैडिसन हाई स्कूल की रेसलिंग (कुश्ती) टीम का एक बेहतरीन खिलाड़ी था. जनवरी 2024 में इस स्कूल की रेसलिंग टीम ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट भी शेयर की थी, जिसमें क्लार्क को एक टूर्नामेंट में फर्स्ट प्राइज जीतने पर बधाई दी गई थी. हालांकि, इस साल वो स्कूल की किसी भी एक्टिविटी में शामिल नहीं था.
स्कूल में कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं
प्रवक्ता जेम्स कैनिंग ने बताया कि क्लार्क ग्रेजुएट होने वाला था. स्कूल में उसका कोई भी खराब रिकॉर्ड नहीं रहा है. उसका पूरा रिकॉर्ड बिल्कुल साफ था. बस साल 2015 में, जब वो प्राइमरी स्कूल में था, तब उसने किसी बच्चे के पैर में एक मुक्का मार दिया था. इसके अलावा उसका कोई विवाद सामने नहीं आया था.
सदमे में परिवार और साथी खिलाड़ी
मास शूटिंग के बाद केन क्लार्क का परिवार पूरी तरह टूट चुका है. सीएनएन से बातचीत में उसके दादा-दादी, डेविड और डेबोरा क्लार्क ने रोते हुए कहा, 'हम इस सच को मानने की कोशिश कर रहे हैं. जो कुछ भी हुआ, उसके लिए हम दिल से बहुत शर्मिंदा और दुखी हैं.'
क्लार्क के साथ कुश्ती लड़ने वाले एक पुराने साथी खिलाड़ी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'क्लार्क एक अच्छा बच्चा था. वो घर पर रहकर पढ़ता था, इसलिए वो हमेशा टीम के साथ घुलने-मिलने और दोस्त बनाने की कोशिश करता रहता था. वो कभी किसी से उलझता नहीं था.'
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साथी खिलाड़ी ने ये भी साफ किया कि उसने कभी भी क्लार्क के मुंह से इस्लाम के खिलाफ या नस्लवादी बातें नहीं सुनी थीं और न ही उसे कभी हिंसक होते देखा था. वो बस टीम में फिट होने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश करता था. ऐसे में उसका इस तरह की वारदात को अंजाम देना मिस्ट्री बना हुआ है.