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दर्जनों नाव गाजा की ओर रवाना, इजरायल का ब्लॉकेड तोड़ने की एक और कोशिश

इजरायल की नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने के लिए एक बार फिर से छोटे-छोटे नावों का कारवां एक बार फिर से समंदर में निकला है. इनका लक्ष्य गाजा है. इन नावों में सामान और एक्टिविस्ट दोनों हैं. अब देखना होगा कि इन नावों को लेकर इजरायल की क्या प्रतिक्रिया होती है.

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गाजा में फिर मदद पहुंचाने की कोशिश. (Photo: AP)
गाजा में फिर मदद पहुंचाने की कोशिश. (Photo: AP)

गाजा पर इजरायल की नौसैनिक नाकेबंदी को एक बार फिर से तोड़ने की कोशिश शुरू हुई है. गुरुवार को तुर्की के भूमध्यसागर तट से दर्जनों नावें और एक्टिविस्ट गाजा की ओर रवाना हुईं. इन नावों में फिलिस्तीनियों के लिए चीजें लोड हैं. यह घटना इज़रायल द्वारा पिछले बेड़े को रोकने और दो कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के कुछ ही हफ़्तों बाद हुई है. 

मारमारिस बंदरगाह से 50 से ज़्यादा नावें गाजा की ओर रवाना हुईं. ग्लोबल सुमुद फ़्लोटिला के आयोजकों ने इसे गाजा के तटों तक की अपनी यात्रा का अंतिम चरण बताया.

30 अप्रैल को इजरायली सेना ने दक्षिणी यूनानी द्वीप क्रीट के पास एक बेड़े की 20 से ज़्यादा नावों को रोक लिया था और लगभग 175 कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था. 

आयोजकों का कहना है कि हाल की कोशिशों में इजरायल द्वारा रोके जाने के बाद फिर से इकट्ठा हुआ जहाजों का बेड़ा गाजा की ओर भेजा जा रहा है.  45 देशों के लगभग 500 कार्यकर्ता इसमें हिस्सा ले रहे हैं. 

इन्हें उम्मीद है कि वे गाज़ा पट्टी में रहने वाले फिलिस्तीनियों के हालात की तरफ दुनिया का ध्यान फिर से खींच पाएंगे; यह इलाका इजरायल-हमास युद्ध की वजह से पूरी तरह तबाह हो चुका है. गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 7 अक्टूबर, 2023 को दक्षिणी इज़राइल पर हमास के नेतृत्व में हुए हमले के साथ शुरू हुए गाज़ा युद्ध के बाद से अब तक कुल 72,744 फ़िलिस्तीनी मारे जा चुके हैं. इस हमले में लगभग 1200 लोग मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था. 

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गाजा में 6 महीने से चल रही एक नाजुक सीजफायर ने इजरायली सेना और हमास के नेतृत्व वाले लड़ाकों के बीच सबसे भीषण लड़ाई को रोक दिया है. गाजा के लगभग 20 लाख लोग अभी भी खंडहरों में रह रहे हैं, जहां खाने और दवाइयों की भारी कमी है और सिर्फ एक इजरायली-नियंत्रित सीमा चौकी से ही सीमित मदद पहुंच पा रही है. 

इजरायल का कहना है कि यह नाकेबंदी इसलिए जरूरी है ताकि हमास हथियारों का आयात न कर सके, जबकि इसके आलोचकों का कहना है कि यह गाजा की पूरी आबादी को दी जा रही एक तरह की सामूहिक सजा है.

पिछले साल इजरायली अधिकारियों ने इसी तरह की एक और कोशिश को नाकाम कर दिया था. इस कोशिश में लगभग 50 जहाज और 500 के करीब कार्यकर्ता शामिल थे जिनमें स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग, नेल्सन मंडेला के पोते मंडला मंडेला और यूरोप के कई सांसद भी शामिल थे. 

इजरायल ने इन सभी लोगों को गिरफ़्तार किया हिरासत में रखा और बाद में उन्हें देश से बाहर निकाल दिया. इन लोगों ने आरोप लगाया था कि इज़रायली अधिकारियों ने उनके साथ बुरा बर्ताव किया. हालांकि इजरायली अधिकारियों ने इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया. 

इस नाकेबंदी को तोड़ने की पहले की कोशिशें भी नाकाम रही हैं. साल 2010 में इजरायली कमांडो ने तुर्की के जहाज 'मावी मारमारा' पर धावा बोल दिया था. यह जहाज उन राहत जहाजों के बेड़े का हिस्सा था जो गाजा तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था. 

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