बेल्जियम की एक महिला को इच्छामृत्यु दे दी गई है. सालों पहले महिला के एक कारनामे ने पूरा दुनिया को झकझोर कर रखा दिया था. उसने अपने पांच छोटे-छोटे बच्चों की गला रेत कर हत्या कर दी थी. बच्चों की हत्या के 16 साल बाद महिला के अनुरोध पर उसे इच्छामृत्यु दी गई है.
समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी 2007 को, 56 वर्षीय जेनेवीव लेर्मिट ने तीन से 14 साल के बीच के अपने पांच बच्चों की हत्या कर दी थी. उनका एक बेटा और चार बेटियां थीं. लेर्मिट अपने पिता के घर रह रही थीं और घटना के वक्त उनके पिता घर में नहीं थे.
मानसिक बीमारी से जूझ रही लेर्मिट ने सब्जी काटने वाले चाकू से बच्चों का गला रेतने के बाद खुद को भी चाकू से मारने की कोशिश की थी. लेकिन वो कई वार के बाद भी जब न मर सकीं तो उन्होंने आपातकालीन सेवाओं को कॉल कर दिया.
आजीवन कारावास की सजा
लेर्मिट को इस जघन्य अपराध के लिए 2008 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. उनके वकीलों ने तर्क दिया कि उनकी मुवक्किल मानसिक रूप से परेशान थीं और वो नियमित रूप से मनोचिकित्सक के संपर्क में थीं. इसलिए उन्हें जेल नहीं भेजा जाना चाहिए.
हालांकि, जूरी ने लेर्मिट को दोषी करार दिया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई. 2010 में लेर्मिट ने अपने पूर्व मनोचिकित्सक पर दीवानी मुकदमा भी दायर किया. लेर्मिट की तरफ से कहा गया कि उनके मनोचिकित्सक की लापरवाही की वजह से उनकी मानसिक स्थिति में सुधार नहीं हुआ और उन्होंने अपने बच्चों की हत्या की.
इसके हर्जाने के रूप में उन्होंने तीन मिलियन यूरो (26 करोड़ 10 लाख 63 हजार 832 रुपये) की मांग की. यह कानूनी लड़ाई 10 सालों तक चली जिसमें लेर्मिट का हार का सामना करना पड़ा.
जेल में अपनी सजा के दौरान लेर्मिट लगातार मानसिक परेशानियों से जूझती रहीं. इसे देखते हुए साल 2019 में उन्हें एक दिमागी बीमारी के इलाज वाले हॉस्पिटल में भेज दिया गया.
उनके वकील निकोलस कोहेन ने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल ने अपने बच्चों की हत्याओं की सोलहवीं बरसी पर इच्छामृत्यु की मांग की थी. लेर्मिट की इस इच्छा को पूरा कर दिया गया और मंगलवार को उन्हें मौत दे दी गई है.
बेल्जियम में इच्छामृत्यु कानूनी
बेल्जियम का कानून लोगों को इच्छामृत्यु चुनने की अनुमति देता है. कानून के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति असहनीय मनोवैज्ञानिक दर्द से पीड़ित है, जिसे कभी ठीक नहीं किया जा सकता तो, उसे इच्छामृत्यु दी जा सकती है. हालांकि, इसके लिए व्यक्ति इस काबिल होना चाहिए कि वो अपनी इच्छामृत्यु की इच्छा को तर्कपूर्ण और सुसंगत तरीके से व्यक्त कर सके.
मनोवैज्ञानिक एमिली मारोइट ने बताया कि लेर्मिट ने 28 फरवरी को अपने बच्चों के सम्मान में प्रतीकात्मक भाव में मरने का फैसला किया. मारोइट ने कहा, 'यह भी हो सकता है कि उसने जो शुरू किया उसे वो खत्म करना चाहती थी. क्योंकि मूल रूप से वो अपने बच्चों के साथ ही अपना जीवन समाप्त करना चाहती थी लेकिन पहले वो ऐसा कर नहीं सकी थी.'