बांग्लादेश में 2024 में छात्र आंदोलन के दौरान सड़कों पर जमकर हिंसक प्रदर्शन हुआ था. इस प्रदर्शन में कई छात्रों की जान चली गई थी. इसके बाद शेख हसीना को अपने मुल्क छोड़ भारत में शरण लेना पड़ा था. अब हिंसक सड़क प्रदर्शनों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल (ICT-BD) ने बड़ा फैसला सुनाया है.
इसमें ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के पूर्व कमिश्नर हबीबुर रहमान समेत तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को मौत की सजा दी गई है. तीन सदस्यीय न्यायाधीशों की पीठ, जिसका नेतृत्व जस्टिस मोहम्मद गोलाम मोर्तुजा मोजुमदार ने किया, ने यह फैसला सुनाया.
पूर्व संयुक्त पुलिस आयुक्त सुदीप कुमार चक्रवर्ती और अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद अख्तरुल इस्लाम भी मौत की सजा पाए अधिकारियों में शामिल हैं. यह सभी आरोपी ट्राइब्यूनल की कार्रवाई के बाद भगोड़े घोषित कर दिए गए थे, इसलिए मुकदमा उनकी अनुपस्थिति में चला.
ट्राइब्यूनल ने कहा कि ये अधिकारी अपने सबऑर्डिनेट्स पर कंट्रोल और आदेश देने की स्थिति में थे, इसलिए ‘सुपीरियर कमांड जिम्मेदारी’ के तहत दोषी ठहराए गए हैं. 5 अगस्त 2024 को ढाका के चंखारपुल इलाके में पुलिस की गोलीबारी में छह लोगों की मौत हुई थी, जिसकी जिम्मेदारी इन्हीं अधिकारियों पर लगी है.
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इसके अलावा, मामले में अन्य पुलिसकर्मियों को भी सजा सुनाई गई है. सहायक पुलिस आयुक्त मोहम्मद इमरुल को छह साल, इंस्पेक्टर अरशद हुसैन को चार साल, जबकि तीन कांस्टेबलों को तीन-तीन साल की सजा दी गई है. इनमें से कुछ दोषी अदालत में पेश भी हुए.
ICT-BD के मुख्य अभियोजक मोहम्मद ताजुल इस्लाम ने दी गई सजा को हल्का बताते हुए इसके खिलाफ अपील का संकेत दिया है. यह ट्राइब्यूनल पहले भी शेख हसीना और गृह मंत्री असदुज्जामान खान कमाल को मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सजा सुना चुका है. शेख हसीना अगस्त 2024 में भारत आ गई थीं और तब से भारत में रह रही हैं.