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'पूरा देश मेरा परिवार', मां खालिदा जिया की अंतिम विदाई के बाद तारिक रहमान का भावुक संदेश

80 वर्षीय खालिदा जिया को बुधवार को भावभीनी विदाई दी गई. इस दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच लाखों लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़े. लंदन में 17 वर्षों के आत्मनिर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे रहमान ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश जारी किया.

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बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान. (File Photo: PTI)
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान. (File Photo: PTI)

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान ने पूर्व प्रधानमंत्री और अपनी मां खालिदा जिया के अंतिम संस्कार के दौरान सहयोग और समर्थन के लिए मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस, अंतरिम सरकार के विभिन्न पदाधिकारियों, दक्षिण एशियाई देशों से आए गणमान्य व्यक्तियों और आम जनता का आभार व्यक्त किया है.

तारिक रहमान ने नागरिक और सैन्य संस्थानों, कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों, सार्वजनिक सेवकों और मीडिया कर्मियों की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि इन सभी ने पेशेवराना रवैये, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ खालिदा जिया को शांतिपूर्ण और गरिमामय अंतिम विदाई देने में अहम भूमिका निभाई.

बुधवार को 80 वर्षीय खालिदा जिया को भावभीनी विदाई दी गई. बीएनपी अध्यक्ष रहीं खालिदा जिया को संसद भवन के पास उनके पति और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की कब्र के बगल में पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफनाया गया. इस दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच लाखों लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़े.

17 साल बाद बांग्लादेश लौटे हैं तारिक रहमान

लंदन में 17 वर्षों के आत्मनिर्वासन के बाद 25 दिसंबर को बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि वह अपनी मां की उस विरासत को विनम्रता और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हैं, जिसमें उन्होंने अपना पूरा जीवन दूसरों की सेवा में समर्पित कर दिया.

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उन्होंने कहा, “मेरा हृदय गहरे शोक और कृतज्ञता से भरा है. जब मैंने अपनी मां, जो जीवन की मेरी पहली गुरु थीं, को उनके पिता के बगल में अंतिम विश्राम दिया, तो उनकी कमी का बोझ शब्दों से परे है. लेकिन बांग्लादेश की जनता की मौजूदगी ने इस कठिन क्षण में मुझे अकेला महसूस नहीं होने दिया.”

'मां को सीमाओं से परे भी सम्मान प्राप्त था'

तारिक रहमान ने अंतिम संस्कार में व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए दक्षिण एशियाई देशों के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ उन देशों, राजनयिकों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों का भी आभार जताया, जिन्होंने संवेदनाएं प्रकट कीं. उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों से विदेशी गणमान्य व्यक्ति अपने-अपने देशों की ओर से शोक संदेश व्यक्तिगत रूप से दे सके.

उन्होंने कहा, “उनकी मौजूदगी इस बात का प्रतीक है कि मेरी मां को सीमाओं से परे भी कितना सम्मान प्राप्त था.”

बांग्लादेश सेनाओं का भी आभार व्यक्त किया

रहमान ने बांग्लादेश थलसेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारियों व जवानों, सुरक्षा और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों, खुफिया तंत्र के सदस्यों तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कार्यालय और विभिन्न मंत्रालयों के कर्मचारियों का भी धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि सभी के समन्वय और सतर्क उपस्थिति से हर व्यवस्था बेहद संवेदनशीलता के साथ संपन्न हो सकी.

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उन्होंने देश-विदेश के मीडिया का भी आभार जताया, जिन्होंने कई वर्ग किलोमीटर में फैली विशाल भीड़ के बीच अंतिम संस्कार की घटनाओं का व्यापक कवरेज किया.

तारिक रहमान ने कहा कि मित्रों, पड़ोसियों, शुभचिंतकों और लाखों परिवारों से मिले प्रेम और सम्मान ने उन्हें गहराई से भावुक कर दिया. उन्होंने कहा कि इस जनसैलाब को देखकर उन्हें महसूस हुआ कि खालिदा जिया केवल उनकी मां नहीं थीं, बल्कि कई मायनों में पूरे राष्ट्र की मां थीं.

उन्होंने कहा, “आज, सबसे गहरे दुख के इस समय में, मुझे लगता है कि पूरा देश मेरा परिवार है.”

अपने संदेश के अंत में तारिक रहमान ने कहा, “मेरी मां ने निरंतर समर्पण के साथ अपना जीवन दूसरों की सेवा में लगाया. उस विरासत का बोझ मैं महसूस करता हूं और मैं उसे पूरी विनम्रता और प्रतिबद्धता के साथ निभाने का वादा करता हूं. जहां उनकी यात्रा थमी, वहां से मैं जनता के लिए उनके कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास करूंगा, जिनके विश्वास और प्रेम ने उन्हें अंतिम सांस तक संबल दिया.”

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