नेपाल और भारत के बीच हमेशा से आसान संबंध रहे हैं. इतने आसान कि दोनों देशों के बीच स्पष्ट सीमा रेखा होने के बावजूद लोगों की आवाजाही का सिलसिला तो रहा ही है, सामानों का भी आयात-निर्यात होता रहा है. इसका सबसे बड़ा फायदा नेपाल के नागरिकों को मिला, जो भारतीय सीमा के बाजारों से किराना, दवाइयां, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स और शादी-ब्याह का सामान खरीदते रहे हैं.
नेपाल में नई सरकार बनने से बदला हाल
इन सामानों को नेपाल ले जाने में कभी कोई बड़ी दिक्कत नहीं होती थी, लेकिन अब हालात बदल गए हैं. प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) की सरकार ने लंबे समय से नजरअंदाज किए जा रहे कस्टम नियमों को सख्ती से लागू करना शुरू किया है, जिससे देश में विरोध शुरू हो गया है. खास बात यह है कि पद संभालने के एक महीने के भीतर ही उन्हें इस फैसले पर विरोध का सामना करना पड़ रहा है.
नेपाल के लोगों के लिए सस्ते साबित होते हैं भारतीय बाजार
नेपाल के लोगों के लिए भारतीय सामान स्थानीय बाजारों की तुलना में सस्ता पड़ता है, लेकिन अब सीमा से लगे इलाकों में रहने वाले लोग बालेन सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. भारत-नेपाल सीमा दुनिया की सबसे खुली अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में से एक मानी जाती है. बालेन शाह सरकार ने भारत से लाए जाने वाले 100 नेपाली रुपये (करीब 63 भारतीय रुपये) से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य कर दी है. सामान के प्रकार के आधार पर यह ड्यूटी 5% से लेकर 80% तक हो सकती है.
क्या कह रहे हैं प्रदर्शनकारी?
एक प्रदर्शनकारी ने समाचार एजेंसी ANI से कहा, 'जन्म से लेकर मृत्यु तक होने वाले सभी संस्कारों के लिए हम यहां (नेपाल) में भारत से सामान लाते हैं. यहां तक कि खाद भी, जो कभी-कभी नेपाल सरकार समय पर उपलब्ध नहीं करा पाती. अब हालात ऐसे हो गए हैं जैसे अघोषित नाकेबंदी हो.'
यह विरोध प्रदर्शन नेपाल के सीमावर्ती शहर बीरगंज और राजधानी काठमांडू में भी देखने को मिला. बॉर्डर एरिया के पास रहने वाले लोगों का कहना है कि वे रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारत पर काफी निर्भर हैं और इस फैसले से उन पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा.
सोशल मीडिया पर वायरल हैं विरोध के वीडियो
सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें लोग नेपाल के सुरक्षा कर्मियों और कस्टम अधिकारियों से बहस करते दिख रहे हैं. नेपालगंज में एक महिला को बच्चों के लिए लाए गए चिप्स के कुछ पैकेट ले जाने से रोका गया और जब्त करने की बात कही गई. इस पर महिला ने नाराजगी जताते हुए कहा, 'पहले नेपाल की दुकानों में बिक रहे भारतीय सामान को रोकिए, फिर हम पर कार्रवाई कीजिए.'
नेपाल पुलिस के एक अधिकारी ने इस पर कहा कि वे केवल आदेशों का पालन कर रहे हैं.
दरअसल, 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी का नियम नया नहीं है, लेकिन अब इसे सख्ती से लागू किया जा रहा है. नेपाल सरकार का कहना है कि बॉर्डर एरिया के लोग लगातार भारत जाकर खरीदारी करते हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों को नुकसान हो रहा है और सरकार को राजस्व का घाटा हो रहा है. इसलिए रेवेन्यू लीक और अवैध आयात को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है.
कस्टम ड्यूटी पर हो रहा पॉलिटिकल विवाद
नेपाल के कस्टम विभाग के सूचना अधिकारी पुण्य बिक्रम खड़का के अनुसार, भारतीय बाजारों से लाए गए 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर अब शुल्क लिया जाएगा. हालांकि, इस फैसले ने नेपाल में राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है. नेपाली कांग्रेस ने इसे "जनविरोधी और असंवेदनशील" बताते हुए तुरंत वापस लेने की मांग की है. वहीं, बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के कुछ नेताओं ने भी इसे अव्यावहारिक बताया है.
RSP के नेता राजीव झा ने कहा, 'मौजूदा महंगाई के दौर में 100 नेपाली रुपये की सीमा बेहद कम और अव्यावहारिक है,' और सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की. कुल मिलाकर, बालेन शाह सरकार का यह फैसला आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है और इसी वजह से नेपाल में बड़े स्तर पर विरोध देखने को मिल रहा है.
रिपोर्ट- अविनाश कटील