अमेरिकी रॉक क्लाइंबर एलेक्स होनोल्ड ने रविवार को ताइवान की राजधानी ताइपेई में स्थित मशहूर ताइपेई 101 गगनचुम्बी इमारत की चढ़ाई बिना किसी रस्सी या सुरक्षा उपकरण के पूरी की. ये ऐतिहासिक रहा. इससे पहले ऐसा कोई भी करके नहीं दिखाया है. लगभग 90 मिनट की कड़ी मेहनत के बाद, 508 मीटर (1,667 फुट) ऊंचाई वाले इस टावर की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचते ही नीचे मौजूद दर्शकों ने जोरदार उत्साह से तालियां बजाईं. लाल शर्ट पहने हॉनोल्ड ने अपनी बांहें सिर के ऊपर लहराकर अपनी खुशी व्यक्त की.
होनोल्ड ने कहा, "यह नजारा अद्भुत था, कितना सुंदर दिन था. हवा तेज थी. मैं संतुलन बनाए रखने की पूरी कोशिश कर रहा था. लेकिन वास्तव में यह स्थिति अविश्वसनीय थी और ताइपेई को देखने का यह तरीका बेहद सुंदर था."
होनोल्ड पहले भी अपने साहसिक और जोखिम भरे प्रयासों के लिए जाने जाते हैं, खासकर यॉसेमाइट नेशनल पार्क के एल कैपिटन पर बिना रस्सी के चढ़ाई के लिए.
ताइपेई 101 पर उन्होंने एक कोने से शुरुआत की जहां छोटे L-आकार के खांचे उन्हें पैर जमाने में मदद करते रहे. लंबी चढ़ाई के दौरान उन्हें टावर पर स्थित कुछ बड़े सजावटी हिस्सों के चारों ओर चढ़ना पड़ा, जिन्हें उन्होंने अपने बाहों की ताकत से संभाला.
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ताइपेई 101 की शेप को खास बनाने वाले "बांस के डिब्बे" कहलाने वाले मध्य सेक्शन के 64 फ्लोर सबसे चुनौतीपूर्ण थे. वे आठ सेक्शन में विभाजित हैं, हर खंड में आठ मंजिलें हैं जिनमें खड़ा और झुका हुआ चढ़ाई है. होनोल्ड ने बीच-बीच में बालकनी पर आराम लिया.
यह घटना नेटफ्लिक्स पर लाइव प्रसारित की गई, हालांकि बारिश के चलते इसे एक दिन के लिए स्थगित करना पड़ा था. आमतौर पर होनोल्ड दूर-दराज के इलाकों में चढ़ाई करते हैं, इसलिए इतनी भीड़ देखकर उन्हें शुरुआत में थोड़ा अजीब लग रहा था, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि यह अनुभव त्योहार जैसा बन गया, क्योंकि लोग उनका उत्साह बढ़ा रहे थे.
ताइपेई 101 पर पहली बार 2004 में फ्रांसीसी क्लाइंबर आलैन रॉबर्ट ने रस्सी की मदद से चढ़ाई की थी, लेकिन हॉनोल्ड बिना किसी सुरक्षा उपकरण के चढ़ने वाले पहले व्यक्ति बने हैं. उनकी इस उपलब्धि ने साहस और मानव क्षमता की नई मिसाल कायम की है.