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विश्व

सुलेमानी की मौत का क्या खतरनाक होगा अंजाम, क्यों सहम गई है पूरी दुनिया?

सुलेमानी की मौत का क्या खतरनाक होगा अंजाम, क्यों सहम गई है पूरी दुनिया?
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अमेरिकी हमले में ईरान की कुद्स सेना के प्रमुख मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद एक बार फिर तीसरे विश्व युद्ध की आशंका जताई जा रही है. मेजर जनरल कासिम सुलेमानी को ईरान के सुप्रीम लीडर अयोतुल्लाह खमनेई के बाद देश का दूसरा सबसे ताकतवर शख्स कहा जाता था. जनरल सुलेमानी की मौत ईरान के लिए एक बहुत बड़े झटके की तरह है और वह इसका बदला लेने की चेतावनी जारी कर चुका है.

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अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद बगदाद एयरपोर्ट पर एयर स्ट्राइक की गई और तेहरान के शीर्ष सैन्य कमांडर को मार गिराया गया. अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा कि सुलेमानी इराक व मध्य-पूर्व क्षेत्र में अमेरिकी राजदूतों पर हमले की साजिश रच रहा था इसलिए अमेरिका ने विदेशों में बसे अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुलेमानी को मार गिराने का फैसला किया.

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अमेरिका ने अपने नागरिकों को इराक तुरंत छोड़ने की चेतावनी भी जारी कर दी है. दूसरी तरफ, ईरान के सुप्रीम लीडर अयोतुल्लाह अली खमनेई ने भी सुलेमानी की मौत के दोषियों से बदला लेने की प्रतिज्ञा ली है.
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अमेरिका के पूर्व राजदूत ब्रेट मैकगर्क ने एमएसएनबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा, "सुलेमानी की मौत से भले ही न्याय करने की कोशिश की गई हो लेकिन अमेरिकियों को यह भी समझ लेने की जरूरत है कि हम ईरान के साथ युद्ध के चरण में पहुंच चुके हैं."
सुलेमानी की मौत का क्या खतरनाक होगा अंजाम, क्यों सहम गई है पूरी दुनिया?
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ईरान और अमेरिका के बीच पिछले कुछ सालों से तनाव बरकरार है लेकिन जनरल सुलेमानी की हत्या के बाद मध्य-पूर्व में युद्ध छिड़ने की आशंका प्रबल हो गई है. अगर युद्ध छिड़ता है तो इसमें केवल अमेरिका और ईरान ही शामिल नहीं होंगे बल्कि अमेरिका के सहयोगी इजरायल-सऊदी और ईरान के सहयोगी देश भी आगे बढ़कर लड़ाई में हिस्सा लेंगे.

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एएफपी एजेंसी के मुताबिक, ईरान समर्थित लेबनान के मिलिटेंट समूह हेजबुल्लाह ने सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए दुनिया भर में 'प्रतिरोध आंदोलन' चलाने का ऐलान कर दिया है. लेबनान के हेजबुल्लाह संगठन के नेता सैय्यद हसन नसरल्लाह ने कहा, ''जनरल सुलेमानी की हत्या जैसे बड़े अपराध करके अमेरिका मध्य-पूर्व में अपने मकसदों को कभी पूरा नहीं कर पाएगा.''
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ईरान के सरकारी चैनल ने ट्रंप के सुलेमानी को मारने के आदेश को दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका की सबसे बड़ी भूल करार दिया. सरकारी चैनल ने कहा कि अब ईरान के लोग अमेरिकियों को यहां नहीं रहने देंगे.
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अमेरिका के शिया सशस्त्र बलों के मामलों के जानकार फिलिप स्मिथ ने एएफपी एजेंसी से कहा कि 2011 में अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन और 2019 में इस्लामिक स्टेट के अबु बक्र अल बगदादी के खिलाफ अमेरिकी ऑपरेशनों की तुलना में सुलेमानी की मौत के ज्यादा खतरनाक अंजाम होंगे.
सुलेमानी की मौत का क्या खतरनाक होगा अंजाम, क्यों सहम गई है पूरी दुनिया?
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स्मिथ ने कहा, रक्षात्मक मामलों में यह अमेरिका की अब तक की सबसे बड़ी स्ट्राइक है. इसकी कोई तुलना ही नहीं की जा सकती है.
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इससे पहले मंगलवार को इराक में अमेरिकी दूतावास पर रॉकेट से हमला हुआ था. ट्रंप ने हमलों के लिए ईरान को दोषी ठहराया था और कहा था, "वे इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकाएंगे, ये चेतावनी नहीं बल्कि धमकी है. सुलेमानी की मौत को अब इसी घटना की प्रतिक्रिया में कार्रवाई के तौर पर भी देखा जा रहा है. गुरुवार को अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा था कि ईरान समर्थित समूहों से कई हमले हो सकते हैं लेकिन अमेरिकी सेना इसका बदला लेकर रहेगी.

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अमेरिका के 2015 में ईरान के साथ न्यूक्लियर डील से बाहर होने के बाद से ही ईरान-अमेरिका के बीच भारी तनाव है. अमेरिका ने न्यूक्लियर डील से बाहर होने के बाद ईरान पर तमाम तरह के प्रतिबंध थोप दिए जिसके बाद उसकी अर्थव्यवस्था पर बेहद बुरा असर पड़ा है. पिछले एक साल में सऊदी व मध्य-पूर्व में तमाम तेल टैंकों पर हमले भी हुए जिसके लिए अमेरिका ईरान को जिम्मेदार ठहराता रहा है. जून महीने में जब ईरान ने अमेरिका के बेहद ताकतवर और महंगे सर्विलांस ड्रोन को मार गिरा दिया तो ट्रंप ने ईरान पर हमले के लिए हरी झंडी दे दी थी हालांकि, ऐन मौके पर उन्होंने अपना फैसला वापस ले लिया और कहा कि इससे कई मासूमों की जानें चली जातीं. हालांकि, अब ये वक्त ही बताएगा कि इस बार भी ईरान और अमेरिकी के नेता मिलकर संघर्ष रोक पाते हैं या नहीं.
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