अमेरिका ने शुक्रवार सुबह को बगदाद एयरपोर्ट पर एयर स्ट्राइक कर ईरान की कुद्स बल के प्रमुख जनरल कासिम सुलेमानी को मार गिराया. मेजर जनरल सुलेमानी की मौत के बाद अमेरिका और ईरान में टकराव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. ईरान के सुप्रीम नेता अयोतुल्लाह खमनेई ने सुलेमानी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों से बदला लेने का ऐलान कर दिया है. वहीं, अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन ने बयान में कहा कि ये हमला विदेशों में रह रहे अमेरिका नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान के हमलों को रोकने के लिए किया गया है. बता दें कि मंगलवार को ही बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर हमला हुआ था.
ईरान ने सुलेमानी की मौत पर तीन दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित कर दिया है. आइए
जानते हैं मेजर जनरल सुलेमानी के बारे में जिसकी हत्या ने पूरे मध्य-पूर्व
में 'तूफान' ला दिया है.
सुलेमानी को ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स की विदेशी शाखा कुद्स सेना के प्रमुख के तौर पर दुनिया भर में ख्याति मिली हुई थी. सुलेमानी को सीरिया और इराक की लड़ाइयों में अहम भूमिका के लिए खास तौर पर जाना जाता था.
एक तरफ जहां ईरान के क्षेत्रीय दुश्मन सऊदी अरब व इजरायल उसे मध्य-पूर्व में आगे बढ़ने से रोकने के लिए पूरी ताकत लगा रहे थे तो दूसरी तरफ अमेरिका ईरान के खिलाफ तमाम कार्रवाई करता रहा. हालांकि, इन सारी कोशिशों के बीच मध्य-पूर्व क्षेत्र में ईरान का प्रभाव बढ़ाने में मेजर जनरल सुलेमानी ने अहम भूमिका अदा की. यही वजह थी कि वह अमेरिका व इजरायल-सऊदी की नजरों में चढ़ गए.
पिछले 20 सालों में अमेरिका, इजरायल और अरब एजेंसियों ने सुलेमानी को मारने के लिए तमाम प्रयास किए लेकिन वह हर बार बचते रहे. सुलेमानी की सेना को ईरान की सीमाओं के बाहर ऑपरेशनों का जिम्मा मिला हुआ था. जब सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद 2011 से जारी गृह युद्ध में हार के करीब पहुंचते नजर आ रहे थे तो सुलेमानी की कुद्ज फोर्स ने ही उनके लिए समर्थन जुटाया. सुलेमानी ने इराक में इस्लामिक स्टेट को हराने में लगे सशस्त्र बलों की भी मदद की थी.
सुलेमानी 1998 में ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख बनाए गए थे. वह सालों तक लो प्रोफाइल रहते हुए ईरान के अन्य देशों के प्रॉक्सी संगठनों के साथ संबंध मजबूत करने में लगे रहे. सुलेमानी लेबनान में हेजोबुल्लाह, सीरिया के असद और इराक में शिया समर्थित मिलिशिया समूहों के साथ ईरान की करीबी बढ़ाने में कामयाब रहे. पिछले कुछ सालों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयोतुल्लाह अली खमेनई व अन्य शिया नेताओं के साथ नजर आने के बाद सुलेमानी सुर्खियों में आ गए.
सुलेमानी के नेतृत्व में ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड बेहद ताकतवर बन गई और इसने ईरान की सीमाओं के बाहर अपने इंटेलिजेंस, आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव को अभूतपूर्व तरीके से बढ़ा लिया. यहां तक कि वर्तमान में ईरान की मुख्य फौज से ज्यादा ताकतवर ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड को माना जाता है.
सुलेमानी का जन्म पूर्वी ईरान के एक गरीब परिवार में हुआ था. अपने परिवार को चलाने के लिए सुलेमानी ने 13 साल की उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था. वह ईरान के सुप्रीम लीडर खमेनई के भाषणों को ध्यान से सुनते थे. फॉरेन पॉलिसी मैगजीन के मुताबिक, 1979 में ईरानी क्रांति के दौरान सुलेमानी ने 6 हफ्तों की ट्रेनिंग लेकर ईरान के अजरबैजान प्रांत में पहली बार जंग लड़ी. ईरान-इराक के युद्ध के बाद सुलेमानी राष्ट्रीय हीरो बनकर उभरे.
इराक और सीरिया में बनाया प्रभाव-
2005 में इराक में नई सरकार के गठन के बाद सुलेमानी का इराक की राजनीति में दखल और बढ़ गया. इसी दौरान शिया राजनीतिक पार्टी और पैरामिलिट्री फोर्स बद्र संगठन को सरकार का अंग बना दिया गया. बद्र संगठन को इराक में ईरान की सबसे पुरानी प्रॉक्सी फोर्स कहा जाता है. 2011 में जब सीरिया में गृहयुद्ध छिड़ा तो सुलेमानी ने अपनी इराकी प्रॉक्सी फोर्स को सीरिया में असद सरकार का बचाव करने भेजा. बता दें कि तत्कालीन अमेरिकी सरकार सीरिया से बशर अल हसद को सत्ता से बाहर करना चाहती थी.
सुलेमानी को ईरान का दूसरा सबसे ताकतवर शख्स भी कहा जाने लगा था. 2019 में जब ईरान के सुप्रीम लीडर खमनेई ने सुलेमानी को देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान से नवाजा तो सेना में उनकी बढ़ती ताकत का अंदाजा हो गया था. 1979 में इस्लामिक गणराज्य ईरान की स्थापना के बाद पहली बार किसी कमांडर को यह सम्मान दिया गया था.
इराक के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने विदेशी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, "सुलेमानी केवल सेना में काम करता हुआ एक सैनिक भर नहीं है. वह सैन्य मोर्चे की जांच करने के लिए जाते हैं और जंग का जिम्मा संभालते हैं. उन्हें कमांड सिर्फ ईरान के सुप्रीम लीडर देते हैं. अगर उन्हें पैसे की जरूरत होती है तो उन्हें तुरंत पैसा मिल जाता है. हथियार मांगने पर तुरंत हथियार मुहैया कराए जाते हैं, वह जो कुछ भी मांगते हैं, उन्हें सब मिल जाता है."
अमेरिका की नाक में कर दिया था दम
अमेरिका ने 2019 में ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स को विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर दिया था. अमेरिका को जवाब देते हुए सुलेमानी ने कहा था कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह का समझौता सरेंडर करना होगा.
सुलेमानी कुद्स फोर्स द्वारा किए गए सभी सैन्य ऑपरेशनों के अलावा इंटेलिजेंस भी जुटाते थे. 2018 में उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चुनौती दे डाली थी. उन्होंने कहा था, "मिस्टर ट्रंप मैं आपको बता रहा हूं कि हम आपके करीब पहुंच गए हैं, हम वहां पहुंच चुके हैं जिसके बारे में आपको अंदाजा भी नहीं है. युद्ध भले ही शुरू आप करेंगे लेकिन खत्म हम करेंगे."
सीरिया में ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स पर तमाम एयर स्ट्राइक को अंजाम दिया जा चुका है. अगस्त महीने में इजरायल ने रिवॉल्यूशनरी गार्ड पर ड्रोन अटैक की योजना बनाने का आरोप लगाया था. इजरायली मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के विदेश मंत्री काट्ज ने बयान दिया था कि वे सुलेमानी को समूल नष्ट करने को लेकर काम कर रहे हैं.
अक्टूबर महीने में तेहरान ने बताया था कि उसने इजरायली और अरब एजेंसी ने सुलेमानी को मारने की कोशिश की लेकिन उन्होंने इसे नाकाम कर दिया.