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विश्व

अजरबैजान की मदद के लिए सीरियाई फाइटर भेजने के दावे पर भड़का टर्की

Armenia
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टर्की ने आर्मीनिया और अजरबैजान की लड़ाई में सीरियाई फाइटर्स भेजने की रिपोर्ट्स को खारिज किया है. नागोर्नो-काराबाख इलाके को लेकर आर्मीनिया-अजरबैजान की जंग में टर्की अजरबैजान का खुलकर समर्थन कर रहा है. हालांकि, टर्की ने कहा है कि आर्मीनिया टर्की के बारे में फर्जी प्रोपेगैंडा फैलाने की कोशिश कर रहा है.

Azerbaijan-Armenia Conflict
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रूस में आर्मीनियन राजदूत ने कहा था कि टर्की ने उत्तरी सीरिया के 4000 फाइटर्स अजरबैजान भेजे हैं और वे नागोर्नो-काराबाख इलाके में चल रही जंग में शामिल हो रहे हैं. दो सीरियाई लड़ाकुओं ने भी समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि टर्की अजरबैजान की मदद के लिए अपने सहयोगी लड़ाकुओं को भेज रहा है.
 

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हालांकि, टर्की ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि वो अजरबैजान की सैन्य मदद नहीं कर रहा है, बल्कि उसका समर्थन सिर्फ नैतिक है. हालांकि, अगर अजरबैजान मदद मांगता है तो वह पूरी तरह से तैयार है.

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अजेरी और आर्मीनियाई सेना के बीच हुए संघर्ष में अब तक दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हैं. आर्मीनिया ने मंगलवार को टर्की पर आर्मेनियाई वॉरप्लेन गिराने का आरोप लगाया. हालांकि, अजरबैजान और टर्की दोनों ने ही इस आरोप का खंडन कर दिया.

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टर्की राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दवान के प्रवक्ता ओमर चेलिक ने एक न्यूज कॉन्फ्रेंस में बताया, टर्की के वॉरप्लेन गिराने की बात बिल्कुल सच नहीं है, ये झूठ है. ये दावा भी गलत है कि टर्की ने वहां जिहादी भेजे हैं. दोनों बातें ही बिल्कुल झूठी हैं.
 

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उन्होंने कहा कि येरवन (आर्मीनिया की राजधानी) अपनी दुश्मनी की भावना पर पर्दा डालने के लिए ऐसे बयान दे रहा है और टर्की की आड़ में प्रोपेगैंडा फैलाने की कोशिश कर रहा है.

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टर्की ने कहा है कि वह टर्किस अजरबैजान को पूरा समर्थन देगा. फिलहाल, दोनों देशों के बीच संघर्ष नागोर्नो-काराबाख इलाके को लेकर है. ये इलाका आधिकारिक तौर पर अजरबैजान का हिस्सा है लेकिन यहां आर्मीनियाई मूल के लोग ज्यादा हैं और यहां कब्जा भी आर्मीनिया का है. टर्की का कहना है कि जब तक आर्मीनिया अजरबैजान की क्षेत्रीय संप्रुभता का सम्मान करते हुए इस इलाके पर अपना कब्जा नहीं छोड़ देता, तब तक कोई शांति वार्ता संभव नहीं है. इससे पहले भी इस इलाके को लेकर आर्मीनिया-अजरबैजान के बीच जंग छिड़ चुकी है.

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टर्की के विदेश मंत्री मेवलूत कावोसोगलु ने मंगलवार को कहा कि टर्की बातचीत की मेज पर या फिर जंग के मैदान में अजरबैजान के साथ खड़ा है. वहीं, मध्यस्थता कर रहे रूस का कहना है कि सभी पक्षों को इस संघर्ष को शांत कराने में मदद करनी चाहिए.

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टर्की और अजरबैजान के बीच गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ते रहे हैं. यहां तक कि टर्की और अजरबैजान अपने रिश्ते को "दो राज्य, एक राष्ट्र" से परिभाषित करते हैं. अजरबैजान में भी तुर्क हैं और दोनों के बीच जातीय और भाषीय समानता बहुत ज्यादा है. इसके अलावा, टर्की पहला ऐसा देश था जिसने सोवियत के पतन के बाद 1991 में स्वतंत्र अजरबैजान को मान्यता दी थी. तेल से समृद्ध अजरबैजान टर्की के लिए ऊर्जा संसाधनों के नजरिए से भी काफी अहमियत रखता है. टर्की में अजरबैजान का काफी निवेश भी है.

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दूसरी तरफ, टर्की के आर्मीनिया के साथ कूटनीतिक रिश्ते नहीं है. साल 1993 में नागोर्नो-काराबाख में अजरबैजान के साथ एकजुटता दिखाने के लिए उसने आर्मीनिया के साथ अपनी सीमाएं बंद कर दी थीं. आर्मीनिया और टर्की के संबंध पहले से ही अच्छे नहीं थे. एक शताब्दी पहले, ऑटोमन साम्राज्य ने आर्मीनिया में भयंकर नरसंहार किया. इस नरसंहार को 20वीं सदी का पहला नरसंहार भी कहा जाता है. हालांकि, टर्की नरसंहार के आरोप को खारिज करता है.

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टर्की की सेना दशकों से अजरबैजान के अधिकारियों को प्रशिक्षण देती रही है. अगस्त महीने में, टर्की की सेना ने अजरबैजान में बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास आयोजित किया. रूस और इजरायल के बाद, टर्की अजरबैजान का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता देश है. जर्मन मार्शल फंड के अंकारा डायरेक्टर ओजगुर उनलुहिसार्किली के मुताबिक, टर्की ने अजरबैजान को ड्रोन्स और रॉकेट लॉन्चर भी बेचे. उनका कहना है कि टर्की ने मौजूदा जंग में भी अजरबैजान की मदद के लिए सैन्य ड्रोन ऑपरेटर्स भेजे हैं.