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तोप,वॉरप्लेन ले भिड़ गए दो देश, जानें अर्मेनिया-अजरबैजान में दुश्मनी का कारण

दो देशों में छिड़ी जंग
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नागोर्नो-काराबाख इलाके के विवादित जमीन को लेकर अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच जंग छिड़ गई है और दोनों देशों की सेना आमने सामने हैं. 4400 वर्ग किलोमीटर में फैले नागोर्नो-काराबाख इलाके पर कब्जे को लेकर दोनों देशों के बीच लड़ाई शुरू हो गई है. (तस्वीरें- सोशल मीडिया)

दो देशों में छिड़ी जंग
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अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच शुरू हुई जंग में अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है. दोनों देशों ने एक दूसरे के खिलाफ सीमा पर टैंक-तोप के साथ अपने सैनिकों को उतार दिया है और दोनों ओर से गोलाबारी हो रही है. युद्ध की वजह से अर्मेनिया ने अपने देश में मार्शल लॉ लागू कर दिया है.

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अर्मेनिया के दावा के मुताबिक उसने युद्ध के शुरुआती समय में ही अजरबैजान के दो फाइटर हेलिकॉप्टर को मार गिराया है जबकि दो युद्ध टैकों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया. दोनों देशों के बीच जारी तनाव और युद्ध को खत्म करने के लिए रूस ने उनसे तुरंत युद्धविराम करने की अपील की है.
 

दो देशों में छिड़ी जंग
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दरअसल ये पूरी जंग 4400 वर्ग किलोमीटर के नागोर्नो काराबाख इलाके पर कब्जे को लेकर हो रही है. नागोर्नो काराबाख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अजरबैजान का हिस्सा माना जाता है लेकिन इस पर अर्मेनिया के जातीय गुटों ने कब्जा कर रखा है. तनाव 2018 में शुरू हुआ था, जब दोनों सेना ने बॉर्डर से सटे इलाके में अपनी सैनिकों की संख्या बढ़ा दी थी. अब ये तनाव युद्ध का रूप ले चुका है. यूरोप के कई देशों ने दोनों देशों से शांति की अपील की है.

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मौजूदा वक्त में ये इलाके यूं तो अज़रबैजान में पड़ता है, लेकिन यहां अर्मेनिया के हिस्से के लोग अधिक हैं ऐसे में अर्मेनिया की सेना ने इसे अपने कब्जे में लिया हुआ है. करीब चार हजार वर्ग किमी का ये पूरा इलाका पहाड़ी है, जहां तनाव की स्थिति बनी रहती है. 

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1991 में  नागोर्नो के लोगों ने इस हिस्से को अजरबैजान से स्वतंत्र घोषित करते हुए अर्मेनिया का हिस्सा बना लिया था तब से दोनों देशों के बीच यह विवाद बना हुआ है और संघर्ष होते रहे हैं.

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प्रथम विश्व युद्ध के बाद साल 1918 और 1921 में अर्मेनिया और अजरबैजान आजाद हुए थे. ये दोनों ही देश 1922 में सोवियत यूनियन का हिस्सा बन गए थे. रूस के नेता जोसेफ स्टालिन ने अजरबैजान के एक हिस्सों को आर्मेनिया को दे दिया था जो पहले अजरबैजान के कब्जे में था. तभी से दोनों देशों के बीच यह विवाद बना हुआ है.