पश्चिम बंगाल ने विधानसभा चुनाव के इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. चुनाव आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल ने आजादी के बाद से अब तक किसी भी राज्य के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा वोटर टर्नआउट का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. इस मामले में बंगाल ने त्रिपुरा को पीछे छोड़ दिया है.
इससे पहले 1 मई को जारी अस्थायी आंकड़ों में राज्य में 92.67 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था, जो उस समय भी राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा मतदान प्रतिशत माना गया था. अंतिम आंकड़ों में यह बढ़कर 93.71 प्रतिशत पहुंच गया.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पश्चिम बंगाल में इससे पहले सबसे ज्यादा मतदान 2013 के विधानसभा चुनाव में हुआ था, जब 84.72 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने वोट डाले थे. इस बार का मतदान प्रतिशत पिछले रिकॉर्ड से काफी अधिक रहा, जो राज्य में मतदाताओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी को दर्शाता है.
पूर्वोत्तर राज्यों में लंबे समय से ऊंचे मतदान प्रतिशत का ट्रेंड रहा है. त्रिपुरा, नगालैंड और मणिपुर में कई बार विधानसभा चुनावों में 90 प्रतिशत से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया है. लेकिन इस बार पश्चिम बंगाल ने इन सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया.
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, महिलाओं की भागीदारी भी इस चुनाव में बेहद अहम रही. पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान में 92.69 प्रतिशत महिला मतदाताओं ने मतदान किया, जबकि पुरुषों का मतदान प्रतिशत 90.92 रहा. यह दिखाता है कि राज्य में महिला मतदाता बड़ी संख्या में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा ले रही हैं.
इसी तरह तमिलनाडु में भी रिकॉर्ड मतदान हुआ. राज्य में 84.69 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो 2011 के 78.29 प्रतिशत के पुराने रिकॉर्ड से अधिक है. तमिलनाडु में महिलाओं की भागीदारी 85.76 प्रतिशत रही, जबकि पुरुषों की 83.57 प्रतिशत.
वहीं असम और पुडुचेरी ने भी अपने-अपने इतिहास का सबसे अधिक मतदान दर्ज किया. असम में 85.38 प्रतिशत और पुडुचेरी में 89.83 प्रतिशत मतदान हुआ.
चुनाव आयोग के अनुसार, पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान कराया गया था और राज्य में करीब 3.6 करोड़ मतदाता थे. वहीं तमिलनाडु में 234 सीटों पर एक चरण में मतदान हुआ, जहां कुल 5.73 करोड़ मतदाता थे.