पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी फुल एक्शन में हैं. 20 मई यानी बुधवार को वो अपने पहले नॉर्थ बंगाल दौरे पर पहुंचे. इस दौरान सिलीगुड़ी में उन्होंने एक बड़ी मीटिंग की. यहां उन्होंने इलाके के लोगों के लिए तोहफों का पिटारा खोल दिया. दरअसल, सीएम शुभेंदु ने यहां कई बड़े एलान किए. अब नॉर्थ बंगाल में एम्स (AIIMS), आईआईटी (IIT) और आईआईएम (IIM) खुलेंगे. इसके साथ ही उन्होंने चाय बागान के लाखों मजदूरों के लिए भी बड़े फैसले लिए हैं. इस दौरे से नॉर्थ बंगाल की तस्वीर कैसे बदलेगी? आइए समझते हैं.
आपको बता दें कि 9 मई को पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी और शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. सरकार बनने के बाद नॉर्थ बंगाल का उनका यह पहला आधिकारिक दौरा था, जिसे लेकर लोगों में काफी उम्मीदें थीं. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इस अहम बैठक के बाद दार्जिलिंग के बीजेपी सांसद राजू बिष्ट ने बताया कि मुख्यमंत्री का सबसे ज्यादा ध्यान इस क्षेत्र के विकास, स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने और यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति को सुधारने पर है.
इस मेगा प्लान के तहत नॉर्थ बंगाल के अलग-अलग जिलों में बड़े राष्ट्रीय स्तर के संस्थान बनाए जाएंगे. अब यहां के लोगों को इलाज के लिए कोलकाता या दिल्ली नहीं भागना पड़ेगा, क्योंकि यहां एक शानदार AIIMS के साथ-साथ एक बड़ा कैंसर अस्पताल भी खोला जाएगा. पढ़ाई-लिखाई के मामले में भी यह इलाका अब बहुत आगे निकलने वाला है, क्योंकि सरकार ने यहां एक IIT और एक IIM बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. सीएम शुभेंदु ने साफ आदेश दिया है कि इन सभी बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए सरकारी दफ्तर बिना किसी देरी के तुरंत एनओसी (NOC) जारी करें.
चाय बागान मजदूरों के लिए सुधार पर जोर
नॉर्थ बंगाल में चाय के बागान यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. करीब 5 लाख लोग सीधे तौर पर और 20 लाख लोग अप्रत्यक्ष रूप से इन बागानों से रोजी-रोटी कमाते हैं. सीएम शुभेंदु ने इन मजदूरों की भलाई के लिए बहुत बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया है कि असम में चाय बागान मजदूरों के कल्याण के लिए जो मॉडल चल रहा है, उसका पूरा अध्ययन करें ताकि उसे यहां भी लागू किया जा सके. इसके अलावा, पिछले 3 साल से अटकी केंद्र सरकार की चाय श्रमिक योजना को भी तुरंत लागू करने का आदेश दिया गया है, जिसे टीएमसी ने रोक रखा था. इसके तहत मजदूरों का करीब 350 करोड़ रुपये का बकाया फायदा उन्हें जल्द मिलेगा. सबसे बड़ी बात यह है कि बागानों में रहने वाले मजदूरों को उनकी जमीन का मालिकाना हक भी दिया जाएगा और पुरानी सरकार की कल्याणकारी योजनाएं भी चालू रहेंगी.
रोजगार के मोर्चे पर भी सीएम ने एक बहुत बड़ा बदलाव किया है. अब तक राज्य में मनरेगा के तहत 100 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलती थी, लेकिन जून के महीने से सरकार एक नई योजना 'VB G RAM G' शुरू करने जा रही है. इसके तहत अब लोगों को साल में 125 दिनों के काम की गारंटी मिलेगी. इसके साथ ही बांग्लादेश और नेपाल के बॉर्डर के पास के इलाकों में विकास कार्यों के लिए खास मुहिम चलाई जाएगी. बांग्लादेश बॉर्डर पर फेंसिंग (बाड़) लगाने के लिए जमीन भी अलॉट कर दी गई है.
सीएम ने साफ कर दिया है कि इलाके में किसी भी अवैध गतिविधि को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष के मुताबिक, सीएम ने प्रशासन को बिना किसी डर के काम करने की छूट दी है. साथ ही भरोसा दिया है कि पिछले 15 सालों के टीएमसी शासन के दौरान राजनीतिक हिंसा में जान गंवाने वाले बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी.
कुल मिलाकर यह दौरा उत्तर बंगाल के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर खास फोकस दिखाई दिया.