महाकुंभ में एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला जहां एक बहू ने अपनी सास को पीठ पर लादकर पवित्र स्नान कराया. इस तस्वीर में बहू के चेहरे पर कोई कष्ट नहीं बल्कि मुस्कान दिखाई दे रही थी. यह घटना आस्था और श्रद्धा का प्रतीक बन गई है. महाकुंभ केवल एक उत्सव नहीं बल्कि आस्था का विषय और तपस्या का स्थान है. कुछ लोगों द्वारा इस पर राजनीति करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अधिकांश श्रद्धालुओं के लिए यह आस्था का महाकुंभ है.