50 साल पहले उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ के श्री योगेश्वर ऋषिकुल बाल वेद विद्यापीठ समिति को स्कूल चलाने के लिए 22 बीघा जमीन लीज पर दी गई थी. मगर प्रदेश सरकार तमाम जांच के बावजूद उस जमीन को वापस नहीं ले पा रही है. अब उस सरकारी जमीन को फर्जी दस्तावेजों के सहारे कैसे बेचा गया इसका भी खुलासा हुआ है. हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में दायर की गई याचिका में लगी सरकारी जांच रिपोर्ट से इस जमीन में हुए करोड़ों का खेल सामने आया है. वहीं, राजस्व विभाग बीते 4 महीने से जमीन को वापस कैसे लिया जाए इस पर मंथन ही कर रहा है.
बता दें कि अक्टूबर 1972 को उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ के श्री योगेश्वर ऋषिकुल बाल वेद विद्यापीठ के जो स्कूल चलाने के लिए 22 बीघा से ज्यादा जमीन लीज पर दी थी. लीज में शर्त थी कि समिति ना तो जमीन को बेच सकती है ना पट्टा कर सकती है और ना ही इसका उपयोग बदल सकती है. लेकिन समिति के सचिव सुब्रतो मजूमदार ने 7 अप्रैल 2011 को 4 करोड़ 83 लाख में आधी जमीन यानी 11 बीघा जमीन गोरखपुर की 'द लोटस बिल्डर एंड कॉलोनाइजर' को बेच दी.
गैरकनूनी तरीके से बेच डाली करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन
उन्होंने सरकारी जमीन पर फ्लैट बनाने के लिए एलडीए में अपना लेआउट प्लान जमा किया. लेकिन 28 अगस्त 2014 को एलडीए ने 'द लोटस बिल्डर एंड कॉलोनाइजर' के दिए प्लान को यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि जमीन का विक्रय ही अवैध है, गैरकानूनी है.
यानी जो जमीन सुब्रतो मजूमदार ने 'द लोटस बिल्डर' को बेची वह गैरकानूनी थी. इसलिए यह विक्रय ही एलडीए के द्वारा अवैध मानी गई. यहीं से इस सरकारी जमीन का फर्जीवाडा भी शुरू होता है. 'द लोटस बिल्डर एंड कॉलोनाइजर' ने 5 नवंबर 2015 को यह जमीन, जिसकी बिक्री को एलडीए ने अवैध मान नक्शा पास नहीं किया था, उस जमीन को लोटस बिल्डर के पार्टनर ओम शंकर जायसवाल, राजेंद्र प्रसाद जयसवाल, ईश्वर चंद्र जायसवाल राकेश कुमार त्रिपाठी के साथ संगीता श्रीवास्तव ने लीज पर दे दी.
30 साल के लिए एक दूसरी स्कूल समिति को 'द लोटस बिल्डर' ने यह जमीन लीज पर दे डाली. दस्तावेजों की पड़ताल में पता चला है कि बिल्डर के पार्टनर ओम शंकर जायसवाल, राजेंद्र प्रसाद जायसवाल, ईश्वर चंद्र जायसवाल और राकेश कुमार त्रिपाठी सभी चार लोग गोरखपुर के रहने वाले हैं लेकिन एक अकेली महिला पार्टनर संगीता श्रीवास्तव लखनऊ के राजाजीपुरम के रहने वाली हैं. जो संगीता श्रीवास्तव 'द लोटस बिल्डर एंड कॉलोनाइजर' की पार्टनर हैं. उनके पति नवनीत कुमार श्रीवास्तव श्री योगेश्वर ऋषिकुल इंटर कॉलेज मे 28 दिसंबर 1996 से असिस्टेंट टीचर हैं.
5 नवंबर 2015 को 'द लोटस बिल्डर' के इन सभी पांच पार्टनर ने यह जमीन 30 साल के लिए गोरखपुर की दूसरी समिति श्री योगेश्वर ऋषिकुल शिक्षा समिति को लीज पर दे दी. इस सेल डील में पत्नी 'द लोटस बिल्डर' की पार्टनर के तौर पर है तो वहीं पति नवनीत श्रीवास्तव इस जमीन की लीज डीड पर गवाह है.
समझिए पूरा खेल
साधारण भाषा में समझे तो 50 साल पहले सरकार ने जमीन लखनऊ की श्री योगेश्वर ऋषिकुल बाल वेद विद्यापीठ को दी थी. इस समिति ने जमीन 'द लोटस बिल्डर' को बेची और 'द लोटस बिल्डर' ने यह जमीन श्री योगेश्वर ऋषिकुल शिक्षा समिति गोरखपुर को बेच दी. यानी नाम में मामूली अंतर कर इस जमीन का बड़ा सौदा किया गया. जिसके बाद मार्च 2019 को लखनऊ के डीआईओएस ने अपनी रिपोर्ट में बिल्डर के जमीन विक्रय को अवैध माना. जिस पर उत्तर प्रदेश सरकार के सचिव के आदेश पर 4 अप्रैल 2019 को डीआईओएस ने स्कूल से जमीन वापस लेने और डिप्टी रजिस्ट्रार सोसायटी को श्री योगेश्वर ऋषिकुल बाल वेद विद्यापीठ का रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने का आदेश दे दिया था.
सरकार के द्वारा जो 22 बीघा जमीन दी गई उसमें से 11 बीघा अकेले 'द लोटस बिल्डर' को दी गई, लेकिन इस जमीन के एक बड़े हिस्से पर भू माफिया और हिस्ट्रीशीटरों का भी कब्जा है. जो जमीन समिति के सचिव सुब्रतो मजूमदार और 'द लोटस बिल्डर' के खेल से बच गई उस जमीन पर अवैध टैक्सी स्टैंड और पार्किंग चल रही है. इसे लखनऊ के पुराने गैंगस्टर बाबा बक्शी के साथी रहे दो भाई, बाजपेई ब्रदर्स चला रहे हैं. इतना ही नहीं इस जमीन के एक बड़े हिस्से पर बांग्लादेशियों की बड़ी झुग्गी झोपड़ी को भी बसाकर स्थानीय माफियाओं द्वारा वसूली की जा रही है.
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस डीके उपाध्याय की डबल बेंच ने सरकार से जवाब मांगा था. लेकिन जस्टिस डीके उपाध्याय के मुंबई हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनने के चलते अब इस मामले की सुनवाई जस्टिस एआर मसूदी और जस्टिस ओपी शुक्ला की डबल बेंच करेगी. अब अगले सप्ताह में होने वाली सुनवाई में सरकार को अपना जवाब देना होगा.
ऐसे में सवाल उठता है आखिर अपराधियों के अवैध कब्जे पर बुलडोजर चलाने वाली सरकार अपनी ही सरकारी जमीन को क्यों हासिल नहीं कर पा रही?