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'सर, उसके बिना नहीं जी पाऊंगी...' कौन है मोंटी, जिसके लिए कलेक्टर के सामने रो पड़ी कानपुर की फराह

यूपी के कानपुर में एक महिला कलेक्टर के ऑफिस पहुंचती है. महिला कहती है- 'सर, मुझे मेरे मोंटी को वापस दिलवा दीजिए, मैं उसके बगैर जी नहीं पाऊंगी.' ये बात सुनकर अधिकारी तुरंत जांच का आदेश देते हैं और चार घंटे के भीतर मोंटी को वापस करा दिया जाता है. आखिर कौन है ये मोंटी... जानिये पूरी कहानी...

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कानपुर कलेक्टर के सामने महिला ने लगाई गुहार. (Photo: ITG)
कानपुर कलेक्टर के सामने महिला ने लगाई गुहार. (Photo: ITG)

यूपी के कानपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने इंसान और उसके पेट एनिमल के बीच के भावनात्मक रिश्ते को सामने ला दिया. यह कहानी है कानपुर के आवास विकास इलाके में रहने वाली फराह और उसके आठ महीने के पेट डॉग मोंटी की, जिसके बिछड़ने का दर्द फराह बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी. हालात ऐसे बने कि फराह फरियाद लेकर सीधे कलेक्टर यानी डीएम जितेंद्र कुमार सिंह के सामने पहुंच गई और फूट-फूटकर रो पड़ी.

फराह ने डीएम से कहा कि सर, मेरा मोंटी मुझे वापस दिला दीजिए… उसके बिना मैं जी नहीं पाऊंगी. फराह की शिकायत में एक इंसान की भावनाएं और टूटता हुआ हौसला नजर आ रहा था.

दरअसल, 18 दिसंबर को फराह किसी काम से बाहर गई थीं. घर पर पालतू डॉगी मोंटी की देखभाल के लिए उन्होंने उसे एक डॉग केयर सेंटर में छोड़ा था. मोंटी उस समय थोड़ा घायल भी था, इसलिए फराह को उम्मीद थी कि सेंटर में उसकी ठीक से देखभाल होगी. लेकिन जब फराह वापस लौटीं और मोंटी को लेने पहुंचीं, तो डॉग केयर सेंटर वालों ने उसे सौंपने से इनकार कर दिया.

'मैं नहीं जी पाऊंगी...' कौन है मोंटी, जिसके लिए कलेक्टर के सामने रो पड़ी कानपुर की फराह

सेंटर संचालकों का दावा था कि फराह ने डॉगी की ठीक से देखभाल नहीं की, इसलिए उन्होंने मोंटी को एसपीसीए (SPCA) को सौंप दिया है. एसपीसीए संस्था पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता को रोकने का काम करती है. फराह ने कई जगह चक्कर लगाए, अधिकारियों से मिलीं, लेकिन कहीं से कोई राहत नहीं मिली. इस दौरान वह लगातार मानसिक तनाव में रहीं. 

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बुधवार को फराह सीधे डीएम जितेंद्र कुमार सिंह के कार्यालय पहुंच गईं. वहां उन्होंने रोते हुए पूरी कहानी बताई और मोंटी को वापस कराने की गुहार लगाई. पिछले दिनों लखनऊ में पालतू कुत्ता वापस न मिलने पर दो बहनों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना भी प्रशासन के संज्ञान में थी. डीएम ने फराह की बात गंभीरता से सुनी और तुरंत जिला पशु चिकित्सा अधिकारी को मामले की जांच के आदेश दे दिए.

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डीएम ने निर्देश दिए कि पहले डॉगी के वैधानिक दस्तावेज, स्वामित्व और लाइसेंस की जांच की जाए. साथ ही यह भी कहा कि एसपीसीए का काम पशुओं के साथ क्रूरता रोकना है, न कि बिना ठोस आधार के किसी के पालतू जानवर को जब्त करना.

डीएम के निर्देश पर जिला पशु चिकित्सा अधिकारी डीएन चतुर्वेदी ने टीम के साथ जांच की, फराह के सभी कागजात सही पाए गए और यह स्पष्ट हुआ कि मोंटी किसी भी तरह से समाज के लिए खतरा नहीं है. जांच पूरी होने के बाद महज चार घंटे के भीतर डीएम के आदेश पर मोंटी को फराह को सौंप दिया गया.

करीब 15 दिनों बाद जब फराह ने मोंटी को गोद में लिया, तो उसकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े. फराह ने डीएम की इस मानवीय पहल के लिए धन्यवाद दिया. डीएम जितेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि जिन लोगों के पास पालतू जानवर रखने का वैध लाइसेंस है और जो किसी के लिए खतरा नहीं हैं, उन्हें अनावश्यक रूप से किसी संस्था में नहीं रोका जा सकता.

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