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महाश्मशान पर विकास बनाम विरासत की जंग! मणिकर्णिका की 'मणि' टूटने पर आक्रोश, वाराणसी प्रशासन बोला- 'सुरक्षित हैं मूर्तियां'

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर पुनरुद्धार कार्य के दौरान ऐतिहासिक चबूतरे और अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को बुलडोजर से ढहाए जाने पर आक्रोश भड़क गया है. पाल समाज और तीर्थ पुरोहितों ने इस कार्रवाई का जमकर विरोध किया, जिसके बाद प्रशासन ने मूर्तियों को सुरक्षित होने का दावा कर शांत कराने की कोशिश की.

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डीएम ने कहा- मणिकर्णिका घाट के पुनर्निर्माण का विकास कार्य चल रहा (Photo- Screengrab)
डीएम ने कहा- मणिकर्णिका घाट के पुनर्निर्माण का विकास कार्य चल रहा (Photo- Screengrab)

वाराणसी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर पुनर्विकास परियोजना के तहत दो दिन पहले प्रशासनिक बुलडोजर ने एक प्राचीन मणि यानी चबूतरे को ध्वस्त कर दिया. इस चबूतरे के साथ लगी देवी-देवताओं और अहिल्याबाई होल्कर की मूर्तियों के टूटने का वीडियो वायरल होने पर पाल समाज के दर्जनों लोग आज प्रदर्शन करने पहुंचे. मौके पर भारी पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को रोककर हटाया, लेकिन लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि मूर्तियों की ससम्मान पुनर्स्थापना नहीं हुई तो प्रदेश व्यापी आंदोलन होगा. यह पूरी कार्रवाई नगर निगम की देखरेख में चल रहे 25 करोड़ रुपये के पुनरुद्धार प्रोजेक्ट का हिस्सा है.

पाल समाज का आक्रोश और पुलिस की कार्रवाई

मणिकर्णिका घाट पर हुए इस ध्वस्तीकरण से क्षेत्रीय जनता और पाल समाज में गहरा गुस्सा है. समाज के युवाओं ने नारेबाजी करते हुए कहा कि अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को तोड़ना उनकी विरासत का अपमान है. 

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे विकास के नाम पर अपनी धरोहरों का विनाश बर्दाश्त नहीं करेंगे. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा दिया, जिससे तनावपूर्ण माहौल बना रहा.

प्रशासन की सफाई और मूर्तियों की स्थिति

वाराणसी के अपर नगर आयुक्त संगम लाल ने मामले पर स्पष्टीकरण दिया कि किसी भी मूर्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है. उनके अनुसार, ये दीवार में उकेरे गए स्ट्रक्चर थे जिन्हें सुरक्षित निकालकर नमो घाट पर रखवा दिया गया है. उन्होंने बताया कि मणिकर्णिका घाट का काम चार फेज में हो रहा है और यह प्रोजेक्ट जी-प्लस वन मॉडल पर आधारित है. प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि आने वाले समय में इन मूर्तियों के पुनर्स्थापन पर उचित निर्णय लिया जाएगा.

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तीर्थ पुरोहितों की चिंता और प्रोजेक्ट का विवरण

स्थानीय पंडा पुरोहितों ने भी घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि मणिकर्णिका काशी का सबसे बड़ा तीर्थ है और वे अपनी विरासत से समझौता नहीं करेंगे. गौरतलब है कि जुलाई 2023 में पीएम मोदी ने इस पुनर्विकास के लिए 35 करोड़ का बजट दिया था. इसमें शवदाह के 18 स्टैंड, लकड़ी स्टोरेज, पंजीकरण कार्यालय और 25 मीटर ऊंची चिमनी जैसी आधुनिक सुविधाएं बननी हैं. प्रशासन का दावा है कि नए निर्माण के बाद सभी को उचित स्थान और रोजगार मिलेगा.

डीएम का बयान 

इसको लेकर वाराणसी के डीएम सत्येंद्र कुमार ने कहा- "मणिकर्णिका घाट पर पौराणिक काल से बड़ी संख्या में लोग अंतिम संस्कार के लिए आते हैं... प्रतिदिन वहां जो अंतिम संस्कार होता है, उसके लिए पर्याप्त जगह नहीं है और वहां व्यवस्थाओं को बेहतर करने की आवश्यकता महसूस होती है, वहां सफाई करने में कठनाई होती है... इस सभी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ तरीके से व्यवस्थित रूप से विकसित किया जा सके, इसके लिए वर्तमान में मणिकर्णिका घाट के पुनर्निर्माण का विकास कार्य चल रहा है. कच्चे हिस्से पर कार्य चल रहा है. पुराने घाट पर जो सीढ़ियां हैं, उनका पुनर्निर्माण चल रहा है और वहां साथ में मढ़ी भी थी, तो वहां दीवारों पर कुछ कलाकृतियां थीं जो पुनर्निर्माण कार्य में प्रभावित हुई हैं. मैं बताना चाहता हूं कि वहां जो  कलाकृतियां, कुछ मूर्तियां जो दीवार में लगी हुई थीं, उनको सरंक्षित करके संस्कृति विभाग द्वारा रखा गया है. पुनर्निर्माण कार्य में उनको फिर से उसी रूप में पुनर्स्थापित किया जाएगा."

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