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यूपी में बिजली संकट पर अखिलेश-मायावती ने घेरा, CM योगी ने दिए ये निर्देश

प्रदेश में तेज गर्मी और ऊर्जा आपूर्ति की दिक्कतों ने आम लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं. सरकार ने प्रशासनिक मशीनरी को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं, जबकि लगातार कटौती को लेकर जनता और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ती दिख रही है. विपक्ष ने भी हालात को लेकर सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं.

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बिजली संकट को लेकर सीएम योगी ने अफसरों को निर्देश जारी किए हैं (Photo-ITG)
बिजली संकट को लेकर सीएम योगी ने अफसरों को निर्देश जारी किए हैं (Photo-ITG)

उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्य इस समय भीषण लू और जानलेवा गर्मी की चपेट में हैं. पारा लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है जिसके चलते प्रदेश में बिजली की मांग अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. 

बिजली की रिकॉर्ड मांग के बीच कई शहरों और कस्बों में बड़े पैमाने पर बिजली कटौती शुरू हो गई है. बिजली संकट पर विपक्ष से लेकर बीजेपी के नेता भी सवाल उठा रहे हैं. 

राजधानी लखनऊ से लेकर पूर्वांचल और बुंदेलखंड तक के जिलों में बड़े-बड़े पावर कट लग रहे हैं. शहरी इलाकों में जहां रात-रात भर बत्ती गुल रह रही है, वहीं ग्रामीण इलाकों में त्राहि-त्राहि मची हुई है.

लखनऊ में भड़का जनता का गुस्सा 
राजधानी के दुबग्गा पावर हाउस के अंतर्गत आने वाले पारा के मोहन रोड स्थित 'मॉडर्न पिंक सिटी' इलाके में चार दिनों से बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित है. लगातार हो रही इस कटौती से हजारों लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. परेशान और गुस्साए स्थानीय निवासियों ने सड़क पर उतरकर सरकार और बिजली विभाग के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और चक्काजाम कर दिया. प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है. मौके पर पहुंची पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने और लोगों को समझाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी.

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जब इस संकट को लेकर आजतक की टीम ने बिजली विभाग के शीर्ष अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, तो विभाग की संवेदनहीनता साफ दिखी. सरकारी वेबसाइट पर दर्ज लैंडलाइन नंबर या तो काम नहीं कर रहे थे या वे रजिस्टर्ड ही नहीं थे. चेयरमैन कार्यालय का नंबर नॉट-रजिस्टर्ड आया, जबकि एमडी (MD) कार्यालय से सिर्फ ईमेल के जरिए अपॉइंटमेंट लेने की बात कही गई.

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अखिलेश और मायावती का तीखा हमला
इस संकट पर विपक्ष ने सरकार को आड़े हाथों लिया है. बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा, 'उत्तर प्रदेश जैसे विशाल आबादी वाले राज्य में भीषण गर्मी में बिजली की कम आपूर्ति व कटौती से गरीब, मध्यम वर्ग, किसान और छोटे व्यापारियों का जीवन अति-कष्टदायी बना हुआ है. सरकार से अपील है कि वह तत्काल जरूरी उपाय सुनिश्चित करे और नए पावर प्लांट लगाए.'

वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा, 'बिजली के नये प्लांट लगाना तो आपके बस में था नहीं, न ही आपकी तंग सोच में. मुँह से ये कह ही देते ‘3x660 SUPERCRITICAL THERMAL POWER PLANT’ तो गर्मी में झुलसते प्रदेशवासियों को सुनकर ही थोड़ी राहत मिल जाती. भाजपा के कुराज में उप्र में बिजली की सिर्फ़ ‘मांग’ बढ़ रही है या ‘दाम’ बढ़ रहे हैं, सप्लाई-आपूर्ति नहीं. भाजपा राज, यूपी ख़स्ताहाल!'

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भाजपा विधायकों ने उठाए सवाल
बिजली संकट पर भाजपा के अपने ही विधायकों ने भी सवाल उठाए हैं. लखनऊ की सरोजनीनगर सीट से भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सीधे ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा को एक कड़ा पत्र लिख डाला है. उन्होंने बिजली प्रबंधन में सुधार के लिए यूपी के पारंपरिक ढर्रे को छोड़कर सिंगापुर और अमेरिका जैसे ग्लोबल ग्रिड मॉडल को अपनाने की सलाह दी है.

राजेश्वर सिंह से पहले लखनऊ के ही एक अन्य भाजपा विधायक नीरज बोरा भी बिजली की खराब व्यवस्था और अघोषित कटौती को लेकर सरकार को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी दर्ज करा चुके हैं. 

एक्शन में सीएम योगी
इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद कमान संभाल ली है.  सीएम योगी ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और राहत एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा है कि भीषण गर्मी और हीट स्ट्रोक से लोगों को बचाने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय बनाकर काम करें. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अस्पतालों, पेयजल आपूर्ति और बिजली व्यवस्था पर विशेष नजर रखी जाए ताकि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो.

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सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सरकारी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और निर्जलीकरण से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं. साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे लू से बचाव के उपाय अपनाएं और ऐसी कोई लापरवाही न करें जिससे आग लगने की घटनाएं बढ़ें. श्रमिकों, बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखने को भी कहा गया है.

इसके तुरंत बाद, मध्यांचल डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक (MD) ने एक बड़ा आदेश जारी करते हुए विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां 31 जुलाई 2026 तक तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी हैं. अब केवल विशेष और अपरिहार्य परिस्थितियों में ही छुट्टी मिल सकेगी, ताकि उपभोक्ता सेवाओं और राजस्व वसूली को बेहतर किया जा सके. 

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