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संभल जिला अस्पताल में बिजली बचाने का अनोखा फॉर्मूला, CMS ने नियुक्त किया नोडल अफसर

यूपी के संभल जिला अस्पताल में भीषण गर्मी के बीच बिजली बचाने और हादसों को रोकने के लिए सीएमएस ने एक खास पहल की है. अस्पताल में एसी, पंखे और एलईडी बल्बों के सीमित इस्तेमाल के लिए नोडल अफसर और कर्मचारियों को तैनात कर सख्त नियम लागू किए गए हैं.

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संभल जिला अस्पताल में बिजली बचाओ अभियान (Photo- ITG)
संभल जिला अस्पताल में बिजली बचाओ अभियान (Photo- ITG)

उत्तर प्रदेश के संभल में भीषण गर्मी के बीच बिजली बचाने और तकनीकी खराबी से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिला अस्पताल के CMS डॉ. राजेंद्र सैनी ने एक अनोखा कदम उठाया है. उन्होंने अस्पताल परिसर में लगे पंखों, एसी और एलईडी बल्बों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की निगरानी के लिए बकायदा एक नोडल अफसर और कर्मचारियों की नियुक्ति की है. इस नए नियम के तहत मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए डॉक्टरों के कक्षों, वार्डों और अन्य हिस्सों में बिजली उपकरणों को तय समय और जरूरत के हिसाब से ही चलाया जाएगा.

एसी के लिए बनाया गया 'ब्रेक फॉर्मूला'

सीएमएस डॉ. राजेंद्र सैनी के निर्देशों के मुताबिक, जिला अस्पताल के जिन कमरों में दो एसी लगे हैं, वहां अब एक समय में केवल एक ही एसी चलाया जाएगा और दूसरे को अल्टरनेट विकल्प के रूप में इस्तेमाल करेंगे. 

वहीं, जिन कमरों में सिर्फ एक एसी लगा है, वहां लगातार चलाने के बजाय उसे हर चार घंटे के बाद ब्रेक देकर चलाया जाएगा ताकि भारी लोड और अत्यधिक तापमान के कारण शॉर्ट सर्किट या कोई बड़ा हादसा न हो.

दिन में बल्ब जलाने पर पूरी तरह रोक

अस्पताल प्रशासन ने सिर्फ एसी ही नहीं, बल्कि लाइटिंग और पंखों को लेकर भी सख्त गाइडलाइन जारी की है. नए आदेश के अनुसार, जिला अस्पताल में लगे एलईडी बल्बों को दिन के समय बिल्कुल भी नहीं जलाया जाएगा. इसके साथ ही वार्डों और अलग-अलग हिस्सों में लगे पंखों को भी केवल जरूरत होने पर ही चलाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बिजली की अनावश्यक बर्बादी को पूरी तरह रोका जा सके.

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नोडल अफसर और खुद सीएमएस करेंगे निगरानी

इस अनोखे फॉर्मूले को जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू कराने के लिए बाकायदा जिम्मेदारी तय की गई है. नियुक्त किए गए नोडल अफसर और कर्मचारी अस्पताल के अलग-अलग हिस्सों में लगातार चेकिंग करेंगे कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं. इसके साथ ही, खुद सीएमएस डॉ. राजेंद्र सैनी भी व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए बार-बार अस्पताल का औचक निरीक्षण और चेकिंग कर रहे हैं.

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