नोएडा के सेक्टर-150 में जिस जगह 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार गहरे पानी से भरे गड्ढे में गिरने से मौत हो गई, उसी जगह कुछ दिन पहले एक ट्रक ड्राइवर भी गंभीर हादसे का शिकार हुआ था. ट्रक ड्राइवर गुरविंदर सिंह ने बताया कि वह उस रात मौत के बेहद करीब पहुंच गए थे और यह घटना आज भी उन्हें डराती है. उन्होंने डेवलपर और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ कड़ी आपराधिक कार्रवाई, यहां तक कि हत्या की धाराएं लगाने की मांग की है.
सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत से भड़का आक्रोश
इस हादसे में जान गंवाने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश देखने को मिला. लोगों का आरोप है कि सड़क की खराब डिजाइन, संकेतक बोर्डों की कमी, रिफ्लेक्टर और बैरिकेड न होने तथा अधिकारियों की लापरवाही ने इस रास्ते को मौत का जाल बना दिया.
पहले हादसे के बाद नहीं उठाए गए सुधारात्मक कदम
यह हादसा टाला जा सकता था, अगर 2 जनवरी को इसी जगह गुरविंदर सिंह के ट्रक के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया होता. यह वही स्थान है जहां सड़क पर तेज 90 डिग्री का मोड़ है.
घना कोहरा और सुरक्षा इंतजामों की कमी
बुधवार को न्यूज एजेंसी से बातचीत में गुरविंदर सिंह ने बताया कि उस रात घना कोहरा था और सड़क पर न तो बैरिकेड थे, न रिफ्लेक्टर, न लाइट और न ही कोई चेतावनी संकेत. इस कारण यह सड़क बेहद खतरनाक बन गई थी.
“किस्मत और भगवान की कृपा से बचा”
सिंह ने कहा, “मैं उस रात सिर्फ किस्मत और भगवान की कृपा से बच पाया.” युवराज मेहता की मौत को याद करते हुए उनकी आवाज भर आई. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने उस युवक को अपने पिता के सामने तड़पते हुए मरते देखा तो वह रो पड़े. उन्हें बार-बार यही ख्याल आया कि उसके पिता पर क्या बीत रही होगी.
हादसे के बाद पैसे मांगने का आरोप
गुरविंदर सिंह ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद एक व्यक्ति बलेनो कार से आया और खुद को नोएडा अथॉरिटी का अधिकारी बताते हुए उनसे पैसे मांगने लगा. उन्होंने कहा, “मैं बार-बार कहता रहा कि मेरी जान अभी-अभी बची है, क्या यह ज्यादा जरूरी नहीं है?”
पुलिस पर नहीं, अथॉरिटी पर उठाए सवाल
उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन्हें परेशान नहीं किया, लेकिन अथॉरिटी से जुड़े अधिकारियों ने उन्हें तंग किया. सिंह ने कहा, “पुलिस ने अपना काम किया. अगर गलती है तो उनकी है, जिनकी जिम्मेदारी सड़क को सुरक्षित बनाने की थी.”
हादसे की रात का भयावह मंजर
सिंह ने बताया कि घने कोहरे के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था. सड़क पर न कोई संकेत था, न रिफ्लेक्टिव टेप और न ही बैरिकेड, जिससे तेज मोड़ का अंदाजा हो सके. ट्रक की रफ्तार कम थी, लेकिन फिर भी केबिन पानी से भरे तालाब जैसे गड्ढे में चला गया और पीछे के पहिये सड़क और गड्ढे के बीच नाले में फंस गए.
लोगों ने बचाई जान
उन्होंने कहा कि जब वह नीचे उतरे तो वहां जमीन ही नहीं थी और वह फिसलकर गिर गए. राहगीरों ने उन्हें देखा और बाहर निकाला. अगर वे लोग नहीं आते तो यह हादसा जानलेवा हो सकता था. घर लौटने के बाद उन्होंने भगवान और अपने माता-पिता का धन्यवाद किया और कहा कि उन्हीं के आशीर्वाद से वह आज जिंदा हैं.
हत्या की धाराएं लगाने की मांग
युवराज मेहता की मौत का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा, “यह कोई हादसा नहीं, बल्कि ऐसी लापरवाही है जो हत्या के बराबर है.” उन्होंने मांग की कि जिस डेवलपर ने इतना बड़ा गड्ढा खोदकर खुला छोड़ दिया और सड़क सुरक्षा के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ हत्या की धारा 302 (अब बीएनएस 103) के तहत मामला दर्ज किया जाए.
‘पापा मुझे बचा लो’ की चीख अब भी गूंजती है
सिंह ने कहा कि युवक फोन पर लगातार कहता रहा, “पापा मुझे बचा लो, मैं मर जाऊंगा.” उन्होंने सवाल उठाया कि वहां प्रशासन की ओर से क्या इंतजाम थे. उन्होंने जवाबदेही तय करने की मांग की ताकि आगे किसी और की जान न जाए.
काम से लौटते वक्त हुआ था हादसा
गुरुग्राम में काम करने वाले युवराज मेहता 16 जनवरी की रात घर लौट रहे थे, तभी उनकी कार निर्माण स्थल के पास पानी से भरे गड्ढे में गिर गई. करीब दो घंटे तक मदद की गुहार लगाने के बाद उनकी मौत हो गई.
सरकार की कार्रवाई और जांच
इस घटना के बाद बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा अथॉरिटी के सीईओ को हटा दिया और विशेष जांच टीम (एसआईटी) से जांच के आदेश दिए. इससे पहले ट्रैफिक सेल के एक जूनियर इंजीनियर की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई थीं.
एसआईटी जांच और गिरफ्तारी
एसआईटी इस हादसे की परिस्थितियों की जांच कर रही है और युवराज के पिता से भी बातचीत कर चुकी है. पुलिस ने उस प्लॉट के मालिकाना हक वाली कंपनी के निदेशक अभय कुमार को गिरफ्तार किया है, जहां पानी जमा था.
इन धाराओं में दर्ज हुआ केस
पुलिस के अनुसार, इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), 106 (लापरवाही से मौत) और 125 (दूसरों की जान या सुरक्षा को खतरे में डालना) सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है.