समय-समय पर कई सरकारी दफ्तरों के तुलगकी फरमान न केवल सरकार के लिए, बल्कि खुद उस विभाग की किरकिरी करा देते हैं. ऐसा ही एक अजीबोगरीब फरमान वाराणसी के मुख्य विकास अधिकारी ने दे डाला. फरमान के मुताबिक, परिषदीय स्कूलों में अब शिक्षकों की निगरानी सफाईकर्मी करेंगे. हालांकि, इस आदेश की चारों तरफ हो रही किरकिरी और शिक्षकों की नाराजगी के बाद वाराणसी के मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु नागपाल ने बैकफुट पर आते हुए संशोधन के आदेश जारी कर दिए.
जो फरमान मुख्य विकास अधिकारी ने जारी किया है उसके मुताबिक, परिषदीय स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है. इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी (कन्ट्रोल रूम) की तरफ से एक टीम का गठन कर दिया गया. यह टीम शिक्षकों सहित तमाम हालातों पर नजर रखकर रिपोर्ट भी गूगलशीट पर भरकर कार्यालय को सौपेंगी.
लेकिन हद तो तब हो गई जब 150 स्कूलों के लिए बनी 9 सरकारी कर्मचारियों की टीम में 3 सफाईकर्मियों को भी शामिल कर दिया गया. इसके अलावा इस टीम में कार्यालय सहायक, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, सहायक अध्यापक भी शामिल हैं. 30 सितंबर 2023 को यह आदेश जारी किया गया.
शिक्षकों को नीचा दिखाने वाला आदेश: राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ संयुक्त मंत्री
इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ वाराणसी के प्रदेश संयुक्त मंत्री शशांक कुमार पाण्डेय "शेखर" ने 'आजतक' से बताया कि इस तरह का आदेश शिक्षकों को नीचा दिखाने की वजह से जारी किया गया था. जिसका विरोध वाराणसी के मुख्य विकास अधिकारी से करने के बाद उन्होंने आदेश को वापस लेकर संशोधित आदेश जारी कर दिया. हालांकि, नए आदेश में कर्मचारियों के नाम के आगे से उनका पदनाम हटा दिया गया है. लेकिन फिर भी यह शिक्षकों की नैतिक जीत है.
उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम और रहस्यमयी बुखार की चपेट में आने के चलते स्कूलों में छात्रों की संख्या कम हुई है. उनकी ओर से आदेश पर आपत्ति के संदर्भ में एक पत्र के जरिए CDO को अवगत भी कराया गया था.