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संभल में सरकारी जमीन पर बने मदरसे पर चला बुलडोजर, प्रशासन ने ढहाया

संभल जिले के नारोली इलाके में प्रशासन ने सार्वजनिक जमीन पर बने अवैध मदरसे को ध्वस्त कर दिया है. प्रशासन का कहना है कि जमीन राजस्व रिकॉर्ड में खाद गड्ढा और सार्वजनिक रास्ते के रूप में दर्ज थी. वहीं स्थानीय नगर पंचायत चेयरपर्सन ने कार्रवाई से पहले नोटिस नहीं मिलने का दावा किया है. प्रशासन ने अन्य अवैध निर्माणों पर भी कार्रवाई की बात कही है.

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संभल में सरकारी जमीन पर बुलडोजर एक्शन (Photo: Representative Image)
संभल में सरकारी जमीन पर बुलडोजर एक्शन (Photo: Representative Image)

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में गुरुवार को जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सार्वजनिक जमीन पर बने अवैध मदरसे को ध्वस्त कर दिया. यह कार्रवाई नारोली क्षेत्र में चंदौसी तहसील के मोहल्ला बनजारी कुआं में की गई. अधिकारियों के मुताबिक, दरुल उलूम मदरसा उस जमीन पर बना हुआ था, जो राजस्व रिकॉर्ड में खाद गड्ढा और सार्वजनिक रास्ते के रूप में दर्ज है.

कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पांच थानों की पुलिस और प्रांतीय सशस्त्र बल (PAC) को तैनात किया गया था. प्रशासन का कहना है कि इलाके में शांति बनाए रखते हुए पूरी प्रक्रिया को पूरा किया गया.

पांच थानों की पुलिस और PAC की मौजूदगी में चला बुलडोजर

चंदौसी के उप जिलाधिकारी (SDM) आशीष तिवारी ने बताया कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज खाद गड्ढा और सड़क की जमीन पर अतिक्रमण किया गया था. उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने से पहले संबंधित पक्षों को दो बार नोटिस जारी किया गया और पर्याप्त समय भी दिया गया. इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया, जिसके बाद गुरुवार को मदरसे के खिलाफ निष्पादन कार्रवाई की गई.

अधिकारियों के अनुसार, विवादित जमीन के दो प्लॉट पर करीब 192 और 165 वर्ग मीटर क्षेत्र में अतिक्रमण किया गया था, जबकि मदरसे का ढांचा लगभग 225 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ था. अधिकारियों ने यह भी बताया कि मदरसे के अलावा सात से आठ मकान भी इसी विवादित जमीन पर बने हुए हैं.

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नोटिस देने के बाद की गई कार्रवाई: SDM

वहीं, नारोली नगर पंचायत की चेयरपर्सन बिट्टन मलिक ने प्रशासन के दावों पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इस कार्रवाई को लेकर उन्हें या स्थानीय स्तर पर कोई पूर्व सूचना या नोटिस नहीं दिया गया. उन्होंने इसे एक धार्मिक संस्थान बताया और कार्रवाई पर आपत्ति जताई.

प्रशासन का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई की गई है और आगे भी सार्वजनिक जमीन पर बने अवैध निर्माणों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी. फिलहाल इस कार्रवाई को लेकर इलाके में चर्चा तेज हो गई है.

 

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