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आजम खान और अब्दुल्ला आजम जेल में ही रहेंगे, कोर्ट से याचिका खारिज

समाजवादी पार्टी नेता मोहम्मद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को रामपुर सत्र अदालत से बड़ा झटका लगा है. दो पैन कार्ड मामले में सजा के खिलाफ उनकी अपील खारिज कर दी गई, जिससे सात-सात साल की सजा बरकरार रही. 2019 के इस मामले में अलग जन्मतिथि पर पैन कार्ड बनवाने का आरोप है. दोनों नवंबर 2025 से जेल में बंद हैं.

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आजम खान और अब्दुल्ला आजम से जुड़े फर्जी पैन-पासपोर्ट केस में सजा बरकरार राखी गई.(Photo: PTI)
आजम खान और अब्दुल्ला आजम से जुड़े फर्जी पैन-पासपोर्ट केस में सजा बरकरार राखी गई.(Photo: PTI)

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को अदालत से बड़ा झटका लगा है. दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में सजा के खिलाफ दाखिल उनकी अपील को रामपुर की सत्र अदालत ने खारिज कर दिया है, जिससे दोनों की सजा यथावत बनी रहेगी और उन्हें अभी जेल में ही रहना होगा. यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज एक मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला आजम ने अलग-अलग जन्मतिथियों का इस्तेमाल कर दो पैन कार्ड बनवाए. इस पूरे प्रकरण में आजम खान की भूमिका भी जांच के घेरे में आई थी.

इससे पहले एमपी-एमएलए अदालत ने दोनों को दोषी मानते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई थी. इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने सत्र अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली.

गौरतलब है कि सजा के बाद से ही पिता-पुत्र रामपुर जिला जेल में बंद हैं. आजम खान को सितंबर 2025 में जमानत मिलने के बाद रिहाई मिली थी, लेकिन करीब दो महीने के भीतर ही अदालत के नए फैसले के चलते उन्हें फिर से जेल जाना पड़ा.

क्या है दो पैन कार्ड मामले की पूरी कहानी?
भाजपा नेता और विधायक आकाश सक्सेना ने 30 जुलाई 2019 को कोतवाली सिविल लाइंस में शिकायत दर्ज कराई थी. आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने नियमों का उल्लंघन कर दो पैन कार्ड बनवाए. जांच के दौरान इस मामले में आजम खान की भूमिका भी सामने आई, जिसके बाद उन्हें भी आरोपी बनाया गया.

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क्या हैं आरोप?
शिकायत के अनुसार, अब्दुल्ला आजम ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए अलग-अलग जन्मतिथियों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए. एक पैन कार्ड में जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 और दूसरे में 30 सितंबर 1990 दर्ज बताई गई.

क्या रहा निचली अदालत का फैसला?
लंबी सुनवाई के बाद रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को दोनों को दोषी ठहराया. अदालत ने दोनों को 7-7 साल की सजा सुनाई और 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया. फैसले के बाद से ही दोनों जिला जेल में बंद हैं.

सेशन कोर्ट में अपील
सजा के खिलाफ बचाव पक्ष ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की. सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से और सरकारी पक्ष की ओर से पक्ष रखा गया. 6 अप्रैल 2026 को बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया और 20 अप्रैल की तारीख तय की.

सजा बढ़ाने की मांग भी लंबित
यह मामला इसलिए भी अहम हो गया है क्योंकि सजा बढ़ाने की मांग को लेकर भी अलग से प्रक्रिया चल रही है. पूर्व मंत्री काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां ने भी सजा बढ़ाने की मांग करते हुए अपील दाखिल की थी.

पहले सेशन कोर्ट ने सजा बढ़ाने की अपील खारिज कर दी थी, जिसके बाद जनवरी 2026 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया. हाईकोर्ट के निर्देश पर अब इस मामले में सजा बढ़ाने की मांग पर भी सुनवाई जारी है.

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