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प्रभात हत्याकांड: 23 साल पहले मर्डर, 14 साल से HC में सुनवाई... अब तीसरी बार फैसले की तारीख मुकर्रर

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. 8 जुलाई 2000 को लखीमपुर के तिकुनिया में लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र नेता प्रभात गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस केस में अजय मिश्र टेनी भी आरोपी हैं. इस केस में 3 बार हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस हत्याकांड में फैसला सुरक्षित रखा लेकिन फैसला नहीं आ पाया.

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प्रभात मर्डर केस में आरोपी हैं गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी
प्रभात मर्डर केस में आरोपी हैं गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी

लखीमपुर के तिकुनिया में 23 साल पहले हुए प्रभात गुप्ता हत्याकांड में तीसरी बार फैसले की तारीख मुकर्रर हुई है. 23 साल की सुनवाई में 3 बार हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस हत्याकांड में फैसला सुरक्षित रखा लेकिन फैसला नहीं आ पाया. कल यानी शुक्रवार को हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच में जस्टिस एआर मसूदी और ओपी शुक्ला की बेंच प्रभात गुप्ता मर्डर केस में अपना फैसला सुनाएगी. इस फैसले के साथ ही केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के भविष्य का भी फैसला होगा.

लखीमपुर हिंसा में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी का बेटा आशीष मिश्रा मोनू अदालत के आदेश पर पैरोल लेकर भले ही जेल से बाहर हो लेकिन अब केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. 8 जुलाई 2000 को लखीमपुर के तिकुनिया में लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र नेता प्रभात गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई.

इस हत्याकांड में जिन 4 लोगों को नामजद किया गया, उसमें सुभाष मामा, शशि भूषण उर्फ पिंकी, राकेश उर्फ डालू के साथ-साथ मौजूदा समय के केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी भी शामिल थे. प्रभात गुप्ता के दिवंगत पिता संतोष गुप्ता की तरफ से दर्ज कराई गई एफआईआर में आरोप लगाया गया कि उनके बेटे प्रभात गुप्ता को दिनदहाड़े अजय मिश्र टेनी ने गोली मारी थी. 

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हालांकि इस मामले में लोअर कोर्ट से अजय मिश्रा टेनी को बरी कर दिया गया, लेकिन अभियोजन और पीड़ित परिवार की तरफ से दायर की गई हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका पर तीन बार से हाई कोर्ट की विभिन्न बेंच ने आर्डर रिजर्व किया लेकिन फैसला नहीं आया. सबसे पहले जस्टिस डीके उपाध्याय और डीके सिंह की बेंच ने 12 मार्च 2018 को ऑर्डर रिजर्व किया.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दूसरी बेंच ने सुनवाई शुरू की और 4 साल की सुनवाई के बाद 10 नवंबर 2022 को जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रेनू अग्रवाल की बेंच ने ऑर्डर रिजर्व किया. तीसरी बार में जस्टिस एआर मसूदी और जस्टिस ओपी शुक्ला की बेंच ने 21 फरवरी 2023 को प्रभात गुप्ता मर्डर केस का आर्डर रिजर्व किया था. लगभग 3 महीने बाद जस्टिस एआर मसूदी और ओपी शुक्ला की बेंच ने शुक्रवार यानी 19 मई 2023 को इस मामले में फैसले की तारीख तय की है.

क्या था प्रभात गुप्ता मर्डर केस?

8 जुलाई 2000 को लखीमपुर के तिकुनिया थाना क्षेत्र के बनवीरपुर गांव में दिन में लगभग 3.30 बजे प्रभात गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. मर्डर केस में पिता संतोष गुप्ता ने मौजूदा समय में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के साथ शशि भूषण, राकेश डालू और सुभाष मामा को हत्या में नामजद आरोपी बनाया.

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आरोप लगाया गया कि प्रभात गुप्ता को दिनदहाड़े बीच रास्ते में पहली गोली अजय मिश्रा ने उसकी कनपटी पर मारी और दूसरी गोली सुभाष मामा ने प्रभात के सीने में मारी थी, जिसके बाद प्रभात गुप्ता की मौके पर ही मौत हो गई. लखीमपुर के तिकुनिया थाने में क्राइम नंबर 41/ 2000 धारा 302 और 34 आईपीसी में केस दर्ज हुआ.

एफआईआर दर्ज होने के कुछ ही दिनों बाद केस बिना वादी की जानकारी के सीबीसीआईडी ट्रांसफर कर दिया गया. प्रभात गुप्ता के परिवार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्ता से गुहार लगाई और 24 अक्टूबर 2000 को तत्कालीन सचिव मुख्यमंत्री आलोक रंजन ने केस की जांच सीबीसीआईडी से लेकर फिर लखीमपुर पुलिस को दे दी.

केस लखीमपुर पुलिस को दिया गया तो लखीमपुर मे जांच अधिकारी ने एसपी लखीमपुर को जांच किसी अन्य से कराने के लिए लिखित में प्रार्थना पत्र दे दिया. तब आईजी जोन लखनऊ ने विशेष टीम गठित कर विवेचना करवाई और 13 दिसंबर 2000 को केस में चार्जशीट लगा दी गई. इसी बीच अजय मिश्रा समेत सभी आरोपियों ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से अरेस्ट स्टे ले लिया.

कोर्ट में चार्जशीट दाखिल हुई तो 5 जनवरी 2001 को हाई कोर्ट में जस्टिस डीके त्रिवेदी की बेंच ने अजय मिश्रा को मिले अरेस्ट स्टे को खारिज कर दिया. इस बीच बेटे की हत्या में न्याय की लड़ाई लड़ रहे प्रभात गुप्ता के पिता संतोष गुप्ता की मौत हो गई तो केस की पैरवी प्रभात गुप्ता के छोटे भाई राजीव गुप्ता ने शुरू की.

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हाइकोर्ट की लखनऊ बेंच से अरेस्ट स्टे खारिज होने के बाद भी लखीमपुर पुलिस ने अजय मिश्रा को गिरफ्तार नहीं किया. प्रभात गुप्ता के भाई राजीव गुप्ता ने एक बार फिर हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में गुहार लगाई. तब 10 मई 2001 को हाई कोर्ट में जस्टिस नसीमुद्दीन की बेंच ने अजय मिश्र को अरेस्ट करने का आर्डर देना पड़ा.

हाईकोर्ट से गिरफ्तारी के आदेश हुए तो डेढ़ महीने बाद 25 जून 2001 को अजय मिश्रा ने एडीजे की कोर्ट में सरेंडर कर दिया, लेकिन 25 जून को सरेंडर करते ही एक डॉक्टर की रिपोर्ट के आधार पर अजय मिश्रा को बीमार बताकर अस्पताल भेज दिया गया और अगले ही दिन 26 जून को सेशन कोर्ट से जमानत मिल गई.

24 घंटे के अंदर निचली अदालत में सरेंडर और फिर अगले ही दिन ऊपरी अदालत के द्वारा जमानत मंजूरी के इस पूरे अनोखे मामले की शिकायत तत्कालीन डीजीसी ने डीएम लखीमपुर को पत्र लिखकर की. डीजीसी क्रिमिनल की उस चिट्ठी में साफ लिखा है कि अजय मिश्रा गिरफ्तारी से बचते रहे और फिर अपनी मर्जी के हिसाब के समय 25 जून 2001 को तब सरेंडर किया जब जिला जज छुट्टी पर थे.

उसी दिन अजय मिश्रा ने सरेंडर किया और साथ ही जमानत की अर्जी भी डाल दी. अमूमन एडीजे कोर्ट में जमानत पर सुनवाई 1:00 बजे के बाद होती है और ऊपरी अदालत सेशन में बेल एप्लीकेशन 12:00 बजे तक ही ली जाती है, लेकिन अजय मिश्रा के सरेंडर करते ही सेशन कोर्ट में जमानत अर्जी डाल दी गई और इस मामले में शासकीय अधिवक्ता को बहुत जोर देने के बाद बहस करने के लिए एक रात की मोहलत दी गई और अगले दिन 26 जून 2001 की सुबह 11:00 बजे अजय मिश्रा को जमानत भी मिल गई.

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पुलिस की तरफ से चार्जशीट दाखिल होने के बाद लखीमपुर कोर्ट में प्रभात गुप्ता मर्डर केस का ट्रायल शुरू हुआ और 29 अप्रैल 2004 को अजय मिश्रा समेत सभी आरोपी निचली अदालत से बरी हो गए. 

अमूमन निचली अदालत से हत्या जैसे केस में सभी आरोपियों के बरी होने पर हाईकोर्ट में अपील करने वाली सरकार इस मामले में ढीली पड़ गई. निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करने के लिए राज्यपाल को आदेश देना पड़ा. राज्यपाल ने 9 जून 2004 को आदेश देकर हाई कोर्ट में इस मामले की अपील करने का आदेश दिया.

हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में इस पूरे मामले में दो अपील दाखिल हुई. एक राज्यपाल के आदेश पर सरकार की तरफ से दाखिल हुई और दूसरी अपील पिता संतोष गुप्ता की तरफ से राजीव गुप्ता ने रिवीजन की अपील दाखिल की.

2004 से 12 मार्च 2018... पूरे 14 साल तक इस केस की सुनवाई हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में हुई. 14 साल की लंबी सुनवाई के बाद जस्टिस डीके उपाध्याय और डीके सिंह की बेंच ने सुनवाई पूरी की तो आदेश सुरक्षित रख लिया।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि किसी भी सुरक्षित रखे गए आर्डर को 6 महीने में फैसला दे दिया जाए... अगर वह बेंच फैसला नहीं देती है तो आर्डर सुरक्षित रखने वाली बैंच वो फैसला नहीं देगी. मार्च 2018 से हाईकोर्ट के सुरक्षित निर्णय के नहीं आने पर 9 महीने बाद प्रभात गुप्ता के भाई राजीव गुप्ता ने फिर हाई कोर्ट चीफ जस्टिस के यहां अपील की.

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अपील पर सुनवाई करते हुए 5 अप्रैल 2022 को जस्टिस रमेश सिन्हा और सरोज यादव की बेंच ने मई 2022 को इस मामले में तारीख तय की है, लेकिन 16 मई महीने से 22 अगस्त के बीच इस मामले की हुई 3 बार सुनवाई में कभी अजय मिश्रा के वकील खड़े नहीं हुए तो कभी अजय मिश्रा के वकील ने कोरोना संक्रमित होने का हवाला देकर तारीख आगे बढ़ा दी.

दोनों पक्षों ने अपनी बहस पूरी की और कोर्ट ने 10 नवंबर 2022 को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया. कोर्ट ने फैसला लिखाने से पहले कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण के लिए दोनों ही पक्षों के वकीलों को 21 दिसंबर को तलब किया था. कोर्ट ने इस दौरान वादी मुकदमा संतोष गुप्ता के बारे में पूछा वह जिंदा है या नहीं, तब पता चला कि वादी मुकदमा संतोष गुप्ता की तो 20 जुलाई 2005 को ही मौत हो चुकी है.

इस कोर्ट ने पूछा संतोष गुप्ता की मौत के बाद उनके कानूनी वारिस ने इस बारे में क्या कोर्ट को अवगत कराया गया है कि कानूनी वारिस कौन है जो संतोष गुप्ता के बाद केस की पैरवी करेगा. कोर्ट ने इस संबंध में जब सवाल जवाब किया तो पता चला वादी मुकदमा संतोष गुप्ता की मौत और उनके कानूनी वारिस जो केस की पैरवी करेगा उसके बारे में कोर्ट को लिखित तौर पर कभी बताया ही नहीं गया.

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कोर्ट ने इसी बिंदु पर आदेश दिया है कि 2 सप्ताह में कोर्ट को अर्जी देकर बताया जाए... रिव्यू पिटीशन फाइल करने वाले संतोष गुप्ता के कानूनी वारिस कौन है और नया वकालतनामा भी वारिस की तरफ से दाखिल किया जाए. 

इस मामूली चूक के बाद फिर प्रभात गुप्ता मर्डर केस में फैसला टल गया. केस की पैरवी कर रहे राजीव गुप्ता की तरफ से हलफनामा दिया गया. 21 फरवरी 2023 को जस्टिस एआर मसूदी और ओपी शुक्ला की बेंच ने ऑर्डर रिजर्व कर दिया अब यही जस्टिस एआर मसूरी और ओपी शुक्ला की बेंच शुक्रवार 19 मई को अपना फैसला सुना सकती है.

 

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